देहरादून से हरिद्वार तक, उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं! नार्को टेस्ट की कोर्ट पेशी से ठीक पहले गिरफ्तारी क्यों? 2025 में जिस मामले में कार्रवाई पर सवाल उठे, उसी में 2026 में अचानक इतनी तेजी कैसे आ गई? क्या यह महज कानूनी कार्रवाई है या इसके पीछे कोई और कहानी भी है? और अंकिता केस के कथित VIP को लेकर कांग्रेस के दावों में कितना दम है? आज करेंगे गिरफ्तारी की पूरी क्रोनोलॉजी का विश्लेषण! दोस्तो अंकिता भंडारी हत्याकांड में इंसाफ की लड़ाई लड़ रही देवभूमि की जनता आज स्तब्ध है, और देश पूछ रहा है—ऐसे कैसे अंकिता को मिलेगा न्याय? दोस्तो कथित ‘VIP’ का नाम उछालने वाली अभिनेत्री उर्मिला सनावर को जिस बिजली की फुर्ती से आधी रात को गिरफ्तार कर हरिद्वार जेल भेजा गया, उस पर अब देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है! कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने सीधा और तीखा हमला बोलते हुए पूछा है कि आखिर नार्को टेस्ट और सीबीआई की बड़ी पेशी से ठीक एक रात पहले ही ये गिरफ्तारी क्यों हुई? क्या ये किसी बड़े रसूखदार वीआईपी को बचाने का सरकारी चक्रव्यूह है? दोस्तो कहानी बिल्कुल किसी मसाला फिल्म की तरह घूम रही है। वादी वही, आरोपी वही, और आरोप भी वही जो साल 2025 में लगे थे। तब पुलिस शांत बैठी रही, उर्मिला के खिलाफ कोर्ट से गैर-जमानती वारंट होने के बाद भी वो बाहर घूमती रहीं, लेकिन साल 2026 में नार्को टेस्ट की सहमति बनते ही रात को मुकदमा, सुबह गिरफ्तारी, शाम को मजिस्ट्रेट के सामने पेशी और रात को जेल! कांग्रेस ने साफ चुनौती दे दी है कि चाहे कितना भी सच छुपा लो, फरवरी के बाद वो वीआईपी भी सामने आएगा और दूध का दूध, पानी का पानी होगा! इसको कुछ ऐसे समझिए, दोस्तो हरिद्वार से लेकर देहरादून तक, इस वक्त उत्तराखंड की फिजाओं में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई? 23 अक्टूबर को देहरादून की सीबीआई अदालत में उर्मिला सनावर और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर नार्को टेस्ट के लिए रजामंदी दे चुके थे।
उर्मिला ने लाइव कैमरे पर टेस्ट कराने की मांग की थी। 26 अक्टूबर को इस कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ना था। लेकिन ठीक एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने इसी टाइमिंग को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। दोस्तो इस पूरे मामले का सबसे घुमावदार मोड़ यह है कि जिस दीपिका राठौर की शिकायत पर उर्मिला को गिरफ्तार किया गया है, ठीक ऐसा ही एक मुकदमा उन्होंने साल 2025 में भी दर्ज कराया था। तब पुलिस महीनों सुस्त रही, उर्मिला के खिलाफ एनबीडब्ल्यू (NBW) होने के बावजूद कोई एक्शन नहीं हुआ। लेकिन 2026 में जैसे ही ‘VIP’ के नाम पर नार्को टेस्ट की बात आई, पुलिस सुपरफास्ट मोड में आ गई। 5 करोड़ की रंगदारी का यह मामला और देहरादून के डालनवाला थाने में दर्ज एक और नया मुकदमा, क्या सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई है या इसके पीछे का खौफ कुछ और है दोस्तो कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि शुरुआत से ही इस पूरे केस में सबूतों को मिटाने और सच को दबाने की कोशिश की गई, चाहे वो वनंत्रा रिजॉर्ट पर रातों-रात बुलडोजर चलाना हो या फिर संदिग्धों को बचाना हो। आलोक शर्मा ने हमला बोलते हुए कहा कि संदिग्ध वीआईपी को संवैधानिक पद मिलने के बाद से मामला और ज्यादा गहरा गया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि नार्को टेस्ट होने पर कई बड़े सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब हो जाते, इसी डर से यह पूरा खेल रचा गया है। दोस्तो कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि उर्मिला सनावर को जेल भेजकर अंकिता को न्याय दिलाने के आंदोलन को दबाया नहीं जा सकता। पार्टी सड़कों से लेकर संसद तक इस आवाज को बुलंद रखेगी। आलोक शर्मा ने भाजपा और धामी सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि यह डर ज्यादा दिनों का नहीं है, फरवरी के बाद उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन होते ही वीआईपी का नाम पूरी दुनिया के सामने होगा। दोस्तो 5 करोड़ की रंगदारी और ब्लैकमेलिंग के आरोपों पर कानून अपनी कार्रवाई कर रहा है और उसकी निष्पक्षता कोर्ट तय करेगी। लेकिन कांग्रेस के इन तीखे हमलों और गिरफ्तारी की क्रोनोलॉजी ने जनता के मन में यह सवाल गहरा कर दिया है कि आखिर उर्मिला के नार्को टेस्ट से किसका कलेजा कांप रहा था? क्या फरवरी में सरकार बदलने के बाद वाकई उस बहुचर्चित ‘VIP’ का नाम सामने आएगा या फिर यह कानूनी और राजनीतिक नूराकुश्ती ऐसे ही चलती रहेगी? सवाल बड़े हैं और देवभूमि की बेटी अंकिता आज भी मुकम्मल न्याय का इंतजार कर रही है।