क्या उत्तराखंड में युवाओं का सब्र अब टूट चुका है?क्या 158 दिनों से चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन अब बड़े विस्फोट में बदलने जा रहा है? और आखिर क्यों नर्सिंग अभ्यर्थियों को अपनी मांगों के लिए पानी की टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन करना पड़ा? देहरादून के परेड ग्राउंड में उस वक्त हड़कंप मच गया। जब लंबे समय से भर्ती की मांग कर रहे नर्सिंग अभ्यर्थी उग्र हो गए, 158 दिन से धरना, 23 दिन से आमरण अनशन, लेकिन आरोप है कि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला..गुस्साए अभ्यर्थियों ने पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध प्रदर्शन किया और साफ चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। तो आखिर क्या हैं उनकी मांगें?और क्यों लगातार बढ़ता जा रहा है युवाओं का आक्रोश? आखिर दोस्तो अभियर्थिओं को इतना बड़ा कदम उठाने की जरूरत क्यों पड़ी, वो बताउंगा आपको। दोस्तो इस प्रदर्शन में जहां नर्शिंग अभियर्थियों की हो रही है। वहीं महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला की चर्चा जोरों पर हैं। जी हां दोस्तो देहरादून में पांच घंटे महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ी रहीं। वो नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथ वर्षवार भर्ती की मांग कर रही हैं। अब उनका समर्थन देने के लिए उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष बॉबी पंवार भी मौके पर पहुंचे हैं। बॉबी पंवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मामले में दखल देने की मांग की है।
अब दोस्तो मै आपको बताता हूं कि आखिर ये आंदोलन क्यों हो रहा है? इससे कुछ ऐसे समझिए। नर्सिंग अभ्यर्थी पिछले 158 दिनों से एकता विहार में लगातार धरना दे रहे हैं। उनका आरोप है कि 23 दिनों से जारी आमरण अनशन के बावजूद सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उसके बाद ये आक्रामक तस्वीर देखने को मिली है दोस्तो अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ भरोसा दिया जा रहा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। 100 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे आत्महत्या तक कर सकते हैं। उनका कहना है कि अगर हमारे पास रोजगार नहीं है, तो जीवन जीने का क्या फायदा। दोस्तो इस दौरान महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि 158 दिनों से बच्चे धरना दे रहे हैं और आज थक-हारकर पानी की टंकी पर चढ़ रहे हैं, तो उन्हें उनका समर्थन करना जरूरी लगा। रौतेला ने कहा कि सरकार इन 2000 नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांगों को अनसुना कर रही है। दोस्तो अब यहां मै आपको बताता हूं कि आखिर अभियर्थियों की मांग क्या है, जिससे सरकार सिस्टम नहीं मान रहा है इसिलिए ये हंगामा है। दोस्तो आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने, 2015-16 में पढ़ाई पूरी की, लेकिन अब एंट्रेंस क्लियर नहीं कर पा रहे हैं। सरकार के पास अभी 4 हजार से अधिक रिक्त पद हैं।
इसके अलावा दोस्तो अभ्यर्थियों का आरोप है कि मंत्री तो समर्थन कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई नहीं हो रही। दोस्तो इस दौरान एक बारगी तो आंदोलनकारियों के पानी की टंकी पर चढ़ने से परेड ग्राउंड क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर 12-15 पुलिसकर्मी पहुंचे और उन्हें नीचे उतारने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा दोस्तो नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल किशोर पुंडीर ने कहा कि अब वे केवल मौखिक भरोसे पर आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। जब तक सरकार लिखित रूप में ठोस निर्णय नहीं लेती, संघर्ष जारी रहेगा। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में हजारों नर्सिंग पद खाली हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। दोस्तो वैसे एक ओर महिलाओं के सम्मान और रोजगार की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में महिला अभ्यर्थी सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन मिलने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदेश में लगभग 3 हजार से अधिक नर्सिंग पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही, लेकिन मांगों पर तो थोड़ा गौर कीजिए। नर्सिंग अभ्यर्थियों की चार मांगें, वर्षवार भर्ती – भर्ती नियमावली को स्थायी रूप से वर्षवार लागू किया जाए, ताकि प्रक्रिया नियमित और पारदर्शी बनी रहे। पदों पर पुनः भर्ती – IPHS मानकों के अनुसार करीब 2000 पदों पर वर्षवार भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाए। जांच और न्याय – पिछली भर्तियों में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिले। लिखित आश्वासन – अभ्यर्थियों ने कहा कि वे अब केवल मौखिक वादों पर नहीं मानेंगे; सरकार से ठोस और लिखित कार्रवाई चाहिए। दोस्तो, सवाल सिर्फ नर्सिंग भर्ती का नहीं है सवाल उन हजारों युवाओं के भविष्य का है जिन्होंने सालों मेहनत करके डिग्री हासिल की, लेकिन नौकरी के इंतजार में आज सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। 158 दिन का धरना, 23 दिन का आमरण अनशन और अब पानी की टंकी पर चढ़कर विरोध ये तस्वीरें साफ बता रही हैं कि युवाओं का गुस्सा अब किस स्तर तक पहुंच चुका है। एक तरफ प्रदेश में हजारों नर्सिंग पद खाली होने की बात कही जा रही है। दूसरी तरफ अभ्यर्थी वर्षवार भर्ती और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बड़ा सवाल यही है कि आखिर सरकार इन मांगों पर कब तक फैसला लेगी?फिलहाल आंदोलनकारी साफ कह चुके हैं कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित निर्णय चाहिए।अब देखना होगा कि सरकार इस बढ़ते दबाव और उग्र होते आंदोलन के बीच क्या कदम उठाती है।फिलहाल इस खबर में इतना ही, आप इस पूरे मामले पर क्या सोचते हैं हमें कमेंट करके जरूर बताइए।