दोस्तों, उधमसिंह नगर में BJP के दिग्गजों का पूरा लाव-लश्कर मैदान में था। विधायक, मंत्री, मेयर और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री—सबने ताकत झोंक दी! लेकिन नतीजा आया तो किच्छा और सिरौली कला में BJP का सूपड़ा साफ!जिस तिलकराज बेहड़ को थप्पड़ कांड के बाद कमजोर समझा जा रहा था, वही बेहड़ अकेले पूरी BJP की फौज पर भारी पड़ गए! 6077 वोटों की करारी शिकस्त ने सवाल खड़ा कर दिया है—क्या ये 2027 के महा-मुकाबले से पहले BJP के लिए बड़ा अलार्म है? दोस्तो राजनीति में जब जनता करवट बदलती है, तो सत्ता के सिंहासन हिल जाते हैं। उत्तराखंड से एक ऐसी ही बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है! जिस चुनाव को लेकर महीनों से भारी बवाल मचा हुआ था, जहाँ कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई लड़ी गई, वहाँ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी को एक ऐसा ज़बरदस्त झटका लगा है, जिसकी गूंज शायद साल 2027 के महा-मुकाबले यानी विधानसभा चुनाव तक सुनाई देगी! दोस्तो उत्तराखंड की सियासीत को वो रोना धोना आपने खूब देखा होगा, जो खूब चर्चा में रहा। दोस्तो उधम सिंह नगर की सबसे हॉट सीट, किच्छा नगर पालिका चुनाव का रिजल्ट आ चुका है और नतीजे ऐसे हैं कि बीजेपी के बड़े-बड़े रणनीतिकार चारों खाने चित हो चुके हैं।
कांग्रेस के प्रत्याशी राजेश प्रताप सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के संदीप अरोड़ा सोनू को एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 6,077 वोटों के भारी-भरकम अंतर से धूल चटा दी है! क्या यह सिर्फ एक स्थानीय निकाय की हार है, या फिर देवभूमि उत्तराखंड का पॉलिटिकल मूड अब पूरी तरह से बदलने लगा है, वो क्यों दोस्तो इस पर हरीश रावत का एक बयान भी खूब चर्चा में। दोस्तो उत्तराखंड की सियासत में ‘खेला’ हो चुका है! जिस किच्छा और सिरौली कलां को अलग-अलग करने और चुनाव टालने को लेकर महीनों से भारी बवाल का दौर चल रहा था, जहाँ डबल इंजन की सरकार ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी, उसी किच्छा की जनता ने सत्ता के अहंकार पर ऐसा करारा प्रहार किया है कि बीजेपी खेमे में सन्नाटा पसर गया है। चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड की जनता अब बदलाव का मन बना रही है। किच्छा नगर पालिका के रण में कांग्रेस ने वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद खुद बीजेपी ने सपने में भी नहीं की थी। विजेता: राजेश प्रताप सिंह (कांग्रेस) – 19,508 वोट, उपविजेता: संदीप अरोड़ा सोनू (BJP) – 13,431 वोट, जीत का महा-अंतर: 6,077 वोट! ये महज़ 6 हज़ार वोटों की हार नहीं है, ये बीजेपी के उस गढ़ में सेंधमारी है जहाँ पूर्व विधायक राजेश शुक्ला और पूरी बीजेपी मशीनरी दिन-रात पसीना बहा रही थी। लेकिन सामने खड़े थे कांग्रेस के कद्दावर नेता और विधायक तिलकराज बेहड़, जिन्होंने शुरुआती दौर से ही काउंटिंग के एक-एक राउंड में बीजेपी को पछाड़ना शुरू कर दिया। पहले राउंड से जो बढ़त कांग्रेस ने बनाई, वो आखिरी राउंड तक आते-आते एकतरफा महा-विजय में तब्दील हो गई। सिर्फ किच्छा ही नहीं, सिरौली कलां में भी कांग्रेस की राशिदा बेगम ने परचम लहराकर बीजेपी को साफ संदेश दे दिया है, लेकिन दोस्तो सवाल सिर्फ किच्छा का नहीं है।
सवाल पूरे उत्तराखंड का है। इस चुनाव को राजनीतिक पंडित आगामी 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मान रहे थे। बड़े चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी दल को उसके गृह क्षेत्र में इस तरह शिकस्त देना बताता है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) कितनी तगड़ी चल रही है। जनता बिजली, पानी, सड़क और स्थानीय निकायों के अधिकारों को लेकर जिस तरह सड़कों पर बवाल कर रही थी, उसका बदला उसने ईवीएम और मतपेटियों के जरिए ले लिया है। कांग्रेस इस जीत के बूते अब 2027 की दहलीज़ पर आक्रामक अंदाज़ में खड़ी हो गई है। दोस्तो बीजेपी के लिए यह हार एक अलार्म बेल है, एक ऐसी चेतावनी जिसे अगर देहरादून में बैठी सरकार ने समय रहते नहीं समझा, तो 2027 का किला बचाना नामुमकिन हो जाएगा। कांग्रेस ने किच्छा के रास्ते पूरे उत्तराखंड को यह मैसेज दे दिया है कि ‘पिक्चर अभी बाकी है’ दोस्तो किच्छा और सिरौली कलां के इन नतीजों ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। 6,077 वोटों की यह चोट बीजेपी को लंबे समय तक दर्द देने वाली है। देखना होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी इस झटके से कैसे उबरती है।