Uttarakhand BJP: उत्तराखंड में धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में अब एक नया पेंच फंस गया है। माना जा रहा है कि नए मंत्रियों और पुराने मंत्रियों को हटाने पर हाईकमान की अंतिम फैसला लगा। इससे साफ हो गया कि मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले चेहरों पर फाइनल मुहर दिल्ली से ही लगेगी। हालांकि इससे पहले दायित्वधारियों की लिस्ट जारी हो सकती है। जो कि लंबे समय से हाईकमान के पास मुहर के लिए रुकी हुई थी। आने वाले कुछ दिनों में उत्तराखंड सरकार अपने कुछ दायित्वों का बंटवारा कर सकती है। उत्तराखंड में 80 से 100 निगम, परिषद और बोर्ड के ऐसे पद है जिन्हें भरकर भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। दायित्वधारियों की लिस्ट पहले ही संगठन के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, सीएम धामी के साथ मिलकर सहमति के बाद हाईकमान को सौंप चुके हैं।
जिसके बाद अब लिस्ट पर मुहर लगकर जारी होने का इंतजार है। दावा है कि आने वाले कुछ दिनों में पहले दायित्वधारियों की लिस्ट जारी कर दी गई है। उधर सबसे ज्यादा खींचतान मंत्रिमंडल को लेकर बताया जा रहा है। हाईकमान इस समय किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहती है। हालांकि चार सीटें खाली होने की वजह से विस्तार तय है। लेकिन किसको लाया जाए किसको बाहर किया जाए। इस पर अभी फाइनल मुहर लगना बाकि है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी जल्द मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर संकेत दिए हैं। लेकिन कब तक होगा इस पर अभी कोई खुलकर नहीं बता पा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि हाईकमान ने फिलहाल संभावित मंत्रियों और दावेदारों की लिस्ट तलब की है। जिस पर सभी समीकरणों को साधने और परफोर्मेंस देखकर ही हाईकमान किसी तरह का फैसला लगा। जिसके बाद अब दावेदारों की दिल्ली दौड़ भी शुरू हो गई है।
उत्तराखंड में चार सीटें मंत्रियों की पहले से खाली है। इसके अलावा दो से तीन मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। ऐसे में कम से कम 5 से 6 नए चेहरे धामी मंत्रिमंडल में शामिल किए जा सकते हैं। जिसके लिए दर्जनभर से ज्यादा दावेदार हैं। लेकिन इन दावेदारों को मंत्रियों की कुर्सी सौंपने पर फाइनल मुहर हाईकमान दिल्ली से ही लगाएगा। जो विधायक मंत्री पद की दावेदारी कर रहे हैं उनमें खजानदास, विनोद चमोली, मुन्ना सिंह चौहान, उमेश शर्मा, विनोद कंडारी, दुर्गेशलाल, आदेश चौहान, बिशन सिंह चुफाल, फकीर राम, प्रमोद नैनवाल, राम सिंह, बंशीधर भगत शामिल हैं। हालांकि जानकारों का मानना है कि भाजपा हाईकमान हमेशा अपने फैसलों से चैंकाती आ रही है। ऐसे में युवा और नए चेहरों को मौका देकर भाजपा नया दांव खेल सकती है।