उत्तराखंड की राजनीति में इस समय खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच छिड़ी जुबानी जंग चर्चा का विषय बनी हुई है। Harish Rawat Umesh Kumar controversy सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक मचे घमासान के बीच, विधायक उमेश कुमार ने बड़ा बयान जारी कर अपनी भविष्य की रणनीति साफ कर दी है। उमेश कुमार ने कांग्रेस या भाजपा में शामिल होने की तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “मेरा कांग्रेस में जाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।” इसके साथ ही उन्होंने साल 2027 में होने वाले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर एक बड़ा राजनीतिक ऐलान भी कर दिया है। निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने अपनी नई सियासी पारी की घोषणा करते हुए कहा कि वह बहुत जल्द ‘जन निर्माण पार्टी’ की सदस्यता ग्रहण करने जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2027 का उत्तराखंड विधानसभा चुनाव वह किसी पारंपरिक बड़े दल के बजाय जन निर्माण पार्टी के बैनर तले ही लड़ेंगे। इस फैसले के बाद राज्य में तीसरे विकल्प को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए उमेश कुमार पर निशाना साधा था। हरीश रावत ने अपनी ही पार्टी के कुछ नेताओं पर नाराजगी जताते हुए कहा था कि साल 2016 में कांग्रेस सरकार गिराने की साजिश रचने वाले (स्टिंग ऑपरेशन) व्यक्ति को आज कांग्रेस के ही कुछ लोग ‘हीरो’ की तरह पेश कर रहे हैं और उसका महिमामंडन कर रहे हैं। इस पर उमेश कुमार ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, “अगर मैं सिर्फ एक साधारण निर्दलीय विधायक हूँ, तो राज्य के एक पूर्व मुख्यमंत्री को मुझ पर इतना लंबा लेख लिखने की क्या जरूरत पड़ गई?”
कांग्रेस नेताओं पर तंज कसते हुए खानपुर विधायक ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि वह किसी भी कीमत पर कांग्रेस का दामन नहीं थामेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी ऐसी कोई मजबूरी या इच्छा नहीं है कि वह उन नेताओं के जिंदाबाद के नारे लगाएं, जो कभी उनके घर की दहलीज या बाहर आकर बैठते थे। उमेश कुमार ने दावा किया कि खानपुर सीट पर आज कई बड़े राजनेताओं की नजरें टिकी हुई हैं, लेकिन आगामी 2027 के चुनाव में वहां की जनता ही अंतिम फैसला करेगी कि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कौन करेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमेश कुमार के इस रुख और नई पार्टी के ऐलान से हरिद्वार और आसपास के मैदानी इलाकों के सियासी समीकरण बदल सकते हैं। हरीश रावत और उमेश कुमार के बीच की यह अदावत पुरानी है, लेकिन चुनाव से पहले इस तरह का टकराव कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी को भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि ‘जन निर्माण पार्टी’ के जरिए उमेश कुमार आगामी चुनावों में भाजपा और कांग्रेस के स्थापित वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाते हैं।