दोस्तो कल जिसे दुनिया एक साधारण भूकंप समझ रही थी, वो दरअसल हिमालय की छाती पर फटा कुदरत का सबसे बड़ा ‘परमाणु बम’ था! तिब्बत की 17,000 फीट की ऊंचाई से गिरे एक महा-ग्लेशियर ने नेपाल को देखते ही देखते श्म’शान घाट में तब्दील कर दिया है! 160 से ज्यादा ला’शें मिल चुकी हैं, 1000 से ज्यादा लोग लापता हैं, और सबसे बड़ा खौफ ये है कि कैलाश मानसरोवर गए 133 भारतीय तीर्थयात्रियों का कुछ पता नहीं चल रहा है! दोस्तो आखिर अमेरिकी भूवैज्ञानिकों ने आज सुबह नेपाल की इस कयामत को लेकर कौन सा ऐसा खौफनाक खुलासा किया है, जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं? बताउंगा आपको पूरी खबर।दोस्तो 26 अगस्त को जब नेपाल की धरती कांपी, तो दुनिया को लगा कि 4.4 तीव्रता का कोई आम भूकंप आया है, लेकिन आज सुबह अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS की रिपोर्ट ने इस प्रलय का वो सच सामने रखा है जो रूह कंपा दे। दोस्तो, तिब्बत सीमा पर 17000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद एक विशालकाय हैंगिंग ग्लेशियर का 2000 फीट चौड़ा हिस्सा अचानक टूट गया। ये बर्फ और चट्टान का पहाड़ 4000 फीट नीचे सीधे ल्हेन्दे खोला नदी घाटी में गिरा। इसकी टक्कर इतनी भयानक थी कि धरती 5.2 तीव्रता के भूकंप की तरह डोल उठी और नदी का रास्ता ब्लॉक होते ही जलप्रलय आ गई। दोस्तो इस प्रलय ने सिर्फ नेपाल को ही नहीं जख्मी किया, बल्कि हिंदुस्तान के सैकड़ों घरों में कोहराम मचा दिया है। वैश्विक मीडिया के मुताबिक, लापता 800 लोगों में 133 भारतीय तीर्थयात्री शामिल हैं, जो बाबा बर्फानी और कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए तिब्बत सीमा की तरफ बढ़े थे। पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई परिवार अपने अपनों की एक खबर के लिए तड़प रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने तुरंत मोर्चा संभाला है। इधर दोस्तो, भारतीय वायुसेना का C-130J विमान १० टन राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंच चुका है, और सेना के जवान रेस्क्यू में जुट गए हैं। दोस्तो इंसान ने जिन नदियों को बांधकर, पहाड़ों का सीना चीरकर कंक्रीट के बड़े-बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स खड़े किए थे, कुदरत के एक थप्पड़ ने उन्हें ताश के पत्तों की तरह बिखेर दिया। नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली घाटी में बने 12 बड़े जलविद्युत प्रोजेक्ट्स इस वक्त मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। अरबों रुपये का इंफ्रास्ट्रक्चर स्वाहा हो चुका है और नेपाल की 10 प्रतिशत बिजली गुल है। चीन और नेपाल को जोड़ने वाला सबसे बड़ा व्यापारिक रास्ता ‘जिरोंग पोर्ट’ अब नक्शे से गायब हो चुका है। दोस्तो नेपाल का यह सैलाब अब भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने बिहार के पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर के लिए महा-अलर्ट जारी किया है, क्योंकि त्रिशूली नदी का पानी गंडक के रास्ते बिहार में 3 मीटर तक उफान मार रहा है। लेकिन इधर दोस्तो जब नेपाल का पानी उत्तराखंड को छू भी नहीं रहा था तो फिर सबसे बड़ी चेतावनी उत्तराखंड के लिए क्या और क्यों है! दोस्तो इसरो (ISRO) की रिपोर्ट पहले ही कह चुकी है कि उत्तराखंड के 13 ग्लेशियर इसी तरह के ‘टाइम बम’ बने हुए हैं। अगर आज नेपाल और तिब्बत में 2000 फीट का ग्लेशियर गिर सकता है, तो कल उत्तरकाशी या चमोली में भी ऐसा ही महाविनाश हो सकता है! दोस्तो तिब्बत और नेपाल की ये खौफनाक तस्वीरें कोई साधारण आपदा नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के विनाश का ट्रेलर हैं। पहाड़ों पर अंधा विकास और ग्लोबल वार्मिंग अगर नहीं रुकी, तो अगला नंबर किसी का भी हो सकता है दोस्तो नेपाल में फंसे भारतीय तीर्थयात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना करें। क्या आपको भी लगता है कि पहाड़ों पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बनाना पूरी तरह बंद होना चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।