विवादों में यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड? | YUCA Award | Shweta Mehra | Inder Arya | Uttarakhand News

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दोस्तो क्या देवभूमि उत्तराखंड की कला, संस्कृति और संगीत को आगे बढ़ाने का दावा करने वाले मंच आज खुद विवादों के दलदल में धंस चुके हैं! वो अवॉर्ड शो, जिसे उत्तराखंड का सबसे बड़ा सिनेमाई महाकुंभ कहा जाता है, आज उसी की साख दांव पर लगी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि बिक गए उत्तराखंड के यूका अवार्ड्स जैसे आरोप ने हड़कंप मचा दिया और क्या इदर आर्या और श्वेता महरा ने कहा जिसे एक बड़े धमाके तौर पर देखा गया, बताउंगा आपको विवाद की पूरी खबर। दोस्तो मै आज उस विवाद की बात कर रहा हूं, जो है तो एक अवार्ड लेकिन आज विवादों के भंवर में है। दोस्तो बात तर रहा हूं 14वें यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स यानी YUCA 2026 की! जिसके भव्य आयोजन की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे इसके पीछे का कथित खेल उजागर हो रहा है! दोस्तो उत्तराखंड की मशहूर अभिनेत्री श्वेता महरा और सुरों के बेताज बादशाह इंदर आर्या ने इस अवॉर्ड शो की निष्पक्षता को तार-तार कर दिया है! आरोप हैं पक्षपात के, आरोप हैं अवॉर्ड्स के बिकने के और आरोप हैं बड़े कलाकारों को किनारे लगा देने के! क्या वाकई YUCA अवॉर्ड्स अब सिर्फ एक ‘फिक्सिंग का खेल’ बनकर रह गए हैं? दोस्तो उत्तराखंड फिल्म और संगीत इंडस्ट्री। जो कभी अपनी सादगी के लिए जानी जाती थी, आज वो गुटबाजी और आरोपों की आग में सुलग रही है! 14वें यंग उत्तराखंड सिने अवार्ड्स की घोषणा के साथ ही वो चिंगारी भड़की है, जिसने पूरे उत्तराखंड के सोशल मीडिया को हिलाकर रख दिया है।

उत्तराखंड की स्टार अभिनेत्री और गायिका श्वेता महरा ने सीधे-सीधे ज्यूरी पर उंगली उठा दी है। श्वेता का साफ कहना है कि ‘ये अवॉर्ड शो बिक चुके हैं!’ पक्षपात का ऐसा नंगा नाच चल रहा है जहां काबिलियत को नहीं, बल्कि भाई-भतीजावाद को तवज्जो दी जा रही है! दोस्तो लेकिन कहानी सिर्फ श्वेता महरा पर आकर नहीं रुकती! उत्तराखंड के सबसे चहेते गायकों में से एक, इंदर आर्या ने जो पोल खोली है, उसने आयोजकों के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। इंदर आर्या ने अपने पिछले कड़वे अनुभवों को साझा करते हुए सीधे पूछा है कि कलाकारों के बीच ये ‘क्लास सिस्टम’ क्यों? रिहर्सल के नाम पर कुछ रसूखदार कलाकारों को घंटों का वक्त दिया जाता है, जबकि जमीनी कलाकारों को महज 10 से 15 मिनट में समेट दिया जाता है! हद तो तब हो गई जब ठहरने के लिए मिलने वाले होटलों में भी भेदभाव बरता गया। चहेतों के लिए ‘लग्जरी होटल’ और बाकियों के लिए ‘साधारण कमरे’—क्या यही है उत्तराखंडी संस्कृति का सम्मान? वैसे, दोस्तो YUCA अवार्ड्स के साथ विवादों का नाता कोई नया नहीं है। इतिहास गवाह है कि जब-जब इस अवॉर्ड शो का बिगुल बजा है, तब-तब कुमाऊँनी और गढ़वाली कलाकारों के बीच संतुलन बनाने और ज्यूरी के फैसलों पर उत्तराखंड की जनता ने उंगलियां उठाई हैं। बीते सालों में भी कई बड़े गायकों और निर्देशकों ने अवॉर्ड न मिलने पर दबी जुबान में नाराजगी जताई थी, लेकिन इस बार ये गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फटा है! सोशल मीडिया पर फैंस पूछ रहे हैं कि क्या इन प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स के बंद कमरों में ‘डील’ होती है?

दोस्तो आखिर क्या है YUCA अवार्ड्स और क्यों इस पर इतना बड़ा बवाल खड़ा हुआ है? यहां आपको बता दूं दोस्तो कि, यंग उत्तराखंड संस्था द्वारा इस अवॉर्ड की शुरुआत साल 2009 में इंटरनेट के माध्यम से प्रवासी उत्तराखंडी युवाओं को जोड़ने और स्थानीय कला-सिनेमा को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंडी सिनेमा, लोक संगीत और संस्कृति को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत पहचान दिलाना है। यह अवॉर्ड देवभूमि की कला के लिए ‘ऑस्कर’ जैसा माना जाता रहा है, दोस्तो इसलिए इससे कलाकारों की भावनाएं और प्रतिष्ठा सीधे जुड़ी होती हैं। दोस्तो अगर बीते वक्त की बात करें, तो इस मंच ने उत्तराखंड के दिग्गजों को सलाम किया है। अतीत में वरिष्ठ गायिका मंजू बहुगुणा को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ और लोक लाकार योगेंद्र बाबू जैसे महारथियों को इस मंच से नवाजा जा चुका है। और इस साल, यानी 2026 में भी, आयोजकों ने देहरादून की प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की है कि ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ वरिष्ठ अभिनेता विमल बहुगुणा को और ‘गोपाल बाबू गोस्वामी लीजेंड्स सिंगर अवॉर्ड’ खुद जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण को दिया जाएगा! इस बार तो बेस्ट फिल्म के लिए 1 लाख रुपये की सम्मान राशि की भी घोषणा की गई है। इधर दोस्तो एक तरफ आयोजकों का दावा है कि उन्होंने पारदर्शिता के लिए फिल्म और संगीत क्षेत्र के विशेषज्ञों की अलग-अलग निष्पक्ष ज्यूरी बनाई है। आने वाले 30 अगस्त 2026 को देश के सबसे वीवीआईपी वेन्यू भारत मंडपम में इस भव्य समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं.. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस भव्यता की नींव पर ही पक्षपात और भेदभाव के गंभीर आरोप लग चुके हों, क्या वो भव्यता उत्तराखंड की असली लोक-संस्कृति के साथ न्याय कर पाएगी? क्या इंदर आर्या और श्वेता महरा के आरोपों का आयोजक कोई ठोस जवाब देंगे या फिर हमेशा की तरह इस विवाद को कालीन के नीचे दबा दिया जाएगा? दोस्तो यहां सवाल बहुत गहरे हैं और जवाब आयोजकों को देना ही होगा! उत्तराखंड की जनता अपनी लोक संस्कृति को बहुत शिद्दत से प्यार करती है। अगर इन अवार्ड्स के पीछे वाकई कोई सिंडिकेट या भाई-भतीजावाद चल रहा है, तो यह देवभूमि की कला की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। देखना दिलचस्प होगा कि 30 अगस्त को भारत मंडपम की चमचमाती लाइट्स में इन आरोपों की कालिख धुल पाती है या विवादों की ये आग पूरे शो को ही स्वाहा कर देगी! आप इस पूरे विवाद पर क्या सोचते हैं? क्या आपको भी लगता है कि उत्तराखंड के अवॉर्ड शो में भेदभाव होता है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।