Uttarakhand Police कर्मी ने जंतर-मंतर पर नैकरी को मारी ठोकर! | Sher Singh | Uttarakhand News

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दोस्तो जंतर-मंतर की एक एसी तस्वीर आपको दिखाने जा रहा हूं एक तऱफ जहां हजारों-हजार युवाओं छात्रा का हुजूंम केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अडिग है तो वहीं दूसरी इन युवाओं को पुलिस और फोर्स की लाठी का सामना भी करना पड़ रहा है, लेकिन मै आपको बताने के लिए आया हूं कि कैसे उत्तराखंड के एक पुलिस कर्मी ने जंतर-मंतर के मंच पर शेर सिंह ने सौंप दिया अपना पुलिस का बैज और सिस्टम एसी खोली पोल की सब देखते रहे गए। दोस्तो, वर्दी सिर्फ नौकरी की पहचान नहीं होती बल्कि जिम्मेदारी, अनुशासन और संविधान की शपथ का प्रतीक भी होती है। तभी तो ना चाहते हूए भी कई पुलिसकर्मिया ने युवाओँ को दौड़ा दौड़कर पीटा वहीं एक तस्वीर ऐसी भी वर्दी पहनने वाला एक जवान, हजारों लोगों की भीड़ के बीच अपने कंधे से पुलिस का बैज उतार दे, तो सवाल सिर्फ एक बैज का नहीं रहता बल्कि उस संदेश का हो जाता है, जो पूरे देश में चर्चा का विषय बन जाता है। दोस्तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के बीच उत्तराखंड पुलिस के एक जवान का मंच पर पहुंचना, छात्रों के समर्थन में भाषण देना और फिर अपना बैज उतारकर मंच संचालक को सौंप देना। अब सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक बहस का विषय बना हुआ है। दोस्तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान उस समय माहौल और गर्म हो गया, जब उत्तराखंड पुलिस के जवान शेर सिंह मंच पर पहुंचे। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं के आंदोलन का समर्थन किया और कहा कि अगर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना बगावत है, तो वे खुद को भी बाग़ी मानते हैं। उन्होंने अपने भाषण में शहीद भगत सिंह का भी उल्लेख किया और युवाओं से संघर्ष जारी रखने की बात कही। दोस्तो भाषण के बाद शेर सिंह ने अपने कंधे पर लगा उत्तराखंड पुलिस का बैज उतारकर मंच पर मौजूद आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि को सौंप दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। उधर, इस मामले को लेकर उत्तराखंड पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की जाएगी, इस पर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल इस घटनाक्रम को लेकर विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन पेपर लीक के मुद्दे को लेकर लगातार जारी है। आंदोलनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं। इसी बीच शेर सिंह के इस कदम ने आंदोलन को एक नया राजनीतिक और सामाजिक विमर्श दे दिया है।अब देखना होगा कि इस मामले में विभागीय स्तर पर क्या फैसला लिया जाता है और इस घटना का आगे क्या असर पड़ता है, क्योंकि ये असर तो करेगा। दोस्तो, एक बैज उतरने से व्यवस्था नहीं बदलती लेकिन कई बार एक तस्वीर और एक फैसला पूरे देश में बहस जरूर छेड़ देता है। जंतर-मंतर की यह घटना भी अब सिर्फ एक वीडियो नहीं रह गई है, बल्कि पुलिस अनुशासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और छात्र आंदोलन—इन तीनों के बीच नई चर्चा का विषय बन चुकी है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि उत्तराखंड पुलिस इस पूरे मामले में क्या आधिकारिक रुख अपनाती है और इस घटनाक्रम का आगे क्या असर देखने को मिलता है।