चंपावत में बड़ा एक्शन! | Champawat Case | Congress | Politics | POCSO | Uttarakhand News

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उत्तराखंड के चर्चित चंपावत कथित नाबालिग गैंगरेप मामले में अब ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे प्रदेश को चौंका दिया है।जिस केस को लेकर भारी आक्रोश था। अब पुलिस जांच में वही मामला एक सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आया है।आरोप है कि बदले की भावना में निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने के लिए पूरी कहानी रची गई, वीडियो बनाए गए और उन्हें वायरल तक किया गया।पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।तो आखिर क्या है पूरा सच?कैसे रची गई ये कथित साजिश?और जांच में कौन-कौन से चौंकाने वाले खुलासे हुए?बताएंगे आपको पूरी कहानी। दोस्तो Champawat के चर्चित मामले में पुलिस जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। गिरफ्तारी की बात करूं उससे पहले मै आपको प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक बयान दिखाना चाहता हूं इसी मामले पर क्या कहा, जी हां दोस्तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्षी कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए बड़ा बयान दिया है। सीएम धामी ने कहा कि यह पहली घटना नहीं है, इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कांग्रेस से जुड़े लोगों की जमीनें गायब हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अपनी राजनीति चमकाने के लिए बेटियों, बहनों और छोटी बच्चियों को आगे कर बेहद घिनौनी राजनीति कर रहा है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है और कांग्रेस पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं। अब बात मामले हुई दो गिरफ्तारियों की दोस्तो पुलिस की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच में यह मामला सुनियोजित षड़यंत्र के रूप में सामने आया है। पुलिस का दावा है कि बदले की भावना से निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने की साजिश रची गई थी।

दोस्तो इस मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं तीसरे आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। दोस्तो पुलिस ने तीनों नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग बालिका को बंधक बनाकर उसका वीडियो बनाया गया और बाद में उसे सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य कुछ निर्दोष लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाना था। दोस्तो, थाना चंपावत क्षेत्र में राम सिंह रावत की तहरीर के आधार पर पुलिस ने कमल सिंह रावत, उसकी महिला मित्र और आनंद सिंह मेहरा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं तथा पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विवेचना के दौरान पॉक्सो एक्ट की धारा 16 और 17 भी बढ़ाई गई हैं। दोस्तो जांच के बाद पुलिस ने आरोपी कमल सिंह रावत और उसकी महिला मित्र को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। अदालत ने दोनों आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। वहीं तीसरे आरोपी की तलाश और उससे संबंधित कानूनी कार्रवाई अभी जारी है, लेकिन दोस्तो इधर सियाली तस्वीर की बात करू तो चंपावत प्रकरण पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ हमलावर हो गई है। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र लिखते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच कराए जाने की मांग उठाई है। साथ इस मामले पर सरकार को घेरा और सरकार की ओर से इस प्रकरण पर लीपापोती किए जाने का आरोप लगाया।

दोस्तो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र लिखते हुए कहा कि इस प्रकरण के मुख्य आरोपी के रूप में सत्ताधारी दल के नेता का नाम सामने आने के बाद पूरे मामले को नया रंग दिया जा रहा है। पुलिस जांच पर भी कई प्रकार का संदेश पैदा हो रहा है इसको लेकर सामूहिक दुष्क्रम की निष्पक्ष जांच कराये जाना और पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा प्रदान किया जाना अत्यंत जरूरी है। साथ ही ये भी कि पुलिस अगर यह कह रही है कि कुछ नहीं हुआ और यह साजिश थी तो फिर एफआईआर में क्या लिखा गया, मेडिकल परीक्षण में क्या निकला? पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष क्या बयान दिए और यह पुलिस ने जारी कैसे कर दिया। इधर दोस्तो Rekha Yadav ने कहा कि कानून का दुरुपयोग कर समाज में भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि मामले की जांच निष्पक्ष और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई है तथा किसी भी निर्दोष व्यक्ति को फंसाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “तो दोस्तो, चंपावत मामले में हुए इस खुलासे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि किसी भी संवेदनशील मामले में सच सामने आने से पहले निष्कर्ष पर पहुंचना कितना खतरनाक हो सकता है। पुलिस का दावा है कि वैज्ञानिक और तकनीकी जांच में पूरा मामला एक सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आया, जिसमें निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश की गई। फिलहाल मुख्य आरोपी और उसकी महिला मित्र जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि मामले में आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं। क्या कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए और सख्त व्यवस्था की जरूरत है?और क्या सोशल मीडिया पर बिना जांच किसी भी जानकारी को वायरल करना समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है?फिलहाल इस मामले पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइएगा।