दोस्तो, तो क्या उत्तरकाशी की सिल्क्यारा टनल में सुरक्षा इंतजाम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? पिछले बड़े हादसे से भी कोई सबक नहीं लिया गया? आखिर क्यों एक बार फिर सुरंग के भीतर काम कर रहे मजदूर की जान चली गई? जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद मजदूरों में भारी आक्रोश है, जबकि NHIDCL ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह महज हादसा था, या फिर लापरवाही की कीमत एक और मजदूर को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी? पूरी खबर बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में निर्माणाधीन सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग में बुधवार-गुरुवार की रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। टनल की कंक्रीट लाइनिंग का एक ब्लॉक टूटकर गिरने से उसकी चपेट में आए 21 वर्षीय मजदूर की मौके पर ही जान चली गई। घटना के बाद निर्माण स्थल पर हड़कंप मच गया और संबंधित एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जिला आपदा प्रबंधन केंद्र के प्रभारी शार्दूल गुसांई के अनुसार, हादसा रात करीब 2 बजे हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बड़कोट साइड से लगभग 900 मीटर अंदर टनल की कंक्रीट लाइनिंग का एक हिस्सा अचानक टूटकर गिर गया। इस दौरान वहां कार्य कर रहा झारखंड निवासी 21 वर्षीय मजदूर उसकी चपेट में आ गया। दोस्तो इस घटना के बाद जहां एक तरफ सिलक्यारा सुरंग में जान हथली पर रख कर काम कर रहे मजूदूरों खौफ है वहीं आक्रोश इस बात का कि सुरक्षा मानको दरकिनार कर कंपनी काम करा रही है।
वहीं दोस्तो अधिकारियों कहते है कि मामले के जांच नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) द्वारा की जा रही है, हांलाकि दोस्तो जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और क्या सुरक्षा मानकों में किसी प्रकार की कमी थी, लेकिन दोस्तो एक बार फिर निर्माण कर रही कंपनी फिर सवालों के घेर में आई तो प्रजेक्ट मेनेजर ने क्या कहा। दोस्तो इधर इसपूरे मामले पर प्रशांत आर्य जिलाधिकारी उत्तरकाशी क्या कहते है ये भी आपको देखना चाहिए। दोस्तो इस नई और ताजा इस हादसे के बाद एक बार फिर सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग वर्ष 2023 की उस बड़ी दुर्घटना को लेकर चर्चा में आ गई है, जब 12 नवंबर 2023 को सुरंग का एक हिस्सा ढहने से 41 मजदूर अंदर फंस गए थे। यह सुरंग चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना का हिस्सा है और इसका उद्देश्य यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के बीच सड़क संपर्क को बेहतर बनाना है। दोस्तो यहां आपको बता दूं कि साल 2023 में हुए हादसे के बाद फंसे मजदूरों तक पाइप के माध्यम से ऑक्सीजन, भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाई गई थीं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, बीआरओ, एनएचआईडीसीएल और कई विशेषज्ञ एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत अभियान चलाया। रेस्क्यू के दौरान अमेरिकी ऑगर मशीन से ड्रिलिंग की गई, लेकिन तकनीकी दिक्कत आने के बाद रैट-होल माइनर्स ने बेहद संकरी जगह में हाथों से खुदाई कर रास्ता बनाया। करीब 17 दिन तक चले इस कठिन अभियान के बाद 28 नवंबर 2023 को सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था। इस सफल अभियान की देश और विदेश में व्यापक सराहना हुई थी। वहीं दोस्तो ताजा हादसे के बाद निर्माणाधीन सुरंगों में श्रमिकों की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल संबंधित एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और सुरक्षा उपायों पर निर्णय लिया जाएगा।