दयारा बुग्याल में बबीता पांडे के लापता होने की घटना ने पहाड़ों में ट्रैकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या ट्रैकिंग रूटों पर निगरानी पर्याप्त थी? क्या ट्रैकर्स की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड रखा जा रहा था? इन सवालों के बीच अब रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है। Babita Pandey Missing In Uttarkashi दयारा हादसे से सबक लेते हुए प्रशासन ने सभी ट्रैकिंग रूटों पर निगरानी बढ़ाने और ट्रैकर्स का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए हैं। आखिर क्या हैं नए इंतजाम बताउंगा आपको आपको पूरी खबर। दोस्तो उत्तरकाशी के दयारा बुग्लाय ट्रैक से लापता हुई रामनगर की बबीता पांडे की गुमशुदगी अब एक बड़ी पहले बन चुकी है, लेकिन दोस्तो बबीता पांडे के अचानक रहस्यमय तरीके से गायब होने से पूरा उत्तराखंडक सोच में पड़ा है कि आखिर बबीता पांडे गई तो गई कहां, लेकिन इस एक हादसे ने पूरा सिस्टम को को भी हिला कर रख दिया है। देश-प्रदेश की बड़ी एँजेसिंया माथ पकड़ चुकी हैं, क्या पुलिस, क्या वन विभाग, क्या पर्यटन विभाग, क्या एनडीआरएफ, क्या एसडीआरएफ, क्या नेहरू पर्वतारोहण संस्था यानि नीम के वो ताम विशेषज्ञ जिनसे ये उम्मीद जगी थी कि अब तो बबीता पांडे का कोई ना कोई सुराग मिल ही जाएगा, लेकिन नहीं तमाम एंजसियों की खोजी ट्रैनिंग धरी की धरी रह गई लेकिन दोस्तो इस एक बड़ी घटना ने पर्यटन विभाग वन विभाग के साथ स्थानीय प्रशासन के नांक कान आंख सब खोल दिए हैं। ये मै इसलिए कह रहा हूं क्योंकि उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से बबीता पांडे के गायब होने के बाद रुद्रप्रयाग तक में अलर्ट कर दिया गया है। दो वन प्रभाग यहां हैं दोस्तो और यहां से भी ट्रैकिंग की अनुमती दी जाती है।
उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल में ट्रैकिंग के दौरान बबीता पांडे के लापता होने की घटना ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर कर रख दिया। इस घटना ने पहाड़ों में ट्रैकिंग सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कैसे एक ट्रैकर दुर्गम क्षेत्र में लापता हो गई? क्या ट्रैकिंग रूटों पर निगरानी पर्याप्त थी? क्या प्रशासन के पास ट्रैकर्स की आवाजाही का पूरा रिकॉर्ड मौजूद था? ऐसे कई सवाल अब चर्चा का विषय बने हुए हैं। इसी घटना से सबक लेते हुए रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने वन प्रभाग केदारनाथ और वन प्रभाग रुद्रप्रयाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी ट्रैकिंग रूटों पर जाने वाले ट्रैकर्स का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए। साथ ही उनकी आवाजाही और गतिविधियों पर भी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। दोस्तो रुद्रप्रयाग जिला धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ एडवेंचर टूरिज्म का भी प्रमुख केंद्र है। यहां चोपता-तुंगनाथ, देवरियाताल, मध्यमहेश्वर, कालीशिला समेत कई प्रसिद्ध ट्रैकिंग रूट हैं, जहां हर वर्ष हजारों पर्यटक और ट्रैकर्स पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में ट्रैकर्स की सही जानकारी और लोकेशन उपलब्ध होना बेहद जरूरी माना जा रहा है। दोस्तो जिलाधिकारी विशाल मिश्रा का कहना है कि जिले में लगातार बढ़ रही ट्रैकिंग गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन चाहता है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से संचालित किए जा सकें। इसके लिए ट्रैकिंग रूटों पर पंजीकरण, रिकॉर्ड संधारण और निगरानी प्रणाली को प्रभावी बनाया जाएगा।
दोस्तो दयारा बुग्याल की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि प्राकृतिक सौंदर्य के बीच रोमांचक यात्राओं के साथ सुरक्षा उपाय भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि अब प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही के मूड में नहीं है और ट्रैकिंग रूटों पर निगरानी को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है। दोस्तो कुल मिलाकर, बबीता पांडे के लापता होने की घटना के बाद रुद्रप्रयाग प्रशासन का यह कदम भविष्य में ट्रैकर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि ये नई व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं और ट्रैकिंग गतिविधियों को कितना सुरक्षित बना पाती हैं। दोस्तो रुद्रप्रयाग में ट्रैकिंग हिमालय के घने जंगलों, अल्पाइन घास के मैदानों (बुग्यालों) और ऊंचे दर्रों के बीच होती है यहाँ की ट्रैकिंग के लिए स्थानीय गाइड, वन विभाग की अनुमति और उचित ट्रैकिंग गियर अनिवार्य हैं। प्रमुख ट्रैकिंग रूट्स देवरिया ताल ट्रैक है जो सारी गांव से शुरू होने वाला यह 2.5 किमी का आसान ट्रैक है, जो 2,438 मीटर की ऊंचाई पर है दोस्तो यहाँ से चौखंबा पर्वत का स्पष्ट प्रतिबिंब दिखता है चोपता-चंद्रशिला ट्रैक है चोपता से तुंगनाथ होते हुए चंद्रशिला (4,000 मीटर) तक का ट्रैक सबसे लोकप्रिय है और यही पर है मदमहेश्वर ट्रैक यह मध्यम से कठिन श्रेणी का ट्रैक है, जो घने जंगलों से होकर गुजरता है। दोस्तो दयारा की घटना ने सबको चौका दिया कि आखिर इन सारे ट्रैक पर हजारों ट्रैकर ट्रकिंग करते हैं।