दोस्तो, उत्तराखंड BJP में आज ऐसा क्या हुआ कि अपनों ने ही अपनी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया?कैबिनेट मंत्री के बंगले पर पहुंचे BJP नेता, जमकर नारेबाजी और धरना—आखिर मामला इतना क्यों बिगड़ा?आरोप है कि योजनाओं की ‘रेवड़ी’ विपक्षी कार्यकर्ताओं को बांटी जा रही है और अपने ही कार्यकर्ताओं को ठेंगा दिखाया जा रहा है!तो क्या ये सिर्फ नाराजगी है या 2027 से पहले BJP के भीतर उठता बड़ा सियासी तूफान? दोस्तो राजनीति में आपने विपक्ष को सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरते, नारेबाज़ी करते और पुतले फूंकते रोज़ देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा देखा है कि सत्ताधारी दल के ही कद्दावर नेता, पूर्व राज्यमंत्री और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अपने ही कैबिनेट मंत्री के सरकारी बंगले के बाहर धरने पर बैठ जाएं और अपनी ही सरकार के खिलाफ ज़ोरदार नारेबाज़ी शुरू कर दें? जी हां, उत्तराखंड की सियासत में इस वक्त एक ऐसा ही ज़बरदस्त भूचाल आया है। कैबिनेट मंत्री खजान दास के सरकारी आवास के बाहर चकराता विधानसभा क्षेत्र से आए बीजेपी नेताओं ने वो गदर मचाया है कि त्रिवेंद्र-धामी राज के सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। अपनी ही सरकार पर विपक्षियों को फायदा पहुंचाने और अपनों की अनदेखी का ऐसा संगीन आरोप लगा है कि सरकार असहज हो चुकी है। आखिर चकराता के इन दिग्गजों का गुस्सा सातवें आसमान पर क्यों है।
दोस्तो इसे कहते हैं घर को आग लग गई घर के ही चिराग से! उत्तराखंड बीजेपी में जो अंतर्कलह अब तक बंद कमरों में सुलग रही थी, वो अब कैबिनेट मंत्री खजान दास के सरकारी आवास के वीआईपी कॉरिडोर में ज्वालामुखी बनकर फट चुकी है। चकराता विधानसभा क्षेत्र से देहरादून पहुंचे बीजेपी के दिग्गज नेताओं और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मंत्री जी के बंगले का घेराव करते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंज़र ऐसा है कि देखने वाले भी हैरान हैं कि नारेबाज़ी करने वाले कोई कांग्रेसी नहीं, बल्कि खुद बीजेपी का झंडा बुलंद करने वाले सिपाही हैं। आरोप इतना संगीन है कि सरकार के बड़े-बड़े रणनीतिकारों के पसीने छूट रहे हैं। चकराता से आए इन बीजेपी नेताओं का खुला आरोप है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के हक पर डाका डाला जा रहा है। सरकार की जिन जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बीजेपी के समर्पित कार्यकर्ताओं और गरीब तबके को मिलना चाहिए था, उन योजनाओं की मलाई चकराता क्षेत्र में विपक्षी कार्यकर्ताओं को बांटी जा रही है। अपनों को दरकिनार कर विरोधियों पर मेहरबानी के इस सनसनीखेज आरोप ने पूरी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दोस्तो मधु चौहान के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि चकराता बीजेपी इस बार आर-पार के मूड में है। इस धरने प्रदर्शन के चलते देहरादून के सियासी गलियारों में हड़कंप मचा है और सरकार पूरी तरह असहज नज़र आ रही है। डैमेज कंट्रोल के लिए दूत भेजे जा रहे हैं, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।
पूर्व राज्यमंत्री प्रताप रावत ने तो साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि यह लड़ाई किसी समझौते से शांत नहीं होने वाली। दोस्तो बीजेपी के इन बाग़ी तेवरों ने विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक बड़ा हथियार दे दिया है। जब सत्ताधारी दल के नेता ही अपनी सरकार पर भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगाने लगें, तो जवाब देते नहीं बनता। चकराता के इन नेताओं का स्पष्ट स्टैंड है—या तो मौजूदा सूची को अभी के अभी होल्ड पर डालो, या फिर इस सियासी संग्राम को झेलने के लिए तैयार रहो। अब देखना यह होगा कि कैबिनेट मंत्री खजान दास और संगठन के बड़े नेता अपनों के इस चक्रव्यूह से सरकार को कैसे बाहर निकालते हैं, या फिर चकराता की यह चिंगारी पूरी सूबे की बीजेपी सियासत में आग लगा देगी, आप क्या कहेंगे इस हंगामे पर।