दोस्तो, कहते हैं, अपराध कभी अकेला नहीं आता उसके पीछे छिपे होते हैं कई पुराने राज। उत्तराखंड के UTU पेपर लीक मामले में भी अब जांच सिर्फ एक लीक हुए पेपर तक सीमित नहीं रही है, जिस प्रोफेसर पर पेपर लीक का आरोप है, अब पुलिस उसकी पूरी हिस्ट्री खंगाल रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह पहली बार हुआ, या फिर पहले भी कई परीक्षाओं के पेपर इसी तरह तैयार हुए और सिस्टम की आंखों में धूल झोंकी गई?आखिर पुलिस को आरोपी प्रोफेसर के अतीत में ऐसा क्या तलाशना है, जो इस केस को और बड़ा बना सकता है? चलिए आपको बताता हूं पूरी खबर। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) के परीक्षा पेपर लीक मामले में गिरफ्तार असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को लेकर जांच जारी है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रोफेसर गुप्ता पिछले करीब 16 सालों से उत्तराखंड के अलग-अलग इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे और इस दौरान कई बार विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी भी निभाई। दोस्तो, जांच एजेंसियों को आशंका है कि वर्तमान मामले से पहले भी कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हो सकते हैं। इसी वजह से वर्ष 2010 से अब तक आयोजित कई परीक्षाएं जांच के दायरे में आ गई हैं। दोस्तो अब जरा दून में नए और ताजा पेपर लीक में जिस प्रोफेसर की गिरफ्तारी हुई है।
उसका रिकॉर्ड देखेंगे तो आप चौंक जाएंगे क्योंकि दोस्तो इधर दून पुलिस के अनुसार, डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने मार्च 2010 से जुलाई 2013 तक DIT यूनिवर्सिटी, अगस्त 2013 से सितंबर 2018 तक JBIT संस्थान, सितंबर 2018 से जुलाई 2019 तक उत्तरांचल यूनिवर्सिटी और जुलाई 2019 से जुलाई 2026 तक शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दी। दोस्तो जांच में यह भी सामने आया है कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बार UTU की विभिन्न परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार किए। दोस्तो पुलिस का मानना है कि वर्ष 2019 में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से जुड़ने के बाद उनकी भूमिका परीक्षा संबंधी कार्यों में और अधिक महत्वपूर्ण हो गई थी. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उन्होंने किन-किन परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार किए और क्या पहले भी किसी परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई थी। मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस डॉ. गुप्ता के मोबाइल फोन, लैपटॉप, ई-मेल, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। दोस्तो नियमानुसार नोटिस जारी करने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय ने भी सख्त कार्रवाई करते हुए डॉ. गुप्ता को अगले सात वर्षों तक विश्वविद्यालय की सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है। अब पुलिस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पेपर लीक का नेटवर्क कितना बड़ा था और क्या वर्तमान मामला किसी पुराने पैटर्न का हिस्सा है। गिरफ्तारी के बाद शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने डॉ. आशीष कुमार गुप्ता की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। वहीं विश्वविद्यालय ने परीक्षा गोपनीयता में लापरवाही को लेकर शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को भी कड़ी चेतावनी जारी की है।
दोस्तो गौर हो कि पेपर लीक का यह मामला मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी विषयों की परीक्षाओं से संबंधित है। इन दोनों विषयों की परीक्षाएं आयोजित होने वाली थीं, लेकिन इससे पहले ही प्रश्नपत्र छात्रों के बीच पहुंच गया था। दोस्तो, पूरे देश में आज पेपर लीक को लेकर हल्ला मचा है, संसद से लेकर सड़क तक बहस हो रही है। सख्त कानून की बातें हो रही हैं, लेकिन उत्तराखंड में जांच जितनी आगे बढ़ रही है, उतने ही नए सवाल सामने आते जा रहे हैं। अगर एक आरोपी प्रोफेसर की हिस्ट्री खंगालने की नौबत आ गई है। तो सवाल सिर्फ एक पेपर का नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का है, अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या यह सिर्फ एक लीक था या फिर एक ऐसा नेटवर्क, जो वर्षों से मेहनती युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करता रहा? क्या जांच पुराने राज भी खोलेगी? और अगर पहले भी पेपर लीक हुए हैं, तो उन परीक्षाओं में सफल हुए उम्मीदवारों और लाखों मेहनती छात्रों के साथ हुए अन्याय का हिसाब कौन देगा?