देवभूमि उत्तराखंड से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जो उम्र की सीमाओं को तोड़ती हुई दिल को छू जाती है। क्या सच्चा प्यार वाकई वक्त के साथ खत्म हो जाता है, या फिर वह यादों और आस्था के रूप में हमेशा ज़िंदा रहता है? कैसे 89 वर्षीय एक बुजुर्ग ने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में एक मंदिर बनवा दिया। उसके बाद आरती और दिन भर की बाते और इस खबर को और रोचक बना देते हैं। मै आपको बताने के लिए आया हूं इस रुला देने वाली कहानी के बारे में क्या ये सच है। दोस्तो क्या ये सच हो सकता है कि एक बुजुर्ग सिर्फ दिवंगत पत्नि का मंदिर बनाते हैं, बल्की रोज़ आरती करते हैं और मानो उनसे दिनभर की बातें साझा करते हैं। दोस्तो जरा इन तस्वीरों को देखिए, एक बेहद बुजुर्ग इंसान, कंपकपाते हाथ चेहरे पर हजार झुर्रियां ठीक से खड़े भी होना मुश्किल लगाता है, लेकिन आस्था बड़ी है। हाथ में पूजा की थाल और धूप बाती के साथ पूजा ये रोज का है लेकिन सामने भगवान कौन से हैं किसकी पूजा 9 दशक जिंदगी के जी चुका एक बुजुर्ग कर रहा है। दोस्तो देवभूमि उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र के फरसाली वल्ली तिलघर गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि भावनाओं का ऐसा प्रवाह है, जिसे पढ़कर आंखें भी नम हो जाती हैं और जिसे देख कर मन कुछ देर के लिए ठहर सा जाता है। दोस्तो ये कहानी है 89 वर्षीय पूर्व सैनिक केदार सिंह कोश्यारी की, जिन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी लक्ष्मी देवी के लिए घर के भीतर एक मंदिर बना दिया। दोस्तो क्या प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम है, या फिर वह एहसास है जो जाने के बाद भी इंसान को हर पल साथ महसूस कराता है? शायद इसका जवाब इस कहानी में छिपा है एक रिश्ता जो समय से भी मजबूत रहा।
दोस्तो केदार सिंह कोश्यारी और लक्ष्मी देवी का साथ साल 1962 में शुरू हुआ था। ये वह दौर था जब जीवन सरल था, लेकिन संघर्ष कम नहीं थे सीमित संसाधनों, जिम्मेदारियों और कठिन परिस्थितियों के बीच दोनों ने मिलकर जीवन को जिया। केदार सिंह सेना में अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर भी तैनात रहे, लेकिन दूरी कभी इस रिश्ते की नींव को कमजोर नहीं कर सकी। वे कहते हैं कि असली रिश्ते दूरियों से नहीं टूटते, बल्कि विश्वास से और यहां इस विश्वास ने हर मोड़ पर साथ निभाया, लेकिन दोस्तो होनी को कौन टाल सकता है एक दिन ऐसा आया सब कुछ बदल दिया। दस्तो 7 दिसंबर 2019 एक ऐसा दिन जो केदार सिंह की जिंदगी में हमेशा के लिए दर्द बनकर रह गया। दोस्तो एक शादी समारोह के दौरान लक्ष्मी देवी का अचानक निधन हो गया, पल भर में सब बदल गया जो घर कभी उनकी आवाज़ से गूंजता था, वहां एक सन्नाटा उतर आया, लेकिन क्या सच्चा प्यार सिर्फ साथ रहने तक सीमित होता है? शायद नहीं, आगे देखिए प्रेम जो यादों में भी जिंदा रहा। दोस्तो पत्नी के जाने के बाद केदार सिंह टूट तो गए, लेकिन उन्होंने खुद को उस प्यार से अलग नहीं किया जिसे उन्होंने पूरी जिंदगी जिया था। उन्होंने उस रिश्ते को खत्म नहीं होने दिया, बल्कि उसे एक नई पहचान दे दी। साल 2020 में उन्होंने लक्ष्मी देवी की आदमकद मूर्ति बनवाई और उसे अपने घर में स्थापित किया। यह मूर्ति उनके लिए सिर्फ पत्थर की एक प्रतिमा नहीं, बल्कि उनके जीवनसाथी की उपस्थिति का एहसास है।
दोस्तो सबसे ज्यादा जो बात हैरान करती है वो ये कि हर सुबह, हर शाम एक ही संवाद सालों चला आ रहा है आज भी केदार सिंह रोज सुबह-शाम उस मूर्ति की आरती करते हैं। दीप जलाते हैं, फूल चढ़ाते हैं और सबसे खास बात—वे उनसे बातें करते हैं। दोस्तो क्या किसी को पत्थर की मूर्ति से बात करते देखना अजीब लगता है? शायद दुनिया के लिए हां, लेकिन उनके लिए यह एक रिश्ता है जो कभी टूटा ही नहीं। दोस्तो वे अपनी दिनचर्या साझा करते हैं, दिनभर की बातें बताते हैं, जैसे लक्ष्मी देवी आज भी उनके सामने बैठी हों और मुस्कुरा रही हों।दोस्तो केदार सिंह के जीवन में संतान नहीं है। वे अपने भाई के परिवार के साथ रहते हैं, जो उनकी देखभाल करता है लेकिन इस देखभाल के बीच भी उनका सबसे बड़ा सहारा आज भी वही यादें हैं, वही मंदिर है, वही आरती है और वही संवाद है। क्या अकेलापन हमेशा खालीपन होता है? इस कहानी में इसका जवाब अलग मिलता है। यहां अकेलापन भी प्रेम से भरा हुआ है। अब वो सवाल आता है जो आज की युवा पीडढिया जहां तहां पूछती फिरती है, क्या यही है सच्चा प्यार?दोस्तो आज के तेज रफ्तार दौर में जहां रिश्ते अक्सर स्वार्थ और समय की सीमाओं में बंध जाते हैं, वहां यह कहानी एक सवाल छोड़ जाती है—क्या प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम है, या फिर वह एहसास है जो जाने के बाद भी इंसान के भीतर जीवित रहता है? केदार सिंह कोश्यारी का यह प्रेम किसी फिल्मी कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह वास्तविकता है—एक ऐसी वास्तविकता जो यह सिखाती है कि सच्चा प्रेम समय, दूरी और मृत्यु से भी बड़ा हो सकता है। दोस्तो ये कहानी सिर्फ एक बुजुर्ग व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस भावना की है जो हर रिश्ते की असली ताकत होती है। यह बताती है कि जब प्यार सच्चा होता है, तो वह यादों में नहीं मरता, बल्कि हर दिन और गहरा होता जाता है, लक्ष्मी देवी भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन केदार सिंह की दुनिया में वे आज भी जीवित हैं—आरती में, बातों में और हर उस पल में जो वे साथ जीते हैं और शायद यही इस कहानी का सबसे बड़ा सच है—प्यार कभी खत्म नहीं होता, वह बस रूप बदल लेता है।