‘2027 का चुनाव बड़ा मुश्किल हो जाएगा..?’ | Banshidhar Bhagat | BJP | Congress | Uttarakhand News

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दोस्तो, क्या 2027 के चुनाव से पहले बीजेपी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? और क्या एक बयान ने पार्टी की रणनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं? मोदी-मोदी” के सहारे अब चुनावी नैया पार नहीं होगी। यह बात किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि खुद एक BJP विधायक ने कह दी—जिसके बाद सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। क्या यह सिर्फ एक व्यक्तिगत राय है या फिर जमीनी सच्चाई का संकेत? और अगर यह बात सही है, तो क्या 2027 का चुनाव वाकई बीजेपी के लिए इतना आसान नहीं रहने वाला?आखिर क्यों इस बयान के बाद पार्टी के अंदर चर्चा तेज हो गई है? और क्या आने वाले समय में इसका असर चुनावी रणनीति पर भी दिखेगा? दोस्तो चुनाव बेहद नजदीक है, लेकिन इधर बीजेपी एक विधायक ने बीजेपी की परेशानी को बढ़ाने के साथ साथ ये बताने की कोशिश कर दी है कि सिर्फ मोदी नाम जपने से अब जनता बीजेपी को वोट नहीं करने वाली है। क्या ये सच है अब तक जो वोट बीजेपी को मिले वो सिर्फ मोदी नाम के जप से मिले, स्थानीय नेताओं और उम्मीदवारों की अपनी खुद की कोई बूमिका नहीं थी। क्या बीजेपी के विधायक जो आज इस बात को खुली आम बैठक में कहते दिखाई दे रहे हैं वो भी ये मानते हैं कि अब मोदी मैजिक अपने प्रदेश में नहीं चलने वाला। दोस्तो मामला बेहद चुनौती पूर्ण हो चुका है अब अपने बयानों के कारण अक्सर चर्चाओं में रहने वाले उत्तराखंड में बीजेपी के वरिष्ठ और विधायक बंशीधर भगत का बयान आज काफी सुर्खियों में है। उन्होंने सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए अपनी ही पार्टी के लिए बड़ी बात कह दी।

बंशीधर भगत ने यहां तक कह दिया है कि वर्ष 2027 के चुनाव में हालात मुश्किल हो सकते हैं और सिर्फ ‘मोदी-मोदी’ कहने से काम नहीं चलेगा, उन्होंने ये बयान कैबिनेट मंत्री खजानदास के सामने दिया है। आईए जानते है, बीजेपी के विधायक ने इस तरह का बयान क्यों दिया है। दरअसल, दोस्तो हल्द्वानी में जिला योजना की बैठक हुई थी। इस बैठक में विकास कार्यों और बजट को लेकर तीखी चर्चा देखने को मिली। बैठक में नैनीताल जिले के प्रभारी मंत्री खजान दास की मौजूदगी में वर्ष 2026-27 के लिए 70 करोड़ से अधिक की योजना को मंजूरी दी गई। इस बैठक में जनपद के सभी जनप्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। तभी बीजेपी विधायक बंशीधर भगत ने जल जीवन मिशन को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए नाराजगी जताई। बीजेपी विधायक बंशीधर भगत ने बैठक में प्रभारी मंत्री खजान दास के सामने ही अपना गुस्सा जाहिर करते हुए पहले तो जल जीवन मिशन पर सवाल खड़े किए है। बैठक में बीजेपी विधायक बंशीधर भगत ने बताया कि पहले सड़कों को खोदा गया, फिर नलकूप और ओवरहेड टैंक बनाए जा रहे हैं, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में तीन साल लग चुके हैं और अभी भी काम अधूरा है। लोगों को आज भी टूटी और खोदी गई सड़कों पर चलने को मजबूर होना पड़ रहा है। दोस्तो भगत ने साफ किया कि अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, इसलिए उन्हें दोष देना उचित नहीं है, बल्कि असली समस्या बजट की कमी है। उन्होंने प्रभारी मंत्री से आग्रह किया कि या तो पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया जाए या फिर जिन कार्यों को फिलहाल रोका जा सकता है, उन्हें कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया जाए, ताकि प्राथमिक कार्य पूरे हो सकें और जनता को राहत मिल सके। बीजेपी विधायक बंशीधर भगत ने कहा कि उनके यहां की पहली समस्या पानी और सड़क है। बाकि समस्याओं को तो बाद में देख लिया जाएगा, लेकिन जब बंशीधर भगत के बयान पर बवाल हुआ तो उनकी सफाई भी सामने आने में देर नही लगाई। अब दोस्तो बंशीधर भगत जो भी कहें लेकिन मोदी मोदी कह कर वैसे भी कब तक वोट मिल कता है, वो खुद कई बार के विधायक हैं मंत्री बनने की दौड़ में भी रहे हैं। अब वो बात अलग है कि मंत्री नहीं बन पाए। खबर तो ये भी की वो अपने परिवार के लिए विधायन सभा में टिक के लिए दावा पेश कर रहे हैं, लेकिन दोस्तो इस बयान के मायने तो अपने-अपने तरीके से निकाले ही जा रहे हैं लेकिन कांग्रेस ने इस मामले को झट से लपक लिया है। दोस्तो माहरा ने कहा कि बंशीधर भगत का हालिया बयान भाजपा सरकार की वास्तविकता को उजागर करने वाला है। जब भाजपा के ही वरिष्ठ नेता कह रहे हैं कि अब सिर्फ मोदी-मोदी कहने से काम नहीं चलेगा और प्रदेश में कोई ठोस काम नहीं हुआ, तो साफ है कि विकास की कहानी सिर्फ प्रचार और नारों तक सीमित थी। आगे भी बहुत कुछ कहा तो दोस्तो अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पूरा मामला सिर्फ एक बैठक में कही गई नाराजगी है या फिर इसके पीछे जमीनी हकीकत की बड़ी तस्वीर छिपी हुई है? जहां एक तरफ भाजपा विधायक बंशीधर भगत अपने बयान पर सफाई देते हुए पार्टी और सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इस बयान को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 2027 के चुनाव में यह सियासी बयानबाज़ी जमीन पर असर दिखाएगी, या फिर इसे सिर्फ एक राजनीतिक बहस मानकर आगे बढ़ा दिया जाएगा? फिलहाल इस पूरे मामले ने उत्तराखंड की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी तापमान और बढ़ सकता है।