जी हां दोस्तो बड़ी हैरानी होती है, जब उत्तराकंड में एक बड़ा विवाद चल रहा हो और उत्तराखंड के बोर्डर पर तैनात अपनी मित्र पुलिस मित्रा निभा रही हो वो उन लोगों के साथ जिन्हों ने हाल में उत्तराकंड में खूब उत्पाद ही नहीं मचाया बल्ली सुरक्षा की नजर बड़ी चुनौती पेस की Uttarakhand Nihang Uprising लेकिन हुआ क्या कहने को तो उत्तराखंड के बोर्डर सील थे, लेकिन पुलिस की सुरक्षा दीवार इतनी कमजोर निकली की निंहंग। बैरियरिय तोड़ पहुंच गए देहरादून मै आपको पूरी खबर ताने जा रहा हैं कैसे देहरादून में निहंगों के घुसने से मची खलबली और फिर प्रशासन ने क्या हठाए कदम। दोस्तो देहरादून की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती, बैरिकेड्स टूटे, पुलिस अलर्ट पर रही और कई निहंग पुलिस को चकमा देकर शहर के भीतर रेसकोर्स गुरुद्वारे तक पहुंच गए। देर रात चले इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी में हलचल मचा दी। पुलिस और प्रशासन ने पूरे शहर में नाकेबंदी की, जबकि वरिष्ठ अधिकारी खुद मोर्चे पर डटे रहे। करीब दो घंटे तक चली तलाश और बातचीत के बाद मामला शांत हुआ और निहंग जत्था वार्ता के बाद पांवटा साहिब लौट गया। आखिर बैरिकेड्स कैसे टूटे? पुलिस को कैसे चकमा मिला? और देर रात राजधानी में क्या-क्या हुआ? दोस्तो कुछ तस्वीरे आपको दिखाना चाहता हूं। दोस्तो इस डराने वाली और तनाव को पैदा करने वाली तस्वीर के बाद अच्छी खबर ये है कि पंजाब से बड़ी संख्या में उत्तराखंड कूच को पहुंचे निहंग वापस लौटने को मान गए हैं। पुलिस और प्रशासन के साथ गुरुवार सुबह से देर रात तक चली वार्ता का सार्थक परिणाम निकला। इस दौरान रात को कुछ निहंग पांवटा साहिब में बैरिकेड हटाकर देहरादून में घुस गए गए थे. पुलिस ने उन्हें ढूंढकर वापस भेजा।
दोस्तो मै आपको बता दूं कि अपने कार्यक्रम के तहत निहंग जत्थों ने गुरुवार को पंजाब से श्री हेमकुंड साहिब के लिए कूच किया। पुलिस ने पांवटा साहिब में बैरिकेट्स लगाकर नाकेबंदी कर दी। निहांगों ने कृपाण दिखाकर बैरिकेट्स हटा दिए और देहरादून की तरफ भाग गए। इसके बाद निहंग देहरादून पहुंचे ओर जिनके साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा बातचीत की गई। दोस्तो ये सब उस घटना के बाद का रिएक्शन है जो उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित कर्णप्रयाग में निहंगों की स्थानीय लोगों के साथ मारपीट हुई थी। कई निहंगों ने तलवार से वार कर कुछ लोगों को घायल कर दिया था। इस प्रकरण के बाद पुलिस ने हमलावर निहंगों को गिरफ्तार किया था। इसी प्रकरण को लेकर निहंग उत्तराखंड कूच को निकले थे। दोस्तो देहरादून पुलिस को इनपुट मिले कि निहंग जत्था देहरादून आ सकता है। ऐसे में पुलिस ने देर रात प्रेमनगर को छावनी में तब्दील कर दिया था। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने खुद मोर्चा संभाला और सभी थानों की फोर्स को तैनात कर दिया गया। करीब 2 घंटे तक पुलिस निहंगों इंतजार करती रही लेकिन निहंग प्रेमनगर नहीं पहुंचे। दोस्तो किया: बताया जा रहा था कि निहंगों को फोर्स के बारे में सूचना मिल गई थी जिसके चलते उन्होंने वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल किया। निहंग पांवटा साहिब-देहरादून हाईवे से प्रेमनगर पहुंचे और प्रेमनगर से पहले ही गोरखपुर शिमला बाईपास होते हुए देहरादून में आ गए।
इसके बाद एसएसपी ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया और सभी थाना प्रभारी देर रात तक एक्टिव रहे, लेकिन दोस्तो अच्छी बात ये दिखाई दी है कि इस टकराव के बीच थाना नेहरू नगर क्षेत्र के अंतर्गत रेसकोर्स के गुरुद्वारे में सभी निहंग गए हैं। जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल समेत प्रशासन के अधिकारी गुरुद्वारे पहुंचे। गुरुद्वारे में निहंगों से कई घंटों की वार्ता हुई थी। वार्ता के बाद निहंगों को पांवटा साहिब भेजा गया: एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने बताया है कि, गुरुवार देर रात कुछ निहंग श्रद्धालु पांवटा साहिब और अन्य मार्गों से देहरादून पहुंचे, जो रेसकोर्स में स्थित गुरुद्वारे में पहुंचे, उनके साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा बातचीत की गई। बातचीत और विस्तृत वार्ता के बाद उन सभी को वापस पांवटा साहिब हिमाचल की तरफ भेजा गया है। प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी, देहरादून-तो फिलहाल वार्ता के बाद मामला शांत हो गया है और निहंग जत्था पांवटा साहिब लौट चुका है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। क्या उत्तराखंड की सीमा पर की गई सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी, जब बैरिकेड्स पार कर जत्था राजधानी तक पहुंच गया?अगर खुफिया इनपुट पहले से मौजूद थे, तो फिर पुलिस उन्हें सीमा पर ही रोकने में पूरी तरह सफल क्यों नहीं हो पाई?क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए सीमा सुरक्षा और बेहतर समन्वय की जरूरत है?और सबसे बड़ा सवाल क्या चमोली विवाद का समाधान केवल बातचीत से होगा, या कानून के दायरे में सभी पक्षों की चिंताओं का स्थायी हल भी निकाला जाएगा? फिलहाल राहत की बात यह है कि स्थिति शांतिपूर्ण तरीके से संभल गई और किसी बड़े टकराव की नौबत नहीं आई। लेकिन यह पूरा घटनाक्रम सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों पर कई अहम सवाल छोड़ गया है।