दोस्तों, क्या देहरादून में 16 करोड़ रुपये का पुल सिर्फ 16 दिन भी नहीं टिक पाया? क्या 52 करोड़ रुपये की सड़क बनने के कुछ ही समय बाद गहरे गड्ढों में बदल गई? और क्या इन दोनों निर्माण कार्यों के पीछे एक ऐसा कनेक्शन है, जिस पर अब सियासत गरमा गई है? बताउंगा आपको BJP सरकार, भाजपाई ठेकेदार. कैसे खुल गई पोल! दोस्तो क्या आपने कभी 16 करोड़ की कीमत वाले किसी खिलौने को सिर्फ 16 दिन में टूटते देखा है? दोस्तो देरहादून में जहाँ जनता के टैक्स के 16 करोड़ रुपए पानी में ऐसे बह गए कि आज से लेकर खास सोच में पड़ गया। महज 16 दिन पहले जिस पुल पर गाड़ियाँ सरपट दौड़ रही थीं, वहाँ कुआँ बन गया। दिल्ली से देहरादून तक मीडिया चिल्ला रहा था, सिस्टम को गालियाँ दी जा रही थी, लेकिन अब वक्त ये जानने का था कि खिलाड़ी कौन है? चौंकिए मत! जिस ‘हिमालयन कंस्ट्रक्शन’ फर्म ने इस पुल को बनाया, उसका सीधा रास्ता सत्ताधारी दल के बड़े नेता के बेडरूम तक जाता है!
जी हां दोस्तो एक खबर उत्तराखंड में शोर कर रही है। कागजों में कंपनी का हेड ऑफिस और कोई नहीं, बल्कि बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट का घर है! और कंपनी के डायरेक्टर हैं उनके पति अरविंद भट्ट। यानी बीजेपी की सरकार, भाजपाई ठेकेदार, और जनता का पैसा सीधे गटर में! या गड्ढे में। दोस्तो तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। देहरादून के नंदा की चौकी प्रेमनगर में टौंस नदी पर बना यह चमचमाता पुल विकास का नया प्रतीक बताया जा रहा था। लोक निर्माण विभाग ने 12 जुलाई को इस पर ट्रैफिक शुरू करवाया। लेकिन 28 जुलाई की पहली ही भारी बारिश ने इस ‘मजबूत विकास’ की धज्जियां उड़ा दीं। एप्रोच रोड ऐसे धंस गई मानो सीमेंट नहीं, रेत का महल बनाया गया हो। पूरे देश में थू-थू हुई, लेकिन जब जांच की आंच आगे बढ़ी, तो सत्ता की कुर्सी हिलने लगी। पता चला कि इस घटिया निर्माण के पीछे जो सफेदपोश चेहरा है, उसे सरकार का सीधा संरक्षण प्राप्त है।
दोस्तो यह सीधा-सीधा जनता की जेब पर डकैती है, 16 करोड़ का पुल 16 दिन भी नहीं टिक पाता, इससे बड़ा प्रमाण भ्रष्टाचार का और क्या होगा? मुख्यमंत्री धामी जी जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, लेकिन यहाँ तो भ्रष्टाचार का रास्ता सीधे बीजेपी की महिला मोर्चा अध्यक्ष के घर जा रहा है, उनके पति इस कंपनी के मालिक हैं। क्या उत्तराखंड सरकार में इतनी हिम्मत है कि अपने ही संगठन के नेताओं पर बुलडोजर चलाए या उन्हें जेल भेजे? कांग्रेस के ये सवाल सीधे उत्तराखंड में बीजेपी की साख पर चोट कर रहे हैं। क्योंकि सबूत चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं। ये देखिए वो शादी का निमंत्रण पत्र और ये हैं कंपनी के सरकारी कागजात, दोनों पर पता एक ही है।
बीजेपी महिला मोर्चा की उत्तराखंड अध्यक्ष रुचि भट्ट के पति अरविंद भट्ट इस ‘हिमालयन कंस्ट्रक्शन’ के भाग्यविधाता हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, जब सत्ताधारी दल के रसूखदार लोग ही ठेकेदारी के खेल में शामिल हो जाएं, तो पुल 16 दिन क्या। 16 घंटे भी टिक जाए तो गनीमत मानिए। टाइम्स ऑफ इंडिया से लेकर अमर उजाला जैसे अखबारों ने इस पर संपादकीय लिख डाला है, लेकिन अब तक सिर्फ ‘जांच-जांच’ का झुनझुना बजाया जा रहा है। अब दोस्तो दावा तो ये है कि गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा। अफसरों को दौड़ने के निर्देश दे दिए हैं। लेकिन सवाल यह है क्या आपकी कार्रवाई सिर्फ छोटे-मोटे इंजीनियरों और सस्पेंशन तक सीमित रहेगी? क्या उस रसूखदार फर्म और उसके राजनीतिक आकाओं पर हाथ डाला जाएगा जिसने देहरादून की जनता की जिंदगी को खतरे में डाला? विपक्ष सड़कों पर है, जनता सोशल मीडिया पर गुस्से में है। देखना दिलचस्प होगा कि ‘अपनों’ के इस भ्रष्टाचार पर सरकार कार्रवाई की नजीर पेश करती है, या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।