दोस्तों, अगर ₹16 करोड़ खर्च हों, काम पूरा होने में एक साल लगे और पहली बड़ी बारिश के कुछ ही दिनों बाद सड़क धंस जाए। तो सबसे बड़ा सवाल क्या होगा? क्या यह सिर्फ बारिश का असर है या फिर निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं? देहरादून के प्रेमनगर स्थित नंदा की चौकी का मामला अब सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि जनता के पैसे, जवाबदेही और सिस्टम पर उठते सवालों का बन गया है। कैसे होने लगी 16 करोड़ के काम की सिर्फ 16 दिन में चर्चा। दोस्तो हाल में पेपर लीक को खूब शोर हुआ, कहा गया कि बड़ा भष्टाचार है। आज देहरादून की इस तस्वीर को देखकर लगा की भ्रष्टाचार सिर्फ पेपर ही लीक नहीं कराता है। बल्की सड़कों में इतने बड़े-बड़े गड्ढे कर देता है। दोस्तो ये हाल देहरादून के नंदा की चौकी में हाल ही में तैयार हुए करीब ₹16 करोड़ की लागत वाले पुल प्रोजेक्ट के पास एप्रोच रोड भारी बारिश के बाद धंस गई। घटना के बाद मौके पर जिला प्रशासन पहुंचा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने निरीक्षण कर मरम्मत के निर्देश दिए और निर्माण गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए कार्रवाई के निर्देश भी दिए, हालांकि प्रशासन का कहना है कि पुल का मुख्य ढांचा सुरक्षित है, जबकि नुकसान एप्रोच रोड को हुआ है। इसके बावजूद इतने कम समय में सड़क के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं और अब हर किसी की नजर जांच के नतीजों पर टिकी है। लेकिन मै आपको दिखा रहा हूं क्या कहते हैं देहारादून के डीए।
दोस्तो अब डीएम साहब जो जांच करा लें लेकिन इस घटना ने सवाल तो खड़े कर ही दिए। क्योंकि प्रेमनगर-नंदा की चौकी के पास नेशनल हाईवे पर स्थित यह पुल महज 16 दिन पहले ही जनता के लिए खोला गया था. पुल के ऊपर एक बड़ा जानलेवा गड्ढा बन गया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि एप्रोच रोड पर गड्ढा हुआ है। वहीं डीएम ने कहा कि दोषी अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हालांकी दोस्तो कुछ लोगों ने ये कहा शुरुआती दौर में की पुल टूट गया। पुलिया क्षतिग्रस्त होने या टूटने की चल रही खबरों को गढ़वाल आयुक्त आनंद स्वरुप ने पूरी तरह से निराधार बताया है। दोस्तों, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ एक गड्ढे का नहीं है। सवाल जनता के उस भरोसे का है, जो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पहली ही बड़ी बारिश में डगमगा जाता है। प्रशासन का कहना है कि पुल पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान सिर्फ एप्रोच रोड को हुआ है। अब जांच के बाद अगर कहीं निर्माण में लापरवाही या गुणवत्ता में कमी मिलती है, तो यह देखना अहम होगा कि क्या वास्तव में जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है, या फिर हर बार की तरह यह मामला भी फाइलों में सिमटकर रह जाएगा। फिलहाल मरम्मत का काम शुरू हो चुका है, लेकिन जनता अब सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि जवाब भी चाहती है। आखिर ₹16 करोड़ के प्रोजेक्ट की पहली बड़ी परीक्षा में ऐसी स्थिति क्यों बनी? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा।आप इस पूरे मामले पर क्या सोचते हैं? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।