Uttarkashi एक नहीं, दो बेटियां लापता! । Babita Pandey । Shweta Sharma । Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो एक नहीं दो-दो बेटियां लापता! एक साल से बेटी का कोई सुराग नहीं और अब दूसरी बेटी के गायब होने का दर्द भी उस मां के दिल में है। दोस्तों, दयारा बुग्याल से लापता हुई बबीता पांडे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार चर्चा सिर्फ बबीता की नहीं, बल्कि उसकी मां के उन सवालों की है जो कई नई आशंकाओं को जन्म दे रहे हैं। हाल में आपने एक तस्वीर देखी की बाबा बौकनाग के दरबार में पहुंची एक मां ने अपनी बेटी की खोज की, मेने भी वो खबर दिखाई थी। लेकिन दोस्तो इसमें थोड़ा करेक्शन करने भी आया हूं साथ में ये भी बताउंगा कि बबीता ही नहीं एक और बेटी का बीते एक साल से कोई पहता नहीं है। दोस्तो हाल में एक तस्वीर सामने आई जिसमें बाबा बौखनाग के दरबार में एक मां अपनी बेटी की पूछ कर रही है। दोस्तो ये वो वीडियो है जिसको लेकर अब नया खुलासा हुआ है, अब इस तस्वीर में जो महिला बैठी हैं वो बबीता की मां नहीं है लेकिन वो भी एक मां ही हैं। उस बेटी की जो बीते एक साल नहीं मिली और ना ही उसका कोई सुराग मिला। कैसे और क्या हुआ था। बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट में लेकिन दोस्तो बबीता पांडे कहां है और एक साल पहले से गायब बेटी कहा है। अब दोस्तो ये बबीता की मां नहीं है, लेकिन ये वाला मामला क्या है। दरअसल दोस्तो 23 जून 2025 को उत्तरकाशी में हुए लैंडस्लाइड में लापता हुई बेटी को एक मां आज भी तलाश रही है। दोस्तो दिल्ली की श्वेता शर्मा का कहना है पुलिस ने एक कटे पैर के डीएनए पर बेटी को मृत मान लिया, पर एक मां का दिल ये मानने को तैयार नहीं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री धाम यात्रा मार्ग पर 9 नंबर कैंची भैरव मंदिर के पास 23 जून 2025 को भारी भूस्खलन हुआ था। पैदल मार्ग का 20 मीटर हिस्सा और नेशनल हाईवे मलबे में तब्दील हो गया था। दोस्तो इस हादसे में मलबे की चपेट में आने से 5 यात्रियों की जान गई। इन्हीं में दिल्ली की श्वेता शर्मा की बेटी भी लापता हो गई थी।

पुलिस ने मौके से मिले एक कटे हुए पैर के डीएनए के आधार पर श्वेता की बेटी को मृत मान लिया, लेकिन श्वेता शर्मा का आरोप है कि डीएनए रिपोर्ट मिलने में 55 दिन लग गए और रिपोर्ट आते ही पुलिस ने केस बंद करने की बात कही। एक मां के लिए सिर्फ एक पैर का टुकड़ा बेटी की मौत का सबूत नहीं बन सकता। तो दोस्तों, एक तरफ दयारा बुग्याल से लापता बबीता पांडे का मामला है, जिसका जवाब आज भी परिवार तलाश रहा है। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली की श्वेता शर्मा हैं, जो एक साल बाद भी अपनी बेटी के लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी हैं..एक कटे हुए पैर के डीएनए के आधार पर फाइलें भले बंद हो जाएं, लेकिन एक मां के दिल में जिंदा उम्मीद को कौन बंद कर सकता है? यही वजह है कि श्वेता शर्मा आज भी अपनी बेटी को खोज रही हैं और मानने को तैयार नहीं कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है।लेकिन इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हादसे में लापता लोगों की तलाश और बेहतर तरीके से होनी चाहिए थी? क्या एक डीएनए रिपोर्ट किसी मां के सवालों का आखिरी जवाब हो सकती है? और क्या प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह निभाई?फिलहाल सच क्या है, इसका जवाब वक्त के पास है। लेकिन इतना जरूर है कि जिन परिवारों के अपने अचानक लापता हो जाते हैं, उनके लिए हर दिन एक नई उम्मीद और हर रात एक नई बेचैनी लेकर आती है..आप इस पूरे मामले को कैसे देखते हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।