दोस्तो, क्या उत्तराखंड में कानून के रखवालों पर ही कानून तोड़ने के आरोप लग रहे हैं? और क्या एक बीजेपी नेता को चौकी में बुलाकर बेरहमी से पीटा गया? खटीमा से सामने आई ये खबर कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। आरोप है कि बीजेपी के नेता ही नहीं मंडल अध्यक्ष की जमकर कुटाई हो गई, चौकी में बुलाकर लात-घूंसों से पीटा और हैरानी की बात ये कि शुरुआत में पुलिस ने कोई कार्रवाई भी नहीं की तो फिर हुआ बड़ा बवाल बवाल के बाद की पूरी खबर बताउंगा आपको अपनी इस रिपोर्ट के जरिए। दोस्तो तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि मामला इतना बढ़ गया? और क्यों लोगों और बीजेपी कार्यकर्ताओं को कोतवाली का घेराव करना पड़ा? क्या दबाव के बाद दर्ज हुई FIR अब सच्चाई सामने लाएगी? और क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी? खबर क्या है मामला क्या है वीडियो को अंत तक जरूर देखिएगा दोस्तो उत्तराखंड के खटीमा से एक बड़ी खबर सामने आ आई। खबर है कि यहां फोरेस्ट रेंजर और दो वन्य कर्मियों ने बीजेपी नेता की बेरहमी से पिटाई कर दी। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया गया है बताया जा रहा है कि इससे पहले पुलिस कोई एक्शन नहीं ले रही थी। जब स्थानीय लोगों और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने कोतवाली का घेराव किया, उसके बाद ही पुलिस ने केस दर्ज किया। ये बीजेपी के नेता हैं और आरोप तमाम हैं दोस्तो इधर पुलिस ने अब मामले की जांच शुरू कर दी है। बीजेपी नेता का नाम विपिन राणा बताया जा रहा है। विपिन बीजेपी अनुसूचित जनजाति चकरपुर मंडल के अध्यक्ष हैं।
इसके अलावा वो ग्राम प्रहरी भी हैं। विपिन का कहना है कि उन्हें एक वन बीट अधिकारी का फोन आया था। इसके बाद उन्हें वन चौकी बुलाया गया। आरोप है कि चौकी में विपिन से बिना पूछताछ किए वन विभाग के कर्मियों ने पीटना शुरू कर दिया। दोस्तो आरोप है कि विपिन के साथ मारपीट का वीडियो भी तैयार किया गया है। इतना ही नहीं है इस पूरे मामले ये बात निकलकर आ रही है कि जब विपिन के साथ मार पिटाई हुई तो वो उसके बाद पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद लोगों ने कोतवाली का घेराव किया। तब जाकर केस दर्ज हुआ। दोस्तो खटीमा रेंज के रेंजर समेत दो वन कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज जांच तेज कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि वन कर्मियों के खिलाफ मारपीट, गाली गलौज, आपराधिक षड्यंत्र और जान से मारने की धमकी के आरोप लगाए थे। दोस्तो, खटीमा का यह पूरा मामला अब सिर्फ एक मारपीट का आरोप नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। जहां एक तरफ विपिन राणा ने वनकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं पुलिस अब मामले की जांच में जुटी हुई है और कार्रवाई का भरोसा दे रही है।लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—क्या इस मामले में सच्चाई पूरी तरह सामने आ पाएगी? और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर मामला समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा?फिलहाल जांच जारी है। और सभी की नजरें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।