सरकारी भूमि पर बनी मजार पर चला बुलडोजर | Haridwar | Bulldozer Action | CM Dhami | Uttarakhand News

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दोस्तो देवभूमि हरिद्वार से उस वक्त की बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई, जब सरकारी जमीन पर बने एक कथित अवैध धार्मिक ढांचे पर प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर देवभूमि में सरकारी भूमि पर इतना बड़ा अतिक्रमण कैसे हो गया? किसकी लापरवाही से यहां करीब 10 बीघा जमीन पर कब्जा जमा लिया गया?क्या यह सिर्फ एक अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई है, या फिर लंबे समय से चल रहे अतिक्रमण तंत्र पर अब सरकार का सख्त रुख है? और सबसे अहम—क्या आगे भी इसी तरह की कार्रवाई पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगी?इन्हीं तमाम सवालों के जवाब जानेंगे इस रिपोर्ट मे। दोस्तो उत्तराखंड के हरिद्वार से इस वक्त एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आ रही है। जहां सरकारी जमीन पर बने अवैध धार्मिक ढांचे के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चला दिया। लेकिन सवाल सिर्फ एक मजार हटाने का नहीं है। सवाल है सिस्टम, कानून और संतुलन का।आखिर क्या है पूरा मामला? क्यों प्रशासन को यह सख्त कदम उठाना पड़ा? और क्या यह कार्रवाई सिर्फ अतिक्रमण के खिलाफ है या इसके पीछे कोई बड़ा मैसेज छिपा है? दरअसल दोस्तो, हरिद्वार के गढ़मीरपुर और सुमननगर इलाके में बरसाती नदी के किनारे वह जमीन थी, जो पहले टिहरी विस्थापितों के पुनर्वास के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन आरोप है कि कुछ लोगों ने यहां एक मजार बनाकर करीब दस बीघा सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया।

दोस्तो स्थानीय लोगों ने इस कब्जे को लेकर कई बार शिकायत की, सवाल उठाए और प्रशासन से मांग की कि इस जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए, इसके बाद प्रशासन हरकत में आया जांच हुई। नोटिस जारी किए गए, लेकिन जब तय समय में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। एसडीएम के नेतृत्व में भारी पुलिस बल के साथ टीम मौके पर पहुंची और फिर बुलडोजर चला। कुछ ही घंटों में पूरा ढांचा ध्वस्त कर दिया गया, लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल उठता है—क्या सरकारी जमीन पर बने हर अवैध ढांचे पर इसी तरह कार्रवाई होती है? या फिर यह कार्रवाई चुनिंदा मामलों तक ही सीमित रह जाती है? प्रशासन का कहना है कि यह पूरी तरह से नियमों के तहत की गई कार्रवाई है। और मजार के नीचे किसी भी प्रकार के अवशेष नहीं मिले। यानी यह स्पष्ट किया जा रहा है कि यह धार्मिक स्थल नहीं बल्कि अवैध कब्जा था। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने साफ कहा है कि जनपद में कहीं भी अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश भी साफ हैं— सरकारी जमीन पर बने किसी भी अवैध धार्मिक ढांचे को हटाया जाएगा, लेकिन अब बहस यहां से शुरू होती है क्या इस तरह की कार्रवाई से अवैध कब्जों पर लगाम लगेगी? या फिर इससे सामाजिक और धार्मिक तनाव बढ़ने का खतरा भी है? और सबसे अहम—क्या प्रशासन सभी तरह के अतिक्रमणों पर समान रूप से कार्रवाई करेगा? हरिद्वार में यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी सुमननगर, बहादराबाद और गढ़मीरपुर क्षेत्रों में इस तरह के अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं। यानी साफ है कि प्रशासन अब इस मुद्दे पर लगातार एक्शन मोड में है। लेकिन आने वाले समय में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या यह अभियान पूरे प्रदेश में इसी सख्ती के साथ चलता है या फिर यह सिर्फ कुछ चुनिंदा मामलों तक ही सीमित रह जाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है सवाल है कानून के राज का, सवाल है निष्पक्षता का, और सवाल है जनता के भरोसे का।