पहाड़ की सबसे हॉट सीट का सस्पेंस | Srinagar | Dhan Singh Rawat | Ganesh Godiyal | Uttarakhand News

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दोस्तो साल 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की बिसात बिछ चुकी है, लेकिन आज बात पहाड़ की उस ‘हॉट सीट’ की, जिसने पिछली बार पूरी बीजेपी और कांग्रेस की सांसें अटका दी थीं। जी हां, श्रीनगर विधानसभा सीट ! जहां इस बार सवाल सिर्फ एक विधायक की जीत का नहीं है, बल्कि सवाल दो सियासी दिग्गजों के वजूद और 587 वोटों की उस ऐतिहासिक टीस का है, जो कांग्रेस के सीने में पिछले 5 साल से सुलग रही है। क्या सूबे के ताकतवर कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत अपना किला बचा पाएंगे? या फिर कांग्रेस के कद्दावर नेता गणेश गोदियाल इस बार पुरानी हार का हिसाब चुकता कर श्रीनगर में ‘महा-मंगल’ करेंगे? आखिर क्यों इस एक सीट की हार-जीत पूरी उत्तराखंड सरकार की स्थिरता और भविष्य को तय करती है? दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में कुछ हार ऐसी होती हैं जो सालों तक भूलती नहीं हैं। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में श्रीनगर सीट पर एक-एक वोट के लिए जो ड्रामा हुआ, उसने लोकतंत्र की सबसे नजदीकी जंग दिखाई थी।

बीजेपी के डॉ. धन सिंह रावत को 29,618 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के गणेश गोदियाल को 29,031 वोट मिले। महज 587 वोटों के फासले (0.9% वोट शेयर) से धन सिंह रावत चुनाव जीत गए और गणेश गोदियाल के हाथ से सत्ता फिसल गई। दोस्तो यही वो टीस है, जिसे लेकर कांग्रेस 2027 में बदले की आग के साथ मैदान में उतर रही है। दोस्तो आंकड़े गवाही देते हैं कि श्रीनगर की जनता किसी को भी स्थायी वारंट नहीं देती। 2012 में जहां गोदियाल ने धन सिंह रावत को 5 हजार से ज्यादा वोटों से पटखनी दी थी, वहीं 2017 की मोदी लहर में धन सिंह रावत ने 8,698 वोटों से बड़ी जीत दर्ज की। लेकिन 2022 में एंटी-इन्कंबेंसी ऐसी हावी हुई कि BJP बमुश्किल अपनी लाज बचा पाई. इसको कुछ ऐसे समझा जा सकता है।

2012 का चुनाव 

  • विजेता- गणेश गोदियाल (कांग्रेस)
  • हारे- डॉ. धन सिंह रावत (BJP)
  • जीत का अंतर- 5,063 वोट

2017 का चुनाव

  • विजेता- डॉ. धन सिंह रावत (BJP)
  • हारे- गणेश गोदियाल (कांग्रेस)
  • जीत का अंतर: 8,698 वोट

2022 का चुनाव

  • विजेता- डॉ. धन सिंह रावत (BJP)
  • हारे- गणेश गोदियाल (कांग्रेस)
  • जीत का अंतर- सिर्फ 587 वोट

दोस्तो श्रीनगर विधानसभा सीट का मिजाज पूरी तरह से ठाकुर बनाम ब्राह्मण और स्थानीय विकास बनाम संगठन की ताकत पर टिका होता है। अब बड़ा सवाल कि श्रीनगर सीट के नतीजे उत्तराखंड सरकार पर क्या असर डालते हैं? डॉ. धन सिंह रावत सिर्फ एक विधायक नहीं हैं, बल्कि वो धामी सरकार के सबसे ताकतवर चेहरों में से एक हैं, जिनके पास स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा जैसे भारी-भरकम विभाग हैं। श्रीनगर गढ़वाल मंडल का केंद्र बिंदु माना जाता है। अगर बीजेपी यहां हारती है, तो इसका मतलब होगा कि पूरे गढ़वाल क्षेत्र में पार्टी का नैरेटिव कमजोर हुआ है, जिसका सीधा असर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कैबिनेट के शक्ति संतुलन पर पड़ेगा। वहीं दूसरी तरफ, गणेश गोदियाल कांग्रेस का वो चेहरा हैं जो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। यदि गोदियाल जीतते हैं, तो कांग्रेस न सिर्फ गढ़वाल के दिल में सेंध लगाएगी, बल्कि वो 2027 में सरकार बनाने की स्थिति में मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरेंगे। दोस्तो 2027 की जंग और पेचीदा हो चुकी है, एक तरफ धन सिंह रावत के पास श्रीनगर में मेडिकल कॉलेज, सड़कों का चौड़ीकरण और ‘डबल इंजन’ सरकार के विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड है लेकिन दूसरी तरफ, गणेश गोदियाल स्थानीय मुद्दों, स्वास्थ्य सेवाओं में कमियों, युवाओं के रोजगार और पहाड़ों के ‘मूल निवास व सख्त भू-कानून’ के गुस्से को हवा दे रहे हैं। साथ ही, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) जैसी तीसरी ताकतें इस बार दोनों ही बड़ी पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगाने को तैयार बैठी हैं। दोस्तो 587 वोटों का वो ऐतिहासिक दर्द क्या इस बार बीजेपी को भारी पड़ेगा, या फिर धन सिंह रावत चुनावी चाणक्य बनकर हैट्रिक मारेंगे? श्रीनगर की जनता इस बार किसका ‘महा-मंगल’ करेगी, इस पर सिर्फ पौड़ी गढ़वाल की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की नजरें टिकी हैं। क्योंकि जो श्रीनगर जीतता है, वो देहरादून के सिंहासन का रास्ता तय करता है।