Borderr Roads Landslide चीन सीमा पर महासंकट!| Pithoragarh | Baileybridge Collapse | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो, चीन सीमा से भारत का संपर्क एक बार फिर महासंकट में है ढ़ का ऐसा कहर आया कि महज 8 दिन पहले तैयार किया गया करीब 170 फीट लंबा बैली ब्रिज देखते ही देखते बह गया। सवाल सिर्फ एक पुल के टूटने का नहीं है। सवाल उस कनेक्टिविटी का है, जो चीन सीमा से जुड़े इलाकों के लिए बेहद अहम है।आखिर करोड़ों की लागत से बना ये नया पुल सिर्फ 8 दिन में कैसे जमींदोज हो गया? क्या प्रकृति का प्रहार इतना जबरदस्त था, या निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठेंगे?चीन सीमा पर इस महासंकट की पूरी कहानी देखिए। चीन सीमा पर भारत का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच हवा में उड़ गया! पिथौरागढ़ के कुलागाड़ नाले की उफनती लहरों ने सिर्फ 170 फीट लंबा लोहे का पुल नहीं बहाया, बल्कि हमारी सामरिक सुरक्षा की रीढ़ को तोड़ दिया है! धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग पूरी तरह ठप, तीन घाटियों के हजारों लोग दुनिया से अलग-थलग और चीन सीमा से हमारा संपर्क शून्य! और सबसे बड़ा सवाल—जो पुल महज 8 दिन पहले 4 सितंबर को बनकर तैयार हुआ था, वो एक ही झटके में कैसे गायब हो गया? क्या यह सिर्फ कुदरत का कहर है या पहाड़ों में हो रहे निर्माण कार्यों में बरती गई भारी लापरवाही? इसके अलावा दोस्तो पिथौरागढ़ में मुन्ना बैंड के पास बड़ा लैंडस्लाइड हुआ है। पहाड़ से लगातार भारी बोल्डर गिरने के चलते मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है। हालात को देखते हुए चौकी घाट पुलिस ने वाहनों की आवाजाही रोककर उन्हें सुरक्षित स्थान पर खड़ा कराया है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए फिलहाल मौके पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्र धारचूला में लाधार बारिश ने वो कहर बरपाया कि कुलागाड़ नाला उफान पर आ गया। पानी के साथ आए भारी मलबे और बोल्डरों ने टनकपुर-तवाघाट नेशनल हाईवे पर बने 170 फीट लंबे नवनिर्मित बैली ब्रिज को ताश के पत्तों की तरह बहा दिया। स्थिति इतनी गंभीर है कि दारमा, व्यास और चौदांस घाटियों का देश के बाकी हिस्सों से संपर्क टूट गया है और सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील चीन सीमा का सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो चुका है। दोस्तो इस खबर ने न सिर्फ आम जनता को, बल्कि दिल्ली से लेकर देहरादून तक के सुरक्षा रणनीतिकारों को हिलाकर रख दिया है। हैरानी और गुस्से की बात यह है कि पुराना पुल 18 अगस्त को चट्टान गिरने से टूटा था, जिसके बाद बीआरओ (BRO) की टीम ने दिन-रात एक करके 4 सितंबर को ही इस नए बैली ब्रिज को तैयार किया था। जिस पुल की सुरक्षा के दम पर 15 सितंबर से आदि कैलाश यात्रा शुरू होने वाली थी, वो पुल उद्घाटन के महज 8 दिन बाद ही पानी में विलीन हो गया! अब सवाल उठ रहे हैं कि सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर इतनी कमजोर इंजीनियरिंग क्यों की गई? क्या किसी की जवाबदेही तय होगी? दोस्तो पुल बहने की इस घटना ने उत्तराखंड की राजनीति में भी हड़कंप मचा दिया है। विपक्ष ने सरकार को आपदा प्रबंधन और घटिया निर्माण के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है। उधर, मलबे की वजह से काली नदी में पानी रुकने और झील जैसी स्थिति बनने का खतरा मंडरा रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने नदी किनारे हाई अलर्ट जारी कर दिया है। धारचूला-तवाघाट-गुंजी मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया है और पुलिस ने पर्यटकों व स्थानीय लोगों को इस ओर न आने की सख्त हिदायत दी है। दोस्तो पहाड़ों में बार-बार पुलों का बहना और खासकर चीन सीमा को जोड़ने वाले मुख्य रास्तों का इस तरह ठप होना सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था पर करारा तमाचा है। बीआरओ एक बार फिर युद्धस्तर पर वैकल्पिक मार्ग बनाने में जुट गया है, लेकिन सवाल वही है—आखिर कब तक हमारे सीमांत इलाके इसी तरह भगवान भरोसे रहेंगे? क्या इस लापरवाही के पीछे के चेहरों को बेनकाब किया जाएगा?