Babita Pandey को लेकर बाबा बौखनाग दिया संकेत! | Dayara Bugyal | Uttarkashi | Uttarakhand News

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दोस्तो 29 मई से दयारा बुग्याल से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई बबीता पांडे का अब तक कोई सुराग नहीं लग पाया है। बेटी की तलाश में बेबस मां हर दरवाजे पर दस्तक दे रही है। पुलिस और बचाव दलों की लगातार कोशिशों के बीच अब मां ने आस्था का सहारा लिया है। यमुनाघाटी के प्रसिद्ध बाबा बौखनाग देवता के दरबार पहुंची मां ने बेटी की सकुशल वापसी की गुहार लगाई। इस दौरान देवता के पश्वा ने ऐसा आश्वासन दिया, जिसने निराशा के बीच उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है। आखिर बबीता को लेकर क्या कहा गया और क्यों फिर जागी परिवार की उम्मीद, बताउँगा आपको पूरी खबर। दोस्तो जब चारों ओर से दरवाजे बंद दिखने लग जाएं तो फिर बाबा ही एक मात्र सहारा है। हमारे उत्तराखंड के ईष्ट ही कुलदेवता ही एक मात्र सहारा, दोस्तो अब जब दयारा बुग्याल से रहस्यमय तरीके से गायब हुई बबीता पांडे के बारे में हमारी सर्च टीम जांच टीम पुलिस बबीता के परिवार को कोई ठोस आस्वासन नहीं दे पा रही हैं तो इसपर भी सोचने की जरुरत है कि इन टीमों में इतनी भी क्षमता नहीं की ये कुछ तो बता पाएं। बबीता केस के बारे में लेकिन दोस्तो यहां उम्मीद जगी है, क्योंकि बाबा बोखनाथ का दरबार जो लगा है। उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई 24 वर्षीय एमबीए छात्रा बबीता पांडे का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक बबीता का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और अन्य एजेंसियों की ओर से लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और खराब मौसम के चलते सफलता हाथ नहीं लगी है।

इस बीच, एक मां की बेचैनी और उम्मीद दोनों साथ-साथ चल रही हैं। अपनी बेटी की सकुशल वापसी की आस में बबीता की मां अंजू पांडे अब आस्था के दरवाजे तक पहुंच गई हैं। यमुनाघाटी के भाटिया गांव स्थित बाबा बौखनाग देवता के मंदिर पहुंचकर उन्होंने बेटी की सलामती के लिए प्रार्थना की और उसकी सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई। दरअसल, नैनीताल जनपद के रामनगर क्षेत्र के ग्राम चिल्किया निवासी बबीता पांडे 29 मई को दयारा बुग्याल ट्रेक के दौरान गोई पड़ाव से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। इसके बाद से परिवार की जिंदगी मानो थम सी गई है। हर गुजरते दिन के साथ परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है। मां अंजू पांडे के लिए यह समय बेहद कठिन है। एक ओर बेटी की कोई खबर नहीं है, तो दूसरी ओर उम्मीद का दामन भी वह छोड़ना नहीं चाहतीं। दोस्तो किसी परिचित ने उन्हें बाबा बौखनाग देवता के दरबार में जाने की सलाह दी। उत्तरकाशी की गंगा और यमुना घाटियों में बाबा बौखनाग के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, संकट की घड़ी में लोग बाबा बौखनाग की शरण में पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं रखते हैं। दोस्तो इसी विश्वास के साथ अंजू पांडे भाटिया गांव पहुंचीं। मंदिर में पूजा-अर्चना कर उन्होंने बेटी की सकुशल वापसी की प्रार्थना की। इस दौरान मौजूद स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा बौखनाग देवता के पश्वा ने उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी बेटी सुरक्षित अपने परिवार के पास लौटेगी। इतना ही नहीं, पश्वा की ओर से यह भी संकेत दिए गए कि घर से निकलने के बाद उसके खिलाफ किसी प्रकार की साजिश रचे जाने की संभावना हो सकती है। दोस्तो हालांकि इन बातों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन एक मां के लिए यह आश्वासन निराशा के बीच उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है। कई दिनों से बेटी की तलाश में परेशान परिवार को अब भी इस बात का इंतजार है कि बबीता जल्द से जल्द सुरक्षित घर लौट आए। उधर, दोस्तो प्रशासन और बचाव एजेंसियां भी लगातार अपने प्रयासों में जुटी हुई हैं। दयारा बुग्याल और आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में व्यापक सर्च अभियान चलाया जा रहा है। पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियां, घने जंगल और लगातार बदलता मौसम इस अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। इसके बावजूद राहत और बचाव दल उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं दोस्तो बबीता पांडे के लापता होने की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोग भी उसकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार उसकी सलामती की कामना कर रहे हैं और परिवार के प्रति संवेदना जता रहे हैं।गौरतलब है कि वर्ष 2023 के सिलक्यारा सुरंग हादसे के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग बाबा बौखनाग देवता की शरण में पहुंचे थे। उस समय भी आस्था और विश्वास की कई कहानियां सामने आई थीं। आज एक बार फिर एक मां अपनी बेटी की सलामती की उम्मीद लेकर उसी दरबार में पहुंची है।अब सभी की निगाहें सर्च ऑपरेशन पर टिकी हैं। हर कोई यही दुआ कर रहा है कि बबीता पांडे जल्द सुरक्षित अपने परिवार के बीच लौटे और इस लंबे इंतजार का अंत हो सके। फिलहाल, एक मां की उम्मीद, आस्था और बेटी के प्रति उसका अटूट विश्वास ही उसे इस कठिन समय में संभाले हुए है।