दोस्तो मई का महीना, अच्छी नौकरी का लालच और 8 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम। जी हां दोस्तो उत्तराखंड के दो भाइयों ने सोचा था कि वे विदेश जाकर अपने परिवार की गरीबी दूर करेंगे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि सितागंज की एक धोखेबाज़ ट्रैवल एजेंसी उन्हें सीधे मौत के कुएं में धकेलने जा रही है! रूस पहुंचते ही पासपोर्ट छीन लिया गया, मोबाइल बंद कर दिए गए और चारों तरफ सिर्फ बारूद और मिसाइलों के धमाके थे! बताउंगा आपको नरक के वो 97 दिन की कहानी रूस से उत्तराखंड लौटे दो भाइयों की जुबानी। दोस्तो आज मै आपके सामने लेकर आया हूं पिथौरागढ़ के धारचूला के दो सगे भाइयों—आनंद सिंह और भूपेंद्र सिंह कार्की की वो खौफनाक दास्तां, जो पिछले 97 दिनों से रूस के नरक में बंधक बने हुए थे! कैसे वे मिसाइल हमलों के बीच से जिंदा बचकर देवभूमि वापस लौटे और वहां उनके साथ क्या-क्या दरिंदगी हुई। दोस्तो यहां मै पाको खबर बताउं उससे पहले आप जरा इस वीडियो को देखिए और समझिए एक मां के लिए कितना सुकून देना वाला पल था।
दोस्तो आज मां के आंखों में ये खुशी के आंसू हैं, लेकिन दोस्तो कहानी शुरू होती है 5 मई 2026 को। धारचूला के कालिका-रांथी गांव के रहने वाले आनंद और भूपेंद्र सिंह कार्की बेहतर भविष्य के लिए सितागंज की एक ट्रैवल एजेंसी के झांसे में आते हैं। एजेंट उनसे नौकरी के नाम पर 8 लाख रुपये ऐंठता है और उन्हें मॉस्को भेज देता है। इस बात को लेकर घर पर खुशियां थीं कि अब बच्चे कमाएंगे, भूपेंद्र के घर में नया मेहमान आने वाला था। लेकिन 6 मई को मॉस्को की धरती पर कदम रखते ही इन दोनों भाइयों का पासा पलट गया। वहां कोई अच्छी नौकरी नहीं थी, बल्कि हथियारों से लैस कुछ अनजान लोग उनका इंतजार कर रहे थे। रूस में फंसे बेटों के लिए तड़पते और मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए बेबस परिवार का दर्द आप इस वीडियो में देख सकते हैं। दोस्तो भाइयों ने भारत लौटकर जो आपबीती सुनाई, वह रूह कंपा देने वाली है। मॉस्को पहुंचते ही उनके पासपोर्ट और वीजा जब्त कर लिए गए। उन्हें किसी अनजान सीक्रेट लोकेशन पर ले जाया गया। उनसे जबरन दिन में 14-14 घंटे बिना पैसों के मजदूरी कराई जाती थी। वहीं दोस्तो अगर वे काम करने से मना करते, तो बंदूकों की बट से उन्हें पीटा और धमकाया जाता था। और खाने के नाम पर क्या मिलता था? पूरे दिन की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद सिर्फ एक सूखी रोटी का टुकड़ा और एक अंडा! दोनों भाई भूख और खौफ से तड़प रहे थे। दोस्तो हद तो तब हो गई जब आखिरी बार घर पर फोन कर उन्होंने बताया कि वे जिस जगह बंद हैं, उसके ठीक ऊपर यूक्रेन के ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं! इधर दोस्तो इधर भारत में 20 दिनों तक बेटों से कोई संपर्क नहीं हुआ, तो घर में कोहराम मच गया। चिंता के मारे भाइयों के बुजुर्ग पिता को दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ गया। पूरा परिवार टूटने की कगार पर था।
इसके बाद मामले की गूंज देहरादून तक पहुंची। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया। राज्य सरकार ने सीधे भारत के विदेश मंत्रालय और रूस में भारतीय दूतावास (Indian Embassy) से संपर्क साधा। दिन-रात चले कूटनीतिक दबाव का असर यह हुआ कि रूसी प्रशासन को उन दोनों भाइयों को छोड़ना पड़ा। दोस्तो पूरे 97 दिनों के खौफनाक नरक को झेलने के बाद आखिरकार ये दोनों भाई सुरक्षित दिल्ली और फिर उत्तराखंड पहुंचे! वतन वापसी के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद दोनों भाइयों और उनके परिवार से फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना। दोस्तो आनंद और भूपेंद्र खुशकिस्मत थे कि वे मौत के मुंह से जिंदा लौट आए और आज अपने परिवार के साथ हैं। घर पहुंचते ही उनकी बूढ़ी मां ने रोते हुए कहा कि—”मेरे बच्चे आ गए, धामी सरकार का धन्यवाद, लेकिन जो 8 लाख रुपये एजेंट ने खाए हैं, वो हमें वापस दिला दो।” लेकिन सवाल उन फर्जी ट्रैवल एजेंटों से है जो पैसों के लालच में हमारे पहाड़ के युवाओं को विदेशों में मानव तस्करी और युद्ध के मैदान में झोंक रहे हैं। युवाओं के लिए भी यह एक बड़ा सबक है—मोटे पैकेज के लालच में किसी भी ऐरे-गैरे एजेंट को लाखों रुपये न दें, जब तक कि पूरी जांच न कर लें। दोस्तो इस वीडियो को जिम्मेदारों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आपकी है दोस्तो पिथौरागढ़ के इन दो बेटों की सुरक्षित वापसी पर आपकी क्या राय है? और उन धोखेबाज एजेंटों को क्या सजा मिलनी चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि कोई और युवा इस जालसाजी का शिकार न हो। चैनल को सब्सक्राइब करना न भूलें।