दोस्तो, सोशल मीडिया का दौर है, यहां एक वीडियो मिनटों में हीरो भी बना देता है और अगले ही पल सवालों के घेरे में भी खड़ा कर देता है। जंतर-मंतर पर मंच से पुलिस का बैज उतारकर जिस शख्स ने खुद को व्यवस्था के खिलाफ खड़ा दिखाया। अब उसी पूरे घटनाक्रम पर नए सवाल उठ रहे हैं, कहा गया कि उत्तराखंड पुलिस के जवान ने नौकरी छोड़ दी, लेकिन अब पुलिस का दावा कुछ और है। दावा है कि जिस शख्स ने मंच से ‘इस्तीफे’ का ऐलान किया। वह लंबे समय से निलंबित चल रहा है और उसके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मुकदमा दर्ज है। तो दोस्तो सुना आपने उत्तराखंड पलिस की वर्दी में जंतर मंतर में युवाओँ और छात्रों के मंच पहुंचे शेर सिंह इस्तीफा लहरा का नौकरी को ठौकर मार दी, लेकिन अब उत्तराखंड पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम पर अलग तस्वीर सामने रखी है। दोस्तो पुलिस के अनुसार शेर सिंह पिछले वर्ष से निलंबित हैं और एक आपराधिक मामले में नामजद होने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई पहले ही चल रही है। ऐसे में पुलिस का कहना है कि जिस पद पर वह सक्रिय रूप से कार्यरत ही नहीं थे, उस पद से सार्वजनिक मंच पर दिए गए तथाकथित इस्तीफे को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। पुलिस का कहना है कि शेर सिंह के खिलाफ दर्ज मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया पहले से जारी है।
इसी बीच जंतर-मंतर के मंच से दिया गया उनका बयान और बैज उतारने की घटना अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन गई है। तो दोस्तो शेर सिंह की कहानी में पुलिस का ये दावा है कि, शेर सिंह पर पुलिस का दावा, वर्ष 2025 से निलंबित, हरिद्वार के गंगनहर थाने में मुकदमा दर्ज, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं में केस। पुलिस के अनुसार आरोप गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि गिरोह से संबंध होने का आरोप भूमि कब्जाने की साजिश में शामिल होने का आरोप पीड़ित परिवार को धमकाने का आरोप विवादित जमीन से आर्थिक लाभ लेने का आरोप। जांच में पुलिस का दावा
जेल और कोर्ट में गैंगस्टर से कई मुलाकातों का आरोप
मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाने का आरोप
पद का दुरुपयोग करने का आरोप, 15 सितंबर 2025 शेर सिंह गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए। 7, नवंबर 2025 हाईकोर्ट से जमानत, गिरफ्तारी के बाद तत्काल निलंबन तब से सक्रिय पुलिस सेवा से बाहर विभागीय कार्रवाई जारी। दोस्तो, आज के दौर में कैमरे के सामने दिखने वाली हर तस्वीर पूरी कहानी नहीं होती। एक तरफ मंच से बैज उतारने की तस्वीर है, तो दूसरी तरफ पुलिस का आधिकारिक दावा है कि संबंधित व्यक्ति पहले से निलंबित था। अब सच क्या है। इसका फैसला सोशल मीडिया की सुर्खियां नहीं, बल्कि आधिकारिक रिकॉर्ड और कानून की प्रक्रिया करेगी। फिलहाल इतना तय है कि जंतर-मंतर से शुरू हुई यह कहानी अब सड़क से ज्यादा सवालों की अदालत में पहुंच चुकी है।