दोस्तो, आज इस कहानी को डेढ़ महीना बीत चुका है, लेकिन सवाल आज भी वहीं खड़े हैं। आखिर 24 साल की बबीता पांडे आखिर गई कहां? क्या वह किसी हादसे का शिकार हुई या फिर उसके रहस्यमयी तरीके से गायब होने के पीछे कोई और वजह है? बबीता पांडे के रहस्यमयी तरीके से गायब होने में किसका हाथ? है ट्रेकिंग एजेंसी या दोस्त, जो बबीता के साथ ट्रैकिंग पर गए थे। वहीं दूसरी ओर ये भी कि अगर यह सिर्फ एक गुमशुदगी का मामला है, तो इतने लंबे समय बाद भी कोई ठोस सुराग क्यों नहीं मिला? और अगर कोई साजिश थी, तो उसका सच अब तक सामने क्यों नहीं आ पाया? इन्हीं सवालों का शोर अब कैसे सुनाई दे रहा है। दोस्तो उत्तराखंड के दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता हुई बबीता पांडे का मामला अब सिर्फ एक गुमशुदगी नहीं, बल्कि कई अनसुलझे सवालों का रहस्य बन चुका है। परिजनों की उम्मीदें हर गुजरते दिन के साथ टूट रही हैं, ऐसा लगता है, जबकि पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के व्यापक खोज अभियान के बावजूद अब तक कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली है, तो आखिर सवाल यही है। क्या जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है? क्या ट्रेकिंग के दौरान हुई घटनाओं की हर कड़ी को खंगाला गया? और क्या इस रहस्य से पर्दा उठ पाएगा? क्यों लोग इस बात की ओर क्यों इशारा कर रहे हैं कि बबीता पांडे के गायब होने में ट्रैकिंग कराने वाले लोग और बबीता के साथ गए दोनों दोस्तो ने मिल कर ये खेल किया है, हालांकि दोस्तो इस पर पुलिस ने कुछ भी नहीं कहा है अब तक।
इतना जरूर है कि शुरुआत के दिनों में जब दोनों दोस्तो के बारे में पूछा गया पुलिस से तो पुलिस ने उन दोनों से पूछताछ करने की बात की थी, लेकिन बस कुछ चुंनिंदा सवालों के जवाब ही पुलिस को मिले जो वहां दयारा के गोई कैंप और लोग बता रहे थे, लेकिन उसके बाद यानि कि बीते डेढ महिने में बबीता पांडे कि उन दोनों दोस्तो हरमनपाल और हरमनप्रीत से और क्या जानकारी पुलिस जुटा पाई बात की कोई जानकारी नहीं निकल कर आई और इस बात को कोई नहीं जानता क्या वो दोनों दोस्तो पुलिस हिरासत में हैं भी या नहीं। हां हाल में परिवार की तहरील पर दो।नों दोस्तो के खिलाफ पुलिस ने एक एफआईआर जुरुर लिखी है, लेकिन उसके बारे में बी पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। आप में से कई लोगों ने मेरी खबर पर कमेंट किया था कि दोनों दोस्तो ही इस मामले में जुड़े हुए हैं और उन्हीं का हाथ, पुसिस को कड़ाई से पूछताछ करनी चाहिए और किसी ने तो नार्कोटेस्ट की बात का जिक्र भी किया था वैसे दोस्तो आप सब की बात और राय का सम्मान है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई पुलिस ही जाने बेहतर तरीके से हां मै इतना बता सकता हूं कि इस मामले में ऐसा कुछ भी अब तक आधिकारिक तौर पर नहीं आया है। इतना जरुर है कि बबीता की तलाश में अप प्रदेश के बड़े अस्पतालों का रुख पुलिस कर रही है। दोस्तो बबीता पांडे अपने दोस्तों के साथ उत्तराखंड के उत्तरकाशी घूमने निकली थीं। दोनों दोस्त में से एक हरपाल सिंह उत्तराखंड के उधम सिंह नगर का रहने वाला है और दूसरा हरमनप्रीत यूपी के शाहजहांपुर का रहना वाला है। तीनों ने दयारा बुग्याल ट्रेकिंग करने का प्लान बनाया, लेकिन 29 मई की रात से युवती का लापता हो गई। 45 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस, एसडीआरएफ, वन विभाग की संयुक्त टीमें भी सर्च अभियान चला रही है।
कुछ खबरें तो ऐसी भी आ रही थी कि सर्च ओपरेशन को बंद कर दिया है। उधर दोस्तो जाचं के दौरान पर्यटन विभाग को एक बड़ी बात पता चली कि जिस ट्रेकिंग एजेंसी के जरिए तीनों ट्रेक पर गए थे, उसमें बबीता का नाम ही नहीं है। लेकिन वन विभाग को दिए गए कागज में बबीता का नाम दर्ज पाया गया है। इस कारण प्रो माउंटेन नामक ट्रेकिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन भी सस्पेंड कर दिया गया है। जांच पाया गया कि बबीता पांडे और उनके दोस्तों को फर्जी परमिट का इस्तेमाल कर ट्रेक पर भेजा गया था। पुलिस ट्रेकिंग गाइडों और एजेंसी से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा रही। उत्तरकाशी जिला पर्यटन अधिकारी केके जोशी ने कहा कि जांच में पता चला है कि बबीता पांडे या उनके साथियों के लिए आधिकारिक पर्यटन पोर्टल ‘एक्सप्लोर उत्तरकाशी’ पर कोई वैध डिजिटल परमिट जारी नहीं किया गया था। जांच से पता चला कि ट्रेकिंग एजेंसी ने बबीता पांडे और उसके दोस्तों के नाम खत्म हो चुके परमिट पर चिपकाकर सरकारी राजस्व नियमों और 150 ट्रैकर्स की दैनिक सीमा को दरकिनार किया। तो दोस्तो, डेढ़ महीने बाद भी इस पूरे मामले में सवाल जवाबों से ज्यादा हैं। बबीता पांडे आखिर कहां हैं? क्या उनके साथ कोई हादसा हुआ या फिर इस मामले के पीछे कोई और सच्चाई छिपी है? ट्रेकिंग एजेंसी की कथित अनियमितताओं से लेकर दोस्तों से पूछताछ और दर्ज हुई एफआईआर तक कई पहलू सामने आए हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है..यही वजह है कि सोशल मीडिया पर तरह-तरह की बातें और आरोप लगाए जा रहे हैं। लेकिन याद रखिए किसी भी व्यक्ति को केवल आशंकाओं या चर्चाओं के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस मामले में क्या हुआ, इसका जवाब सिर्फ पुलिस जांच और ठोस सबूत ही दे सकते हैं।उधर बबीता का परिवार आज भी उसी उम्मीद में है कि उनकी बेटी का कोई सुराग मिले और उन्हें सच पता चल सके। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस जांच जल्द इस रहस्य से पर्दा उठा पाएगी? क्या ट्रेकिंग एजेंसी, गाइड, दोस्तों और पूरे घटनाक्रम की हर कड़ी की गहन जांच होगी? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या बबीता पांडे के परिवार को आखिरकार इंसाफ और सच दोनों मिल पाएंगे?