उत्तराखंड में मानसून अब कई इलाकों के लिए आफत बनता जा रहा है। पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कहीं सड़कें पानी के तेज बहाव में दरिया बन गई हैं, तो कहीं उफनते नाले लोगों के लिए जानलेवा चुनौती बन चुके हैं। कैसे जान जोखिम में डाल कर गाड-गधेरे पार कर रहे हैं लोग, देखेंगे तो डर से कांप उठेंगे। दोस्तो पूरी उत्तराखंड के पहाड़ों से जो तस्वीरें भारी बारिश की तस्वीरें देखने को मिल रही है वो डराने का काम कर रही है। क्योंकि मै आपको एक नहीं कई तस्वीरें दिखाने जा रहा हूं कैसे उत्तराखंड में कहर बरपा रहा है मौनसून। उत्तरकाशी से सामने आई तस्वीरें हालात की गंभीरता को बयां कर रही हैं, जहां भारी बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर हैं और लोग मजबूरी में अपनी जान जोखिम में डालकर रास्ते पार करने को मजबूर हैं। हर कदम पर खतरा है, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोगों को इसी मुश्किल सफर से गुजरना पड़ रहा है। दोस्तो मानसून की शुरुआत के साथ ही मोरी विकासखंड की बड़ासु पट्टी के दूरस्थ गांवों के सामने एक बार फिर संपर्क संकट गहरा गया है सांकरी–गंगाड़–ओसला मोटर मार्ग पर हलारा और पूर्ति खड्ड में जलस्तर बढ़ने से सड़क पर तेज बहाव आ गया है। हालात ऐसे हैं कि वाहन चालकों और ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर इन उफनते खड्डों को पार करना पड़ रहा है।
दोस्तो ग्रामीणों के अनुसार दोनों खड्डों पर पुल नहीं होने के कारण हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति उत्पन्न होती है। इस बार भी मानसून की पहली बारिश के साथ ही खड्ड उफान पर हैं। तेज बहाव के बीच दोपहिया वाहन निकालने के लिए पांच से दस लोगों की मदद लेनी पड़ रही है, जबकि चारपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों के बहने का खतरा लगातार बना हुआ है। कई लोग जरूरी कार्यों के लिए जोखिम उठाकर आवाजाही कर रहे हैं। दोस्तो मै उत्तरकाशी आगे बात करूं उससे पहले आपको हाले रुद्रप्रयाग बताता हूं और देखिए क्या कह रहा है प्रशासन। वहीं दोस्तो बात अगर उत्तरकाशी जिले की करूं तो यहां भारी बारिश ने आम जान के जीवन को प्रभावित किया जिस पर स्थानीय प्रशान भी नजर बनाए हुए वहीं जिला अधिकारी हर तस्वीर पर नजर बनाए हुए। दोस्तो प्रशांत आर्य कहते हैं कि, मोरी क्षेत्र की समस्या की जानकारी मिलने के बाद पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। बरसात के दौरान सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सड़क पर आवाजाही हर संभव सुचारू रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा आपदा मद से आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित करने और स्थिति पर लगातार निगरानी रखने को भी कहा गया है। वहीं दोस्तो स्थानीय लोगों को सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी है वो कि बारिश की वजह से हर साल क्षेत्र का संपर्क देश-दुनिया से लगभग कट जाता है और हर साल पुल निर्माण और वैकल्पिक मार्ग की मांग उठाई जाती है, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समय क्षेत्र में सेब, राजमा और चौलाई जैसी नगदी फसलों की तैयारियां चल रही हैं। आने वाले दिनों में इन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना होगा, लेकिन यदि सड़क इसी तरह बाधित रही तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही बीमार मरीजों, स्कूली बच्चों और आवश्यक सेवाओं के आवागमन पर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। वही दोस्तो ग्रामीणों ने कहते हैं कि, कई बार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों से दोनों खड्डों पर स्थायी पुल निर्माण और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग बनाने की मांग की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। तो देखा आपने, मानसून की बारिश पहाड़ों के लिए सिर्फ पानी नहीं, बल्कि हर साल एक नई चुनौती लेकर आती है। उफनते गाड़-गधेरे, टूटी राहें और जोखिम भरा सफर आज भी कई गांवों की मजबूरी बने हुए हैं। अब जरूरत है सिर्फ राहत की नहीं, बल्कि ऐसे स्थायी समाधान की, ताकि ग्रामीणों को हर बरसात में अपनी जान दांव पर लगाकर रास्ते पार न करने पड़ें।