Kichha नगर पालिका चुनाव में बवाल!। Tilak Raj Behad । Rajesh Shukla । Policea Action।Uttarakhand News

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दोस्तो क्या उत्तराखंड में चुनाव अब सिर्फ लाठियों, थप्पड़ों और गुंडागर्दी के दम पर जीते जाएंगे? क्या जनता के चुने हुए जन-प्रतिनिधि की साख को सरेआम सड़कों पर नीलाम किया जाएगा? दोस्तो, किच्छा नगर निकाय चुनाव के बाद सियासत में ऐसा बवाल मचा कि स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर कांग्रेस और बीजेपी नेता आमने-सामने आ गए!विधायक तिलक राज बेहड़ के साथ कथित मारपीट और थप्पड़ मारने के आरोपों के बाद माहौल गरमा गया। देखते ही देखते समर्थकों की भीड़ सड़कों पर उतर आई और पुलिस को स्थिति संभालने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। आखिर स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर ऐसा क्या हुआ कि चुनावी माहौल तनाव में बदल गया? किस पर लगे गंभीर आरोप और कैसे बढ़ा विवाद? दोस्तो कई सुलगते हुए सवाल आज हम नहीं, बल्कि किच्छा नगर पालिका चुनाव के दौरान हुआ ये खूनी बवाल पूछ रहा है! किच्छा से वर्तमान वरिष्ठ कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ का सीधा और गंभीर आरोप है कि पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में उनके ऊपर हाथ उठाया गया, उन्हें थप्पड़ मारा गया! जैसे ही यह खबर फैली, किच्छा की सड़कें कुरुक्षेत्र के मैदान में तब्दील हो गईं। आक्रोशित बेहड़ समर्थकों ने जब न्याय की मांग की, तो पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उन पर ताबड़तोड़ लाठियां फटकार दीं! आखिर लोकतंत्र के इस पर्व में ये ‘गुंडाराज’ किसने फैलाया? और क्यों पुलिस के घेरे में रहने वाले एक विधायक को सरेआम बेइज्जत होना पड़ा? दोस्तो निकाय चुनाव के तहत किच्छा और सिरौलीकलां नगर पालिका की साख दांव पर लगी है, लेकिन वोटिंग के दिन जो हुआ, उसने देवभूमि के माथे पर कलंक लगा दिया। मंगलवार को किच्छा में स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कांग्रेस विधायक तिलक राज बेहड़ अधिकारियों से बात करने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां बीजेपी के नेता और पूर्व विधायक राजेश शुक्ला भी अपने समर्थकों के साथ पहुंच गए।

दोस्तो आरोप तमाम है दोनों तरफ से और आरोपों को देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई। विधायक बेहड़ का सीधा आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और विपक्षियों ने उन्हें सरेआम थप्पड़ जड़ दिया! एक 5 बार के विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के साथ इस तरह के अपमान की खबर जैसे ही लीक हुई, किच्छा के राजनीतिक गलियारों में बारूद सुलग उठा। दोस्तो अपने नेता के अपमान से गुस्साए सैकड़ों बेहड़ समर्थक और कांग्रेसी कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। जैसे ही समर्थकों ने बैरिकेड्स तोड़ने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा किया, वैसे ही पुलिस प्रशासन ने अपना रौद्र रूप दिखा दिया। पुलिस ने उग्र हो रहे बेहड़ समर्थकों पर बिना सोचे-समझे अंधाधुंध लाठियां फटकारनी शुरू कर दीं। खाकी के इस बल प्रयोग में कई कार्यकर्ताओं को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया, जिससे पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया। पुलिस ने मामले को शांत कराने के बजाय अपनी लाठियों के दम पर आक्रोश को दबाने की कोशिश की, जिससे माहौल शांत होने के बजाय और ज्यादा हिंसक हो गया और बेहड़ का ये वीडियो चर्चा में आता है।

दोस्तो इधर स्थिति को हाथ से बाहर जाता देख उधम सिंह नगर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और वर्तमान विधायक तिलक राज बेहड़ और बीजेपी के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला दोनों को ही अपनी हिरासत में ले लिया। गौरतलब है कि इस चुनाव को लेकर पहले से ही तनाव चरम पर था। हाईकोर्ट की सुनवाई के बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदान से ठीक एक दिन पहले ही किच्छा और सिरौलीकलां की मतगणना (Counting) को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद वोटिंग के दिन हुआ यह संग्राम साफ दिखाता है कि सत्ता और विपक्ष के बीच यह नाक की लड़ाई बन चुकी है, जहां नियम-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दोस्तो किच्छा नगर पालिका का यह चुनाव महज एक लोकल बॉडी का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि इसे 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के सेमीफाइनल के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या चुनाव जीतने के लिए हिंसा, थप्पड़ और लाठीचार्ज का यह नया ट्रेंड उत्तराखंड की शांत वादियों को स्वीकार होगा? दोस्तो आरोप लगता है कि एक विधायक को थप्पड़ मार दिया जाता है और न्याय मांगने वाली जनता और समर्थकों के हिस्से में पुलिस की बेरहम लाठियां आती हैं! किच्छा की इस आग ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की राजनीति अब मर्यादा की सीमाएं लांघ चुकी है। अब देखना यह है कि इस गुंडागर्दी और थप्पड़ कांड के असली गुनाहगारों पर धामी सरकार क्या कड़ा एक्शन लेती है या फिर खाकी की लाठियों के नीचे इस सच को दबा दिया जाएगा? इस पूरे बवाल पर और पुलिस की इस कार्रवाई पर आपकी क्या राय है,