Nanda Raj Jat कुरुड़ मंदिर में होगा यात्रा का महासमापन | Nanda Devi Badi Jat | Uttarakhand News

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दोस्तो, होमकुंड में महापूजा के बाद मां नंदा कैलाश की ओर बढ़ चुकी है, लेकिन क्या आपको पता है कि इस दिव्य यात्रा का महासमापन आखिर कहां और कैसे होगा?आंसुओं और जयकारों के बीच मां नंदा की विदाई के बाद अब कुरुड़ मंदिर में होगा बड़ी जात यात्रा का अंतिम पड़ाव। क्या है कुरुड़ के महासमापन की खास परंपरा? देखिए पूरी कहानी, पूरी खबर। दोस्तो हिमालय की दुर्गम चोटियों से आज एक ऐसी खबर आ रही है, जिसे सुनकर हर सनातनी का सिर श्रद्धा से झुक जाएगा। जी हां, मां नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने सबसे मुख्य और अलौकिक पड़ाव यानी होमकुंड में पूरी धार्मिक मान्यताओं के साथ संपन्न हो गई है। बर्फ की सफेद चादर के बीच जब मां नंदा की महापूजा हुई, तो वहां मौजूद हजारों भक्तों की आंखें छलक उठीं। इस दौरान एक ऐसा अद्भुत और अलौकिक नजारा भी देखने को मिला, जब कई भक्तों पर साक्षात देवी-देवताओं का अवतरण हुआ। दोस्तो मां की विदाई कराकर डोलियां अब वापस लौट चुकी हैं और कुरुड़ में इस ऐतिहासिक यात्रा का समापन होने जा रहा है। आइए आपको ले चलते हैं हिमालय के उस शिखर पर, जहां साक्षात आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। दोस्तो जय मां नंदा की गूंज और कड़ाके की ठंड के बीच, समुद्र तल से करीब 13 हजार से अधिक फीट की ऊंचाई पर स्थित होमकुंड साक्षात देवलोक बन गया। मां नंदा देवी बड़ी जात यात्रा के इस सबसे मुख्य पड़ाव पर पारंपरिक मंत्रोच्चारण और विशेष अनुष्ठानों के साथ महापूजा संपन्न की गई। इस पावन घड़ी में आस्था का वो चरम रूप देखने को मिला, जिसका इंतजार भक्तों को बरसों से था। पूजा के दौरान कई नंदा भक्तों पर साक्षात देवी-देवताओं का अवतरण हुआ। भक्तों के शरीर में देवताओं के आते ही पूरा माहौल ‘जय मां नंदा’ के जयकारों से गूंज उठा। कांपते और झूमते हुए इन देव-पश्वाओं (जिन पर देवता आते हैं) से वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लिया।

दोस्तो होमकुंड में अपनी लाडली बेटी नंदा को भरे मन और नम आंखों से विदा करने के बाद, अब देव डोलियों की वापसी का सफर शुरू हो चुका है। परंपरा के अनुसार, चौसिंग्या खाडू यानी चार सींगों वाला मेढ़ा आगे के दुर्गम हिमालयी रास्तों की ओर अकेले ही ओझल हो गया, और मां की डोलियां वापस नीचे की ओर लौट आईं। दुर्गम रास्तों को पार करते हुए ये डोलियां आज अपने निचले पड़ावों पर पहुंच चुकी हैं। कल यानी बुधवार को चमोली के ऐतिहासिक कुरुड़ मंदिर में इस भव्य और ऐतिहासिक बड़ी जात यात्रा का विधिवत समापन कर दिया जाएगा, जिसके बाद मां नंदा की ये दिव्य डोलियां वापस अपने-अपने गर्भगृहों में विराजमान हो जाएंगी। दोस्तो पहाड़ की संस्कृति में बेटी की विदाई का दर्द क्या होता है, इसे मां नंदा की इस यात्रा में साफ देखा जा सकता है। होमकुंड की महापूजा संपन्न होने के साथ ही उत्तराखंड ने एक बार फिर अपनी महान और अलौकिक परंपराओं को पूरी दुनिया के सामने जीवंत कर दिया है। कल कुरुड़ में होने वाले इस महासमापन के हर लाइव अपडेट के लिए आप जुड़े रहिए हमारे साथ। अगर आपको देवभूमि की यह दिव्य प्रस्तुति पसंद आई हो, तो कमेंट में ‘जय मां नंदा’ जरूर लिखें।