दोस्तों, क्या एक गर्भवती महिला की जान समय पर इलाज मिलने से बच सकती थी? क्या पांच घंटे का इंतज़ार उसकी जिंदगी पर भारी पड़ गया? और अगर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, तो आखिर रेफर करने में इतनी देरी क्यों हुई? कैसे थराली स्वास्थ्य केंद्र के नए कारनामे ने माचा दिया हड़कंप! बताउँगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो चमोली जिले के थराली से सामने आए इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही 35 वर्षीय महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब पांच घंटे तक रखने के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है, स्थानीय लोग स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। आखिर उस दिन अस्पताल में क्या हुआ? रेफर करने में देरी क्यों हुई? और क्या इस मौत को टाला जा सकता था? वैसे तो दोस्तो उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग खुद दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। दोस्तों, उत्तराखंड राज्य बने 26 साल हो चुके हैं, लेकिन पहाड़ के कई गांव आज भी सड़क और एंबुलेंस जैसी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। चमोली के निजमुला घाटी से आई यह तस्वीर एक बार फिर सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है, जहां एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को डोली का सहारा लेना पड़ा। आखिर कब तक पहाड़ में डोली ही एंबुलेंस बनी रहेगी? और दूसरी दूसरी तरफ चमोली जिले का ही थराली समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को जहां आज कई सवाल घेरे हुए हैं। तो दोस्तो सुना आपने ये कहानी हमारे स्वास्थ्य केंद्रों की है या कहूं कि यहां तैनात डॉक्टर और स्टाफ के नए कांड की हैं।
दोस्तो चमोली जनपद के थराली विकासखंड में एक प्रसूता महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली में करीब पांच घंटे तक रखने के बाद हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बताया गया है कि मृतका सरिता देवी के पहले से दो बच्चे हैं, दोस्तो जानकारी के अनुसार, थराली विकासखंड के कुराड़ गांव निवासी सरिता देवी (35) पत्नी नरेंद्र कुमार को सोमवार सुबह करीब 8:30 बजे प्रसव पीड़ा होने पर परिजन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली लेकर पहुंचे थे बताया जा रहा है कि अस्पताल में कई घंटे तक उपचार के बाद दोपहर करीब 2 बजे महिला को 108 एंबुलेंस के माध्यम से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। डॉक्टर ने अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनोकोलॉजिस्ट) उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए महिला को कर्णप्रयाग रेफर किया था। हालांकि, कर्णप्रयाग पहुंचने पर चिकित्सकों ने प्रसूता को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है तथा स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। तो गजब हाल है दोस्तो अपने स्वास्थ्य विभाग का और दोस्तो इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ये मामला को डॉ. अमित रुद्र द्वारा देखा गया था। अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध न होने के कारण महिला को हायर सेंटर रेफर किया गया था। पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.-डॉ. संजय गुप्ता, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी- दोस्तो गौर हो कि उत्तराखंड में डॉक्टरों की कमी हमेशा सुर्खियों में बनी रहती है. प्रदेश के कई हॉस्पिटल डॉक्टर विहीन हैं, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है, लेकिन दोस्तो ऐसे मामले अपने उत्तराखंड के लिए लगातार बड़ी चुनौती बने हुए हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य मंत्री बदलने के बाद भी आज समादायिक स्वस्थ्य केंद्रों का ये काला सच है जिससे कोई शायद जानना ही नहीं चाहता, लेकिन सवाल ये कि कब तक उत्तराखंड के आम लोग गर्भवती महिलाएं सरकारी सिस्टम की भेंट चढती रहेंगी।