उत्तराखंड के चर्चित चंपावत मामले में अब एक और बड़ा खुलासा सामने आया है और इस बार चर्चा किसी आरोप की नहीं, बल्कि कथित तौर पर हुए ‘50 लाख के खेल’ की हो रही है। जी हा, जिस मामले ने पूरे प्रदेश की राजनीति और माहौल को गरमा दिया था। अब उसी केस में पीड़िता के भाई के बयान और एक वायरल पत्र ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ये 50 लाख वाला मामला क्या है? किसे पैसे देने की बात सामने आई? क्या किसी ने मामले को प्रभावित करने या दबाने की कोशिश की? पीड़िता के भाई ने अब कई बड़े दावे किए हैं और इन दावों के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। पूरी खबर बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट में कि केस को सेटेल करने वाले पत्र लिख कर इस बात का खुलासा करने वाले पीड़िता के भाई अब क्या कहा है, वो दिखाउंगा आपको। चंपावत केस का पुलिस ने कल ही पर्दाफाश कर दिया था। पुलिस ने कल 7 मई को ही साफ कर दिया था कि पीड़िता के साथ किसी भी तरह का कोई दुर्घनटना नहीं हुई है, बल्कि इस केस में जिन तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया था, उन्हें एक साजिश के तहत फंसाने का प्रयास किया गया था। वहीं अब इस मामले में दो वीडियो सामने आए हैं। पहला वीडियो पीड़िता का है, जबकि दूसरा वीडियो पीड़िता के चचेरे भाई का है। दोनों वीडियो में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दोस्तो पीड़िता का जो वीडियो सामने आया है, उस वीडियो में पीड़िता खुद कह रही है कि उसके साथ कुछ भी गलत नहीं हुआ है। यानी उसके साथ वैसै कुछ हुआ ही नहीं जैसा बताया जा रहा है। पीड़िता ने वीडियो में कमल रावत और उसकी एक महिला मित्र पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दोस्तो पीड़िता का कहना है कि, कमल रावत का प्लान था कि वो आरोपियों (जिन्हें पुलिस ने निर्दोष बताया है) में से एक के कमरे में गैंगरेप जैसे हालत बनाए, ताकि तीनों को इस केस में झूठा फंसाया जा सके. वीडियो में पीड़िता कह रही है कि वो ये बयान पूरे होशो हवास में और बिना किसी दबाव के दे रही है। वहीं दोस्तो दूसरी ओर पीड़िता के चचेरे भाई का जो वीडियो सामने आया है, उसमें 50 लाख वाले आरोप से पर्दा उठ गया है।
दरअसल, पीड़िता ने चचेरे भाई ने आरोप लगाया था कि आरोपी पक्ष उन पर समझौते के लिए दबाव बना रहा है, इसके लिए उन्हें 50 लाख रुपए तक दिए जा रहे हैं। हालांकि, अब पीड़िता के भाई ने इस पूरे मामले का सच वीडियो के जरिए बताया। दोस्तो पीड़िता के भाई का कहना है कि उसकी कई दिनों से अपने चाचा और बहन से बात नहीं हो रही थी। कल सात मई सुबह को जब उसने चाचा को फिर से कॉल किया तो फोन कमल रावत ने उठाया। कमल रावत ने कहा कि ‘तेरी बहन पुलिस हिरासत में है, जबकि तेरे चाचा का कुछ पता नहीं है, वो न तो पुलिस स्टेशन में और न ही घर पर.’ साथ ही घटना के बारे में बताया। पीड़िता के भाई का कहना है कि इससे वो और घबरा गया था उसने जब कमल रावत से कहा कि चाचा से बात हो सकती है तो कमल रावत ने कहा कि ‘तू एसपी को कॉल कर ले।’ इसके बाद कमल रावत ने एसपी को कई बार कॉल किया है, लेकिन एसपी ने कॉल रिसीव नहीं की। इसके बाद कमल रावत का फिर फोन आया और कहा कि आरोपी 50 लाख रुपए देकर समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं, लेकिन भाई ने कहा कि उसकी बहन के साथ गलत हुआ है इसलिए वो समझौता नहीं करेगा। तब कलम रावत ने कहा कि उसकी बहन खुद बता रही है कि उसके साथ गलत हुआ है। दोस्तो पीड़िता के भाई का कहना है कि इसके बाद कमल रावत ने उसे वीडियो बनाकर भेजने को कहा है, लेकिन उसने नहीं बनाया।
इसके बाद कमल रावत ने उसके कुछ लिखकर भेजा, उसी के आधार पर पीड़िता के भाई ने एसपी को मैसेज भेजा कि 50 लाख रुपए देकर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। पीड़िता के भाई का कहना है कि कमल रावत कई महीनों से उसके चाचा का इलाज करा रहा है, तो उन्हें उस पर भरोसा हो गया था लेकिन जब उसने शाम को अपने चाचा से बात की तो उसे पता चला कि ये मामला ही कुछ और है। कलम रावत ने उसकी बहन के साथ मिलकर एक साजिश रची थी। पीड़िता के भाई ने पुलिस और उन लोगों के माफी मांगी है, जिन पर उन्होंने बिना सोचे समझे आरोप लगाया था। दोस्तो गौर करने वाली बात ये है कि, इस मामले में साजिशकर्ता के रूप में जिस कमल रावत का नाम सामने आ रहा है, उसके खिलाफ भी साल 2023 में भी दुराचार का मुकदमा दर्ज हुआ था हालांकि, वह हाईकोर्ट से बरी हो चुका है। दोस्तो इधर पुलिस कल (7 मई) ही इस मामले में खुलासा कर साफ कर दिया था कि मेडिकल में भी तरह के रेप के कोई पुष्टि नहीं है और नहीं नाबालिग से शरीर पर कोई चोट के निशान मिले हैं। आज पीड़िता ने भी वीडियो जारी कर पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया। दोस्तो, चंपावत मामले में अब जिस तरह लगातार नए वीडियो, बयान और खुलासे सामने आ रहे हैं उसने पूरे केस की तस्वीर बदलकर रख दी है।जिस मामले को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश था। अब उसी केस में साजिश, झूठे आरोप और कथित 50 लाख के खेल की चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ये सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील मामलों में सच सामने आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना कितना खतरनाक हो सकता है।