उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ों में आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि लोग अचानक लापता हो जा रहे हैं? 15 हजार फीट की ऊंचाई पर 8 लोग गायब हैं। पीछे छूट गया टेंट, बैग और सामान! लेकिन इंसान कहां गए? बबीता पांडे से लेकर विशेष चौहान तक, कई गुमशुदगियां आज भी सवाल बनी हुई हैं। आखिर कुदरत का कहर या सिस्टम की नाकामी? पूरी खबर देखिए दोस्तो आप भी दंग रह जाएंगे। दोस्तो उत्तराखंड के वो पहाड़, जिन्हें हम खूबसूरती का मक्का कहते हैं, क्या वो अब इंसानों को निगलने वाले रहस्यमयी डेथ ट्रैप बन चुके हैं? क्या देवभूमि के बर्फीले रास्तों पर कोई अदृश्य ताकत काम कर रही है? यह सवाल आज हम इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि केदारताल ट्रैक पर 15,000 फीट की ऊंचाई से अचानक 7 ट्रैकर्स और 1 स्थानीय गाइड गायब हो चुके हैं! चार दिन बीत चुके हैं। आसमान से लेकर जमीन तक, SDRF, उत्तराखंड पुलिस और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की टीमें चप्पा-चप्पा छान रही हैं, लेकिन इन 8 लोगों का कोई नामो निशान नहीं है! मिला है तो सिर्फ बर्फ में दबा एक लाल रंग का टेंट, चप्पलें और राशन, लेकिन इंसान गायब हैं! आखिर कहाँ गए वो लोग? क्या वो जिंदा हैं, या बर्फ की चादर के नीचे हमेशा के लिए सो गए हैं?! दोस्तो मामला उत्तरकाशी जिले के सबसे दुर्गम माने जाने वाले केदारताल ट्रैक का है। बीते 27 अक्टूबर को 13 लोगों का एक दल गंगोत्री से रवाना हुआ था। 29 अक्टूबर को इन्हें वापस लौटना था, लेकिन रास्ते में आया एक भयानक एवलॉन्च (बर्फीला तूफान) और रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए!
इधर दोस्तो SDRF की एडवांस टीम करीब 4,000 मीटर यानी 13,000 फीट से ज्यादा की ऊंचाई पर ‘केदार खड़क’ के पास पहुंची, तो वहां का मंजर देखकर सबके होश उड़ गए! वहां लापता ट्रैकर्स का टेंट खड़ा था, उनके बैग मिले, कपड़े मिले, खाने का सामान मिला, लेकिन वो 8 जिंदगियां गायब थीं! सैटेलाइट फोन से मिली जानकारी के मुताबिक, यहां लगातार भारी बर्फबारी हो रही है। तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे जा चुका है। हालात इतने बदतर हैं कि रेस्क्यू टीम को खुद को बचाने के लिए वहीं सुरक्षित कैंप बनाकर रात बितानी पड़ रही है। लेकिन दोस्तो सबसे बड़ा सस्पेंस यही है कि अगर तूफान आया था, तो टेंट वहीं सही-सलामत कैसे खड़ा रहा? और अगर टेंट सही-सलामत था, तो उसमें मौजूद लोग कहाँ चले गए? दोस्तो सबसे चौकाने वाली बात तो ये है कि यह उत्तराखंड के पहाड़ों में कोई पहली रहस्यमयी गुमशुदगी नहीं है। पिछले कुछ महीनों के इतिहास को खंगालिए, तो देवभूमि के ये ऊंचे ट्रैक किसी ‘बरमूडा ट्राइएंगल’ जैसे नजर आने लगते हैं! जहाँ लोग जाते तो हैं, पर लौटकर कभी वापस नहीं आते! बबीता पांडे का महा-रहस्य, इसी साल 29 मई की रात को याद कीजिए। उत्तरकाशी के ही खूबसूरत दयारा बुग्याल के गोई बेस कैंप से 24 साल की एमबीए छात्रा बबीता पांडे रहस्यमयी तरीके से गायब हो गई! पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP और यहां तक कि सेना के खोजी कुत्तों ने महीनों तक पूरा जंगल छान मारा। बबीता का अंतिम सीसीटीवी फुटेज रैथल गांव में दिखा था।
स्थानीय लोग कहने लगे कि बबीता को ‘परियां’ या ‘आंचरियां’ उठा ले गईं! महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक बबीता पांडे का एक भी सुराग नहीं मिला! इतना ही नहीं दोस्तो एक और कैस, विशेष (अभिषेक) चौहान का गायब होना, ठीक उसी रात, यानी 29 मई को ही बागेश्वर के विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक से नोएडा का एक होनहार सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान उर्फ विशेष चौहान अचानक गायब हो जाता है! दोस्तो विशेष चौहान अपने पोर्टर से थोड़ा अलग हुआ और फिर कभी नहीं दिखा। रेस्क्यू टीम को खाई में 60-70 मीटर नीचे रस्सी के सहारे उतरने पर विशेष का कैमरा, जैकेट और टोपी तो मिल गए, लेकिन विशेष चौहान का शरीर आज तक नहीं मिला! बेबस पिता ने अपने इकलौते बेटे को ढूंढने वाले को 10 लाख रुपये का इनाम तक देने की घोषणा कर दी, लेकिन पहाड़ का सस्पेंस नहीं टूटा! OAMDLA आखिर क्या वजह है कि पहाड़ों में टेंट मिल जाता है, कैमरे मिल जाते हैं, कपड़े मिल जाते हैं, लेकिन इंसान गायब हो जाते हैं? आखिर कहाँ खो रहे हैं ये लोग? क्या ये ट्रैकर्स बिना तैयारी और बिना गाइड के इन खतरनाक रास्तों पर चले जाते हैं?या फिर प्रशासन के पास इतनी ऊंचाई पर सर्च करने के लिए आज भी आधुनिक तकनीकों और थर्मल इमेजेस वाले हाई-टेक ड्रोन्स की कमी है? केदारताल में भी दो बार हेलीकॉप्टर से हवाई रेकी की गई, लेकिन बर्फीले ढलानों के कारण कुछ नजर नहीं आया। जब भी कोई हादसा होता है, तो कागजी नियम बना दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि आज भी पहाड़ों पर जाने वाले ट्रैकर्स की सुरक्षा पूरी तरह से राम भरोसे है। दोस्तो केदारताल में मौसम साफ होते ही SDRF और NIM के जवान फिर से जान की बाजी लगाकर सर्च ऑपरेशन शुरू करेंगे। हम सब दुआ करते हैं कि केदारताल में लापता हुए वो 8 लोग सकुशल वापस लौट आएं। लेकिन सरकार और प्रशासन को अब जागना होगा! दयारा बुग्याल की बबीता पांडे और पिंडारी ग्लेशियर के विशेष चौहान जैसे अनसुलझे रहस्य इस बात की गवाही हैं कि अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो देवभूमि के ये पहाड़ ऐसे ही रहस्यमयी तरीके से जिंदगियों को निगलते रहेंगे!