दोस्तो क्या उत्तराखंड बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? क्या चुनावी साल से पहले पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है? और सबसे बड़ा सवाल। क्या पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी का अपनी ही पार्टी के सांसद अनिल बलूनी पर तंज सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी है या फिर इसके जरिए दिल्ली नेतृत्व यानी मोदी-शाह को भी कोई बड़ा संदेश देने की कोशिश की गई है? बताउंगा आपको कैसे कोशियारी के तंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक मच गई खलबली। दोस्तो हाल में बीजेपी सब कुछ ठीक दिखाई देने के के बाद अचानक से ऐसा क्या हुआ कि बीजेपी के अंदर ही अलग तरह की बेचैनी दिखाई दे रही है, यहां तक की प्रदेश नेतृत्व से लेकर केनंद्रीय नेतृत्व भी परेशानी बढ़ी हुई दिखाई दे रही हैं। दोस्तो य़े इस लिए कहा जा रहा है क्योंकि दरअसल लंबे समय से शांत दिखाई दे रहे भगत दा के बयान ने उत्तराखंड की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक गलियारों में अब इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। कोई इसे क्षेत्रीय संतुलन की लड़ाई बता रहा है, तो कोई बीजेपी के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान का संकेत मान रहा है। आखिर क्यों भगत दा अचानक मुखर हुए और क्या बीजेपी के भीतर चुनाव से पहले सब कुछ सामान्य नहीं है। दोस्तो कहने को दो ये छोटा सा बयान है, लेकिन इसके मायने बड़े निकाले जा रहे हैं। शायद एक दो बार सुनने में आपको समझ भी ना आए लेकिन जो बोल रहे हैं उससे ये बात साफ हो रही है कि आने वाले वक्त में कुछ तो बीजेपी के अंदर घटने वाला है या फिर ये सवाल क्या जा सकता है ये बयान आखिर दिया क्यों है।
दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में चुनावी साल से पहले हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी ही पार्टी के सांसद पर तंज कसकर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। बीजेपी में सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच अब अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चा खुलकर सामने आने लगी है। माना जा रहा है कि चुनाव नजदीक आते ही पार्टी के भीतर दबे हुए मतभेद भी सतह पर आने लगे हैं।आखिर भगत दा के बयान के क्या मायने है और क्या बीजेपी के भीतर गुटबाजी अब खुलकर सामने आ रही है ये लोग पूछ रहे हैं दोस्तो वैसे दोस्तो कोशियारी का सियासी इतिहास इस बात को भली भाती बताता हूं कि कोशियारी ने जब जो चाहा वो हुआ, जिससे निपटाना चाहा उसको निपटा भी दिया। दोस्तो थोड़ा याद दिलाता हूं आपको, जब उत्तराखंड बना ही था। प्रदेश की अंतिरिम सरकार बन रही थी एक तऱफ नित्यानंद स्वामी प्रदेश के पहली अंतरिम सरकार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले रहे थे। वहीं दूसरी कोशियारी की नाराजगी। इस कदर थी कि वो भी एक शपथ ले रहे थे कि नित्यानंद स्वामी को निपटाना है। हुआ भी कुछ वैसे, नित्यानंद स्वामी अपना काम ठीक से करते उससे पहले ही खबर चुकी थी कि अब प्रदेश के नए मुख्यमंत्री भगत सिंह सिंह कोशियारी होंगे। दोस्तो इसलिए कोशियारी की सियासी रणनीति को बीजेपी वाले और बीजेपी का केन्द्रीय नेतृत्व हल्के में कभी लेता ही नहीं है। इसकी का नतीजा है कि कोशियारी के इस नए बयान को कई चश्मों से देखा जा रहा है।
खैर आगे बात करुंगा लेकिन दोस्तो यहां उत्तराखंड भाजपा में एक बार फिर क्षेत्रीय संतुलन और अंदरूनी राजनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी द्वारा सार्वजनिक मंच से गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी पर की गई टिप्पणी को राजनीतिक गलियारों में बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। लंबे समय से शांत दिखाई दे रहे कोश्यारी का अचानक मुखर होना केवल एक सामान्य बयान नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा के भीतर भविष्य के नेतृत्व और क्षेत्रीय समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। दोस्तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसद बनने के बाद अनिल बलूनी ने गढ़वाल क्षेत्र, विशेषकर पौड़ी में विकास कार्यों, संगठनात्मक सक्रियता और जनसंपर्क के जरिए मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई है। ऐसे में उनके खिलाफ लगातार सार्वजनिक बयानबाजी को कुछ लोग गढ़वाल के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। वैसे भी दोस्तो उत्तराखंड की राजनीति में गढ़वाल और कुमाऊँ का संतुलन हमेशा संवेदनशील विषय रहा है। इससे पहले भी नेतृत्व को लेकर कई बार क्षेत्रीय खींचतान सामने आ चुकी है। राजनीतिक जानकारों को याद है कि भुवन चंद्र खंडूरी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान भी कोश्यारी खुलकर आक्रामक रुख में नजर आए थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा नेतृत्व इन बयानों को केवल व्यक्तिगत मतभेद मानेगा या फिर संगठन के भीतर उभर रहे बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में गंभीरता से लेगा।