अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के जरिए एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने इस रैली में देश भर से करीब 10 लाख लोगों की भारी भीड़ जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस मेगा रैली का मुख्य उद्देश्य हालिया मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं, ‘वोट चोरी’ और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरना है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी शामिल है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा सहित विभिन्न राज्यों से कार्यकर्ताओं को लाने के लिए सैकड़ों बसों की व्यवस्था की गई है, और राहुल गांधी के नेतृत्व में यह मार्च संसद भवन या चुनाव आयोग के कार्यालय की तरफ कूच कर सकता है।
हालांकि, कांग्रेस के इस 10 लाख की भीड़ जुटाने के दावे पर राजनीतिक गलियारों और विश्लेषकों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। जानकारों का कहना है कि रामलीला मैदान की कुल व्यावहारिक क्षमता इतनी विशाल भीड़ को एक साथ समाहित करने की नहीं है, जिससे इस तकनीकी आंकड़े पर संशय खड़ा होता है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी खेमे का मानना है कि वास्तविक संख्या चाहे जो भी हो, यह आयोजन पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश फूंकने और आगामी चुनावों से पहले जनता के बीच एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का जरिया बनेगा। रविवार को होने वाले इस प्रदर्शन में जुटने वाली वास्तविक भीड़ और विपक्ष के इस आक्रामक रुख पर अब देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।