दोस्तो बड़ी खबर अंकिता केस में हंगामे के बाद सरकार ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी लेकिन इस जांच से पहले ही उठने लगे कई सवाल जहां विपक्षी दल इस जांच को लेकर सरकार को घेरने में लगा है तो उधर उत्तराखंड महिला मंच ने भी इस जांच पर मोर्चाबंदी को खत्म नहीं किया। Ankita Bhandari Murder Case ऐसे में सवाल ये कि कैसे इस पूरे मामले में सवालों का शोर था वो थमेगा। क्या जांच से वीआईपी के नाम से पर्दा हटेगा या फिर वैसा ही कुछ देखने को मिलेगा। जैसा एसआईटी जांच में देखने को मिला था। जी हां दोस्तो अंकिता भंडारी प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीबीआई जाँच की संस्तुति करने का काम किया हैँ, लेकिन इसके बाद भी विपक्ष और अन्य लोग संतुष्ट नज़र नहीं आ रहे। जहाँ विपक्ष ने सिटिंग जज की निगरानी में जाँच की मांग की हैँ. वहीँ सड़कों पर उतरकर आंदोलन कर रहे समाजसेवियों ने भी सरकार से सिटिंग जज की निगरानी में अंकिता मामले की जाँच की मांग की हैँ साथ ही 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद की रुपरेखा भी तैयार करने की बात कही हैँ लेकिन शनिवार का मशाल जुलूस जारी रहेगा तो एक तरफ दोस्तो महिला मंच का आक्रोश बरकरार है तो उधर प्रदर्शनकारी लोगों ने साफ कर दिया कि अभी शंकाये बरकरार है।
दोस्तो उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में संलिप्त वीआईपी और इससे संबंधित साक्ष्य मिटाने वाले लोगों का पता लगाने की लिए सीबीआई की जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की निगरानी में कराए जाने के लिए पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा समय से राज्य भर में चल रहे आंदोलन का यह असर ही की अंकिता भंडारी को न्याय दिलवाने की दिशा में आज राज्य की सरकार को सीबीआई जांच कराए जाने के लिए केंद्र सरकार को संस्तुति भेजनी पड़ी यह बात उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रदेश सरकार की संस्तुति पर प्रतिक्रिया देते हुए कही। उन्होंने कहा कि यह अंकिता भंडारी की आत्मा को न्याय दिलाने की लड़ाई का पहला कदम है अभी केंद्र का राज्य की संस्तुति स्वीकार करना व सीबीआई जांच न्यायिक देख रेख में करने का आदेश देना असली लड़ाई की सफलता और अंकिता को न्याय की उम्मीद तभी सार्थक होगी अन्यथा सीबीआई पर आज देश में किसी को भरोसा नहीं है इसलिए कांग्रेस पार्टी सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट जज की निगरानी में कराए जाने के आदेश होने तक अपना आंदोलन जारी रखेगी।
इतना ही नहीं कांग्रेस की महिल विंग लगाता इस मामले को लेकर प्रदर्शन कर रीह है ऐसे में कांग्रेस मुख्य प्रवक्ता Garima Mehra Dasauni का आया बयान कहा CBI की जाँच सिटिंग जज की देखरेख में हो उनके अनुसार अभी मांग आधी पूरी हुई हैं जब तक मांग पूरी नहीं होती सघर्ष जारी रहेगा। तो कुल मिलाकर सीबीआई जांच की संस्तुति को जहां सरकार न्याय की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष, समाजसेवी संगठन और महिला मंच इसे अभी अधूरा कदम मान रहे हैं। सिटिंग जज की निगरानी में जांच की मांग को लेकर सड़कों पर आक्रोश बरकरार है, मशाल जुलूस जारी हैं और 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का ऐलान भी किया जा चुका है। विपक्ष का साफ कहना है कि जब तक जांच सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट की न्यायिक देखरेख में नहीं होती, तब तक न तो भरोसा बनेगा और न ही आंदोलन थमेगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के फैसले और सीबीआई जांच की रूपरेखा पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि अंकिता भंडारी को न्याय की यह लड़ाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।