मां नंदा की यात्रा में ये क्या हुआ? | Nandad Devi Badi Jaat | Suttol | Kanol | Uttarakhand News

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दोस्तो, जिस पावन धरती पर मां नंदा के जयकारे गूंजने चाहिए थे, वहीं सुतोल-कनोल में बवाल ने ऐसा रूप ले लिया कि हालात हिंसक भिड़ंत तक पहुंच गए!आस्था के रास्ते पर तलवारें क्यों चलीं? कई लोग घायल हुए, छात्र नेता भी लहूलुहान हो गया—आखिर विवाद की जड़ क्या है?सवाल ये भी है कि जब यात्रा के दौरान इतनी बड़ी भीड़ और संवेदनशील माहौल था, तो सुरक्षा व्यवस्था कहां थी?विवाद से जुड़े सवाल और अब तक की पूरी तस्वीर। दोस्तो हिमालय का महाकुंभ कही जाने वाली पावन नंदा देवी बड़ी जात यात्रा इस वक्त एक बेहद खौफनाक विवाद के भंवर में फंस चुकी है! यह तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे मां नंदा के पवित्र पड़ाव पर आस्था की जगह नफरत का नंगा नाच खेला गया। चमोली के दुर्गम कैलुवा विनायक और पातरनचौड़िया क्षेत्र में शुक्रवार को अचानक ऐसा गदर मचा कि पूरा यात्रा मार्ग चीख-पुकार से गूंज उठा। सुतोल और कनोल गांव के सैकड़ों ग्रामीण लाठी-डंडों और धारदार हथियारों के साथ आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते वहां खूनी खेल शुरू हो गया। दोस्तो जिस यात्रा को देवभूमि उत्तराखंड की अटूट आस्था, भाईचारे और लोक संस्कृति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है, आखिर वो यात्रा जंग के मैदान में कैसे तब्दील हो गई? क्या आस्था के नाम पर अब पहाड़ों की चोटियों पर सरेआम खून बहाया जाएगा? चमोली में चल रही मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा के पड़ाव से एक ऐसी खौफनाक और शर्मसार कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया है। सुतोल और कनोल गांव के सैकड़ों ग्रामीण आपस में इस कदर भिड़ गए कि लाठी-डंडों से लेकर सीधे धारदार हथियार और तलवारें खिंच गईं! कई लोग लहूलुहान हैं और एक छात्र नेता जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। आखिर इस महासंग्राम की पूरी हकीकत क्या है और कहां सोया था प्रशासन।

दोस्तो इस हिंसक झड़प में करीब 10 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में ग्राम सभा के उपप्रधान कमल सिंह और कैलुवा विनायक के पुजारी रंजीत सिंह भी शामिल हैं। आरोप है कि सुतोल के द्योसिंह देवता के पुजारी और पंचानाम देवता के पसुवा को भी बेरहमी से पीटा गया। इस जानलेवा हमले में गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र नेता रणजीत सिंह के सिर पर गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में एयर एंबुलेंस के जरिए ऋषिकेश हायर सेंटर रेफर करना पड़ा। सवाल ये है कि मां नंदा की विदाई के इस पवित्र सफर में ये हिंसक मानसिकता कहां से आई? लेकिन दोस्तो आखिर इस खूनी महासंग्राम की असली वजह क्या है? स्थानीय सूत्रों और पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, सुतोल और कनोल गांवों के बीच कीड़ा-जड़ी यानी यारसागुम्बा के क्षेत्र और पारंपरिक वन सीमाओं को लेकर वर्षों से पुराना विवाद चला आ रहा है। बताया जा रहा है कि जन्माष्टमी के दिन भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसे तब शांत करा दिया गया था। लेकिन शुक्रवार को यह नफरत इस कदर भड़की कि पवित्र यात्रा के दौरान ही दोनों पक्ष हिंसक हमले पर उतारू हो गए। सुतोल के ग्रामीणों का आरोप है कि कनोल के सैकड़ों युवक पहले से ही सुनियोजित साजिश के तहत हथियारों के साथ मौके पर घात लगाकर बैठे थे! दोस्तो इस भयानक वारदात के बाद पूरे चमोली जिले और यात्रा मार्ग पर भारी तनाव व्याप्त है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें सक्रिय हो गई हैं और दुर्गम पड़ावों की ओर भारी पुलिस बल रवाना कर दिया गया है। पुलिस दोनों पक्षों से लगातार इनपुट्स जुटा रही है। नंदानगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की टीम बाकी घायलों का इलाज कर रही है। सबसे बड़ा और तीखा सवाल ये खड़ा होता है कि जब प्रशासन को इस पुराने सीमा विवाद की भनक पहले से थी, तो यात्रा के इन बेहद संवेदनशील पड़ावों पर पर्याप्त सुरक्षा और मजिस्ट्रेट की तैनाती क्यों नहीं की गई थी? क्यों यात्रियों की सुरक्षा को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया? वहीं दोस्तो नंदा देवी बड़ी जात यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की अस्मिता और गौरव का विषय है। देश-दुनिया से आए श्रद्धालुओं के सामने देवभूमि के ही दो गांवों का इस तरह आपस में तलवारें भांजना बेहद शर्मनाक है। क्या प्रशासन इस खूनी खेल के जिम्मेदार उपद्रवियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई करेगा जो एक मिसाल बने? या फिर दूरस्थ और मोबाइल नेटवर्क विहीन क्षेत्र का बहाना बनाकर इस बड़ी प्रशासनिक लापरवाही पर पर्दा डाल दिया जाएगा! दोस्तो आस्था के इस पावन सफर में हुई यह हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त के काबिल नहीं है। अगर देवभूमि के लोग ही यात्रा मार्ग पर अपनों का खून बहाएंगे, तो बाहरी श्रद्धालुओं को हम क्या संदेश दे रहे हैं? चमोली पुलिस और प्रशासन के सामने अब यात्रा को सुरक्षित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की बहुत बड़ी चुनौती है।