VIP Cultureजागेश्वर में बड़ा विवाद! | IAS Avinash Singh | UP DM | CM Dhami | Uttarakhand News

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जी हां दोस्तो उत्तराखंड के बड़े धाम हो गया बड़ा विवाद, देवभूमि के पवित्र धाम में आखिर ये क्या हो गया? क्या अब मंदिरों की मर्यादा भी वीआईपी कल्चर के आगे छोटी पड़ने लगी है?जागेश्वर धाम से आई एक तस्वीर कई बड़े सवाल खड़े कर रही है—जहां आम श्रद्धालु नियमों में बंधे रहते है। वहीं एक आला अधिकारी गनर और असलहे के साथ गर्भगृह तक पहुंच जाता है!जब प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात SPG तक ने मंदिर के भीतर शस्त्र नहीं ले जाए, तो फिर ये छूट किसे और क्यों? बताता हूं आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो तो क्या नियम सिर्फ आम लोगों के लिए हैं? क्या आस्था के स्थानों पर भी पावर का प्रदर्शन होगा? दोस्तो जागेश्वर में उठे इस विवाद ने पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया है। आखिर जिम्मेदार कौन? देवस्थल में दोस्तो खबर ये है कि यूपी के बरेली के आला अधिकारी गनर सहित उत्तराखंड के जागेश्वर धाम के गर्भगृह में पहुंच गए। बताया जा रहा है कि यूपी के एक जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ही जागेश्वर धाम पहुंच गए थे। भोग पूजा के बाद वह आला अधिकारी जागेश्वर मंदिर पहुंचे उनके साथ सरकारी गनर भी मौजूद था। उत्तराखंड के एक प्रमुख मंदिर में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब बरेली के एक आईएएस कथित तौर पर अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मंदिर परिसर में प्रवेश कर गए। बताया जा रहा है कि मंदिर से जुड़े पारंपरिक नियमों और व्यवस्थाओं की अनदेखी किए जाने से पुरोहितों में नाराज़गी फैल गई। पूरा मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। जिसे लेकर विद्वानों ने कड़ा विरोध जताया है कहा जा रहा है कि वह बरेली के एक प्रमुख पद पर हैं और ख़ुद को शासन की निगाह में सबसे बेहतर बनाने के चक्कर में सिर्फ़ आईजीआरएस और पोर्टल पर रैंकिंग सुधारने पर ध्यान देते हैं बाक़ी जिले में क्या हो रहा वह उसे निजी तौर पर डील करते हैं।

फिलहाल मामले को लेकर उत्तराखंड में विवाद बढ़ गया है और कई हिंदू संगठनों ने उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। इस खबर को लेकर ये भी कहा गया कि मंदिर समिति की महिला पीआरडी कर्मचारी ने गनर को असलहा भीतर ले जाने से मना किया उसके बाद भी गनर आधुनिक असलहा सहित अधिकारी के साथ मंदिर के गर्भगृह में पहुंच गया। मंदिर के भीतर असलहा ले जाने की घटना का पुजारी और क्षेत्रीय लोग विरोध कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भला मंदिर के भीतर किसे कैसे खतरा हो सकता है। लोगों ने मंदिर के गर्भगृह में असलहा ले जाने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगाने की मांग उठाई है। साथ ही श्रद्धालुओं को जागरुक करने के लिए मंदिर के बाहर चेतावनी और नोटिस बोर्ड भी चस्पा करने की मांग उठाई है। वहीं दोस्तो जब इस बात की चर्चा हो रही है कि जागेश्वर धाम के गर्भगृह में असलाह पहुंच गया तो फिर जागेश्वर तो देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी भी गए थे। दोस्तो पीएम नरेंद्र मोदी 2023 में जागेश्वर धाम आए थे। उनकी सुरक्षा को देखते हुए पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील किया गया था और बड़ी बात ये है कि उनकी सुरक्षा में तैनात एसपीजी भी मंदिर के गर्भगृह में असलहा लेकर नहीं गई थी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जागेश्वर बाबा से काफी लगाव है, वह हर साल यहां पूजा अर्चना के लिए आते हैं। उनके सुरक्षा कर्मी भी असलहे लेकर मंदिर के गर्भगृह में नहीं जाते हैं असलहे वाले सुरक्षा कर्मियों को मंदिर प्रवेश द्वार पर खड़ा कर दिया जात है, लेकिन ये अधिकारी कैसे और क्यों पहुंच गया और दोस्तो पता है आपको वो अधिकारी कौन है। वो आईपीएस अधिकारी हैं बरेली के डीएम अविनाश सिंह, जो असलाह लिए गनर के साथ गृभगृह तक पहुंच गए।

दोस्तो यहां मै आपको बतादूं की जागेश्वर धाम में श्रद्धालुओं की तादात में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। सालाना लाखों भक्त बाबा के इस धाम में शीश नवाने पहुंचते हैं। लेकिन धाम में वीआईपी कल्चर भी खूब पनप रहा है। देश के विभन्न राज्यों से आने वाले नेता और अफसर मंदिर में वीआईपी ही बनकर पूजा करते हैं। स्थानीय लोगों ने मंदिर में वीआईपी सिस्टम ही खत्म करने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि वीआईपी हो या आम श्रद्धालु सभी के लिए नियम एक समान होने चाहिए.. इतना ही नहीं दोस्तो जागेश्वर मंदिर समूह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संरक्षित स्मारक है। इस मंदिर समूह का संरक्षण एएसआई करती है। मंदिर में बगैर इजाजत वीडियोग्राफी पर भी रोक है। एएसआई ने सुरक्षा कारणों को देखते हुए मंदिर में असलहा ले जाने पर भी रोक लगा रखी है। बावजूद कई वीआईपी और नेता लाव लस्कर के साथ मंदिर पहुंचते हैं और परिसर तक आसानी से असलहे ले जाते रहते हैं। अब एएसआई मंदिर परिसर के बाहर बोर्ड चस्पा करने की तैयारी में है। दोस्तो, सवाल अब भी वहीं खड़ा है—आखिर नियमों की असली अहमियत क्या है, अगर वो सब पर बराबर लागू ही नहीं होते?क्या आस्था के सबसे पवित्र स्थानों में भी वीआईपी कल्चर हावी रहेगा?क्या कानून और परंपराएं सिर्फ आम श्रद्धालुओं तक ही सीमित रह जाएंगी?और सबसे बड़ा सवाल—जब देश के प्रधानमंत्री तक के सुरक्षा कर्मी मंदिर की मर्यादा का पालन करते हैं तो फिर एक अधिकारी को ये छूट कैसे मिल गई?क्या इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होगी?या फिर ये विवाद भी वक्त के साथ ठंडा पड़ जाएगा?जागेश्वर धाम की इस घटना ने सिर्फ एक नियम तोड़ने की बात नहीं उठाई बल्कि सिस्टम, समानता और आस्था—तीनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।अब देखना ये होगा कि प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्ती दिखाई जाएगी या नहीं।