दोस्तो अंकिता भंडारी केस में आया नया भूचाल! इंसाफ की आवाज दबाने के लिए अब कोर्ट के भीतर तक पहुंच गए हैं हत्यारों के हाथ!नैनीताल हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट नवनीश नेगी को मिला है खौफनाक, गुमनाम खत! Ankita Bhandari Case Uttarakhand High Court जिसमें सीधे शब्दों में लिखा है— ‘पहले एक्सीडेंट, फिर सीधा हमला!’ आज देवभूमि पूछ रही है कि न्याय की आवाज दबाने की इतनी बड़ी साजिश के पीछे आखिर वो कौन सा रसूखदार वीआईपी छुपा है, जिसे अंकिता के वकील को ही रास्ते से हटाने की सनक सवार हो गई है?! दोस्तो क्या देवभूमि उत्तराखंड में अब इंसाफ की लड़ाई लड़ना गुनाह हो चुका है? क्या अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की आवाज उठाने वालों की जुबान पर ताला लगाने की कोशिश की जा रही है? जी हां! उत्तराखंड को हिला देने वाले अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक ऐसा मोड़ आया है, जिसने पूरे सूबे की कानून व्यवस्था और सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं! इस बार निशाना कोई गवाह नहीं, बल्कि कानून की वो ढाल है जो अंकिता के हक में हाईकोर्ट में दहाड़ रही है! नैनीताल हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट नवनीश नेगी को एक खौफनाक, धमकी भरा खत मिला है! खत में साफ लिखा है—’पहले एक्सीडेंट करेंगे, फिर सीधे जान से मारेंगे!’ आज सवाल ये है कि आखिर वो कौन सा सफेदपोश है, वो कौन सा रसूखदार वीआईपी है, जो इस कदर बौखला गया है कि अब न्याय के रखवालों को ही खत्म करने की धमकी दे रहा है? दोस्तो उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी के हत्यारों को फांसी के फंदे तक पहुंचाने की जंग अब और ज्यादा खतरनाक मोड़ पर आ गई है। इस केस की पैरवी कर रहे उत्तराखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीश नेगी को एक गुमनाम, लेकिन बेहद खौफनाक चिट्ठी मिली है। इस चिट्ठी के सामने आते ही राजधानी देहरादून से लेकर नैनीताल तक हड़कंप मच गया है।
पत्र में सीधे-सीधे धमकी दी गई है कि अगर इस केस से पैर पीछे नहीं खींचे, तो अंजाम बेहद बुरा होगा। अब वकील को मिली बड़ी दमकी के बाद वकीलों के साथ- साथ आम जन में भी गुस्सा पनप रहा है। यह कोई आम धमकी नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी क्रिमिनल प्लानिंग की तरह दिखती है। इस पत्र में कई भाषाओं का इस्तेमाल किया गया है, ताकि भेजने वाले की पहचान छुपाई जा सके। खत में लिखा है—’पहले तुम्हारा एक्सीडेंट करवाया जाएगा, और अगर फिर भी नहीं सुधरे, तो सीधे जानलेवा हमला होगा।’ जरा सोचिए, अंकिता भंडारी केस में पहले भी कई गवाहों को डराने-धमकाने के आरोप लगे, और अब सीधे देश की सबसे बड़ी अदालत के बाद सूबे की सबसे बड़ी अदालत, यानी हाईकोर्ट के वकील को निशाना बनाया जा रहा है। अधिवक्ता नवनीश नेगी ने बिना वक्त गंवाए इस पूरे मामले की तहरीर पुलिस को सौंप दी है और मामले की जांच शुरू हो चुकी है। इस धमकी भरे पत्र के बाद उत्तराखंड के तमाम बार एसोसिएशनों और अधिवक्ताओं में भारी रोष है। वकीलों का कहना है कि अगर न्यायपालिका के अधिकारियों और अधिवक्ताओं को ही सुरक्षा नहीं मिलेगी, तो पीड़ित परिवारों को न्याय कैसे मिलेगा? इस घटना के बाद एक बार फिर उत्तराखंड में ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ यानी अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। वकीलों ने साफ कर दिया है कि अगर पुलिस ने जल्द से जल्द इस धमकी के पीछे के मास्टरमाइंड को बेनकाब नहीं किया, तो पूरे राज्य में वकील सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे। लेकिन दोस्तो साजिशकर्ताओं को शायद यह नहीं पता कि न्याय की मशाल को धमकियों की फूंक से बुझाया नहीं जा सकता। धमकी मिलने के बाद भी अधिवक्ता नवनीश नेगी के हौसले बुलंद हैं।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि ऐसी कायराना धमकियों से अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई कमजोर नहीं होगी। हाईकोर्ट में वे अंकिता के हक में और मजबूती से खड़े रहेंगे। सवाल यह है कि आखिर इस केस में ऐसा क्या छुपा है, जिसे दबाने के लिए इस हद तक गिरा जा रहा है? क्या किसी वीआईपी का नाम उजागर होने का डर इस साजिश के पीछे है? दोस्तो अंकिता भंडारी का मामला सिर्फ एक बेटी की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की अस्मिता और कानून के राज की परीक्षा है। अगर एक हाईकोर्ट के वकील को केस लड़ने के लिए जान से मारने की धमकी मिलती है, तो यह सीधा-सीधा हमारे लोकतंत्र और न्याय प्रणाली पर हमला है। पुलिस को चाहिए कि वह इस मामले की तह तक जाए, उस लिफाफे पर लगे डाक टिकट से लेकर उस लिखावट की फॉरेंसिक जांच कराए और उस चेहरे को बेनकाब करे जो पर्दे के पीछे से यह गंदा खेल खेल रहा है। क्योंकि उत्तराखंड की जनता देख रही है, और वो अंकिता के इंसाफ की राह में किसी भी रोड़े को बर्दाश्त नहीं करेगी! इस पूरी घटना पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं।