जी हां दोस्तो दिल्ली के फरमान से हरदा के तेवर पड़ गए नरम, उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही सियासी तनातनी के बीच दिल्ली दरबार का फरमान आया और ‘महाक्षत्रप’ हरीश रावत के तेवर अचानक नरम पड़ गए!जिस यात्रा को लेकर शक्ति प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आ रही थीं, वही 9 धन्यवाद यात्राएं अब स्थगित—आखिर हाईकमान की डांट के बाद ऐसा क्या हुआ कि हरीश रावत को सफाई और माफी तक मांगनी पड़ी?58 साल की सियासी वफादारी के बावजूद अगर दिल्ली से संदेश आते ही फैसले बदलने पड़ें, तो क्या उत्तराखंड कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है?2027 के महा-मुकाबले से पहले सवाल बड़ा है—गुटबाज़ी की ये आग कांग्रेस के चुनावी समीकरणों को कितना नुकसान पहुंचाएगी? दोस्तो राजनीति में जब ‘स्वाभिमान’ और ‘अनुशासन’ की तलवारें आपस में टकराती हैं, तो बड़े से बड़ा सूरमा भी बैकफुट पर आ जाता है। उत्तराखंड की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है— दिग्गज कांग्रेसी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के तेवर आखिरकार नरम पड़ गए हैं! पार्टी आलाकमान की भारी नाराजगी और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की खुली आपत्ति को दरकिनार कर अपनी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ निकालने वाले हरीश रावत को दिल्ली ने ऐसा हंटर मारा कि उन्होंने अपनी होने वाली 9 और धन्यवाद यात्राओं को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है कांग्रेस के भीतर मचे इस घमासान के क्या मायने हैं? आखिर हरीश रावत को अपने कार्यकर्ताओं से क्यों माफी मांगनी पड़ी? और इस पूरे बखेड़े का साल 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव पर क्या असर पड़ेगा? दोस्तो उत्तराखंड कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई अब चौराहे पर आ चुकी है! जो हरीश रावत दो दिन पहले तक आलाकमान के आदेशों को हवा में उड़ाते हुए जसपुर से हल्द्वानी तक अपनी समानांतर यात्रा निकाल रहे थे आज उन्हीं हरीश रावत को दिल्ली दरबार में अपनी वफादारी का सर्टिफिकेट देने के लिए हाजिरी लगानी पड़ रही है।
कांग्रेस आलाकमान की सख्ती के बाद रावत के तेवर पूरी तरह ढीले हो चुके हैं TV9 Hindi। सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखकर उन्होंने अपनी प्रस्तावित 9 धन्यवाद यात्राओं को रद्द करने का एलान कर दिया है और आयोजकों से दर्द पहुंचने के लिए माफी मांगी है। इसे समझिए ऐसे, दिग्गज का सरेंडर? क्या था विवाद संगठन (PCC) को बिना बताए हरीश रावत ने खुद की ‘धन्यवाद यात्रा’ शुरू कर दी थी। दिग्गज का सरेंडर? आलाकमान का एक्शन, प्रभारी कुमारी शैलजा ने पत्र लिखकर यात्रा रोकने को कहा The Print, केसी वेणुगोपाल ने दिल्ली तलब किया। दिग्गज का सरेंडर? झुकना पड़ा, रावत ने अपनी 58 साल की वफादारी की दुहाई दी लेकिन यात्रा रोक दी। दोस्तो हरीश रावत का यह अंदाज़ उत्तराखंड के सियासी पंडितों को हैरान कर रहा है। रावत राजनीति के वो मंझे हुए खिलाड़ी हैं जो दबाव की राजनीति के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में जब उनके करीबी पूर्व ओएसडी पर केंद्रीय एजेंसियों (ED) का शिकंजा कसा, तो रावत ने आक्रामक रुख अपनाते हुए अपने संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश तक कर दी थी उन्होंने इस धन्यवाद यात्रा को ईडी और भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई से जोड़ा था । लेकिन जब खुद की पार्टी के आलाकमान ने ही उनके पर कतरने शुरू किए, तो उनके तेवर ठंडे पड़ गए। रावत का यह कहना कि “पार्टी ने पहले कभी मुझसे जवाब-तलब नहीं किया, बहुत हुआ तो यूं ही पूछ लिया”।
दोस्तो साफ दिखाता है कि अंदर ही अंदर वह इस तौहीन से कितने आहत हैं। दोस्तो इस घमासान का कांग्रेस पार्टी पर बहुत गहरा और विनाशकारी असर पड़ सकता है। उत्तराखंड कांग्रेस पहले से ही गुटबाज़ी की शिकार है। एक तरफ करण महारा, प्रीतम सिंह और यशपाल आर्य जैसे नेता हैं तो दूसरी तरफ अकेले हरीश रावत अपना कुनबा बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जब एक सीनियर लीडर को इस तरह सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी की गाइडलाइंस के आगे सरेंडर करना पड़ता है, तो जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। सोशल मीडिया पर समर्थकों का गुस्सा उबल रहा है, जो कह रहे हैं कि हाईकमान राज्य के सबसे बड़े जननेता का अपमान कर रहा है दोस्तो यहां सबसे बड़ा सवाल आगामी 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का है। अभी कुछ दिनों पहले किच्छा नगर पालिका चुनाव में बीजेपी को बड़ी शिकस्त देकर कांग्रेस जो माइलेज बटोर रही थी, इस अंदरूनी कलह ने उस पर पानी फेर दिया है। जब सेनापति ही आपस में लड़ेंगे और उनके पंख कतरे जाएंगे, तो बीजेपी के अभेद्य किले को कांग्रेस कैसे ढहाएगी? अगर हरीश रावत जैसे बड़े चेहरे को घर बिठा दिया गया या उनके कार्यक्रमों को इसी तरह रोका गया, तो कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी का ख्वाब महज़ एक सपना बनकर रह जाएगा “मैंने 9 और “”धन्यवाद यात्राएं”” प्लान की थी, जिनके आयोजन के लिए …”)। इस कलह का सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा जो पहले से ही रावत की राजनीतिक विदाई की बातें कर रही है दोस्तो हरीश रावत ने फिलहाल ‘प्रतीक्षा’ करने का फैसला किया है लेकिन शांत समंदर के नीचे हमेशा एक बड़ा तूफान छिपा होता है। क्या रावत का यह सरेंडर सिर्फ कुछ समय के लिए है, या फिर यह उत्तराखंड की राजनीति में किसी बड़े भूचाल की आहट है? दोस्तो दिल्ली में कुमारी शैलजा और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात के बाद हरीश रावत का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरे उत्तराखंड की नजरें टिकी । क्या कांग्रेस आगामी चुनाव से पहले एकजुट हो पाएगी या बिखर जाएगी, यह वक्त बताएगा।