Dehradun विशेष सत्र से पहले सड़क पर बड़ा घमासान! | Congress | BJP | CM Dhami | Uttarakhand News

Spread the love

दोस्तो उत्तराखंड की सियासी हवा बदल रही है, तपती धूप में उत्तराखंड की सियासती गर्मी का मीटर भी हाई है। रिकार्ड तोड़ गर्मी और सियासत, महिला आरक्षण को लेकर सड़क पर माहौल तनावपूर्ण है और आशंका इस बात की आने वाले एक दिन के विशेष सत्र में ये ही हाल रहेगा। एक प्रदर्शन सिर्फ एक मांग है या फिर इसके पीछे छिपा है कोई बड़ा सियासी संदेश? उत्तराखंड विधानसभा के बाहर कांग्रेस के विरोध ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या सरकार इस दबाव के आगे झुकेगी? क्या महिला आरक्षण का मुद्दा अब चुनावी रंग ले चुका है?और सबसे अहम सवाल—28 अप्रैल के विशेष सत्र से पहले उठी ये सियासी आग, क्या विधानसभा के अंदर भी अपनी गर्मी दिखाएगी? बताउंगा आपको पूरी खबर अपनी इस रिपोर्ट में। दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में महिला आरक्षण को लेकर माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। विधानसभा के विशेष सत्र से ठीक पहले सड़क पर जो नज़ारा दिखा, उसने राजनीतिक पारा और बढ़ा दिया है।उत्तराखंड विधानसभा के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला, जहां महिला आरक्षण को लेकर सरकार पर तीखे सवाल उठाए गए।अब सवाल ये है कि क्या यह आंदोलन आने वाले चुनावी समीकरणों को बदलने की ताकत रखता है? और क्या विशेष सत्र से पहले उठी ये राजनीतिक आग, सदन के अंदर भी बड़ा असर दिखाएगी?सड़क से लेकर सदन तक सियासी संग्राम तेज है, और हर किसी की नजर अब 28 अप्रैल के विशेष सत्र पर टिकी है। उत्तराखंड की सियासत में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घमासान देखने को मिल रहा है।

उत्तराखंड विधानसभा के बाहर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने की मांग उठाई–प्रदर्शन कर रहे कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राज्य में महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है और सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं है। वहीं कांग्रेस ने सरकार पर महिलाओं के उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने अपनी बात रखी और सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए। महिला आरक्षण लागू करना अब केवल मांग नहीं, बल्कि अधिकार की लड़ाई है।. पूर्व मुख्यमंत्री ने क्या कहा वो भी दिखा रहा हूं। दोस्तो कांग्रेसीयों का ये भी कना है कि सरकार इस मुद्दे को लगातार नजरअंदाज कर रही है, जो चिंताजनक है। दोस्तो कांग्रेस का रुख साफ है कि एक दिन के विशेष सत्र बीजेपी की सरकार के लिए इतना आसान नहीं होने वाला लेकिन बीजेपी का क्या कहना है कांग्रेस के इस हल्ले पर पर वो भी। दोस्तो ये उत्तराखंड की सियासत की एक नई जंग है ऐसा लग रहा है। तमाम दूसरे मुद्दे गायब दिखाई दे रहे हैं लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 28 अप्रैल को होने वाले विशेष सत्र में यह मुद्दा कोई ठोस दिशा पकड़ पाएगा? क्या सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव सदन के भीतर भी देखने को मिलेगा? या फिर यह मामला केवल सियासी बयानबाज़ी तक ही सीमित रह जाएगा?