उत्तराखंड में UCC नियम बदलेंगे! । Dehradun । CM Dhami । Uttarakhand News

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उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद अब सरकार इसे और ज्यादा सख्त और स्पष्ट बनाने की तैयारी में जुट गई है और इस बार निशाने पर हैं सीक्रेट लिव-इन रिलेशनशिप, दूसरी शादी और धोखाधड़ी से किए गए रिश्ते! जी हां अगर कोई व्यक्ति बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करता है या एक साथ कई लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो अब मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सरकार नई नियमावली तैयार कर रही है, जिसमें तय होगा कि किस मामले में कैसी कार्रवाई होगी, कौन सा कानून लगेगा और जांच की प्रक्रिया क्या होगी तो क्या उत्तराखंड में रिश्तों को लेकर कानून और सख्त होने जा रहा है?क्या अब हर लिव-इन रिलेशनशिप सरकार की नजर में होगी? और आखिर UCC की नई नियमावली आम लोगों की जिंदगी पर कितना असर डालेगी?इन्हीं बड़े सवालों पर आज करुगां विस्तार से बात। दोस्तो देहरादून से बड़ी खबर आ रही है कि उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सरकार अब और सख्त तैयारी में जुट गई है। सिर्फ कानून बनाना ही नहीं, बल्कि अब उसकी नियमावली यानी रुल को भी पूरी तरह बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है और इस बार फोकस है— दूसरी शादी, सीक्रेट लिव-इन रिलेशनशिप, धोखे से किए गए विवाह और अवैध तरीके से रिश्ते खत्म करने जैसे मामलों पर। जी हां, दोस्तो उत्तराखंड सरकार अब UCC को सिर्फ एक कानून की किताब तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसकी जमीनी प्रक्रिया को भी इतना मजबूत बनाना चाहती है कि कोई भी loophole बच न पाए।

दोस्तो अब जरा समझिए कि आखिर सरकार क्या बदलने जा रही है। दरअसल दोस्तो, हाल ही में बजट सत्र के दौरान सरकार ने UCC में संशोधन विधेयक पारित किया था। इस संशोधन में साफ कर दिया गया कि अगर कोई व्यक्ति किसी महिला से बल, दबाव या धोखाधड़ी के जरिए विवाह करता है या किसी को धोखे से लिव-इन रिलेशनशिप में रखता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में आरोपी को सात साल तक की सजा भी हो सकती है। यानी कि दोस्तो अब रिश्तों में धोखाधड़ी सिर्फ सामाजिक मुद्दा नहीं रहेगी, बल्कि सीधे कानून के दायरे में आएगी। इतना ही नहीं, अगर कोई व्यक्ति बिना कानूनी तलाक लिए दूसरी शादी करता है या अपने मौजूदा संबंध को छिपाकर किसी और के साथ लिव-इन में रहता है, तो वह भी अपराध माना जाएगा और सबसे अहम बात अगर कोई व्यक्ति पहले से एक लिव-इन रिलेशनशिप में है और उसी दौरान किसी दूसरे व्यक्ति के साथ भी लिव-इन में रहता है, तो अब उस पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यानी साफ है कि सरकार अब रिश्तों में पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाने जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर कार्रवाई कैसे होगी? कौन तय करेगा कि मामला UCC के तहत आएगा। या भारतीय न्याय संहिता यानी BNS के तहत? किस केस में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम लागू होगा? और अगर किसी नाबालिग से गलत जानकारी देकर शादी की गई, तो जांच की प्रक्रिया क्या होगी? दोस्तो इन्हीं सभी सवालों का जवाब देने के लिए अब सरकार नई नियमावली तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक नई Rules Book में ये साफ किया जाएगा कि—अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से विवाह-विच्छेद करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा किस तरह चलेगा। अगर लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़ा विवाद सामने आता है, तो जांच कौन करेगा और किस स्तर पर कार्रवाई होगी साथ ही दोस्तो ये भी तय होगा कि अलग-अलग मामलों में कौन सा कानून प्राथमिक रूप से लागू किया जाएगा।

यानी कि दोस्तो आने वाले समय में विवाह और लिव-इन से जुड़े मामलों में सिर्फ शिकायत दर्ज कराना ही काफी नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया पहले से ज्यादा व्यवस्थित और कानूनी रूप से मजबूत होगी। इस पूरे मामले पर शासन स्तर पर लगातार मंथन चल रहा है। शासन के वरिष्ठ अधिकारी शैलेश बगोली का कहना है कि, सरकार यह समीक्षा कर रही है कि किन बिंदुओं पर नियमावली में बदलाव जरूरी है और जल्द ही नई प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। दोस्तो सरकार का मानना है कि जब तक कानून के साथ स्पष्ट नियम और कार्रवाई की प्रक्रिया तय नहीं होगी, तब तक उसका प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है। अब इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक और सामाजिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। दोस्तो कुछ लोग इसे महिलाओं की सुरक्षा और रिश्तों में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसे निजी जीवन में सरकारी दखल के तौर पर भी देख रहे हैं, लेकिन इतना तय है कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जहां UCC को लागू करने के बाद लगातार उसकी प्रक्रिया को और ज्यादा सख्त और स्पष्ट बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में अगर कोई व्यक्ति रिश्तों को लेकर कानून से बचने की कोशिश करता है, तो उसके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं तो क्या उत्तराखंड में रिश्तों को लेकर एक नया कानूनी दौर शुरू होने जा रहा है?क्या अब हर विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप पर कानून की पैनी नजर होगी?और क्या UCC की नई नियमावली देश के दूसरे राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकती है?इन सवालों के जवाब आने वाले समय में जरूर सामने आएंगे लेकिन फिलहाल इतना साफ है कि उत्तराखंड सरकार UCC को लेकर अब कोई ढील देने के मूड में नहीं दिख रही।