Paper Leak पर BJP पर बड़ा आरोप! | Student Protest | Congress | BJP | Uttarakhand News

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“क्या पेपर लीक सिर्फ लापरवाही है, या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश? आखिर पूर्व विधायक जीत राम टम्टा ने बीजेपी पर इतने गंभीर आरोप क्यों लगाए? क्या सचमुच पेपर लीक के पीछे राजनीतिक मंशा है, या यह सिर्फ सियासी बयानबाज़ी? दोस्तो “पेपर लीक को लेकर देशभर में सियासत चरम पर है। एक तरफ बीजेपी ने छात्र आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग की आशंका जताई है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व विधायक बीजेपी पर ही पेपर लीक को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं आखिर किसके दावों में कितना दम है? दोस्तो दिल्ली के जंतर मंतर पर उत्तराखंड पुलिस के जवान ने अपना बैज उतारते हुए क्या कहा था याद है आपको कि उत्तराखंड में पेपर कहां कहां मिल जाता है, पेपर लीक कैसे हो जाता है हांलाकि वो बात अलग है कि बाद में पुलिसक्रर्मी को लेकर कुछ और ही खुलासा हुआ लेकिन क्या वाकई परीक्षा पश्नपत्र चाय की दुकान से लेकर सियासी गलियारे तक में बेचे जाता हैं। दोस्तो इस पुलिसकर्मी सच्चाई क्या है, वो अलग विषय हो सकता है, लेकिन उत्तराखंड समेत देश नें पेपर लीक एक बड़ी बीमारी तो बना ही है, जिसका इलाज खोजने के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के अलग-अलग राज्यो में प्रदर्शन खूब है लेकिन अपने उत्तराखंड में तो कुछ और ही चल रहा है। तो सुना आपने देश में 152 बार और उत्तराखंड में 54 बार पेपर लीक हो चुके हैं. ये कहना है उत्तराखंड के पूर्व विधायक जीत राम टम्टा का, इतना ही नहीं आगे कहते हैं कि बीजेपी जानबूझकर पेपर लीक करवाती है.ये लोग पैसों के लिए और युवा रोजगार न पा सके इसलिए पेपर लीक करवाती है, ये सरकार का मुख्य उद्देश्य है अब सवाल आता है कि सरकार और बीजेपी इस पेपर लीक वाली बड़ी परेशानी को कैसे देखती है।

जंतर-मंतर पर चल रहे नीट पेपर लीक आंदोलन पर बीजेपी प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत का ये बयान है और कहती हैं कि इस धरने के पीछे कहीं बाहरी फंडिंग तो नहीं हो रही है। दीप्ति रावत ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आंदोलन को आर्थिक सहयोग कहां से मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया धामी कहते हैं कि पेपर लीक मामले को लेकर बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी,हमारा पहले से स्पष्ट मत रहा है कि हम उत्तराखंड में सख्त नकल का कानून ले कर आये.और 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल के अंदर भेजा है। तो दोस्तों, पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य, उनके भरोसे और पूरे भर्ती सिस्टम की विश्वसनीयता का सवाल है। राजनीतिक दल एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। कोई आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग की जांच की मांग कर रहा है, तो कोई सरकार पर ही पेपर लीक को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। वहीं सरकार का दावा है कि उसने सख्त नकल विरोधी कानून बनाकर 100 से अधिक नकल माफियाओं को जेल भेजा है..लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वहीं है। क्या इन दावों और आरोपों के बीच युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षाओं की गारंटी मिल पाएगी? क्या पेपर लीक पर राजनीति से आगे बढ़कर स्थायी समाधान निकलेगा? और क्या भविष्य में किसी छात्र की मेहनत पेपर लीक की भेंट नहीं चढ़ेगी?इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मिलेंगे, लेकिन इतना तय है कि जब तक पेपर लीक की घटनाएं पूरी तरह बंद नहीं होतीं, तब तक युवाओं का भरोसा बहाल करना किसी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहेगा फिलहाल इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।