चुनावी साल में कर्णप्रयाग और नागरासू क्षेत्र में जो घटनाएँ हुईं, उससे स्थानीय जनता सकते में है। Nagarasu Gurdwara Nihang Violence कर्णप्रयाग के बाद जिस तरह से नगरासू गुरूद्वारे में चार दिन तक हाई वोल्टेज ड्रामा चला,वो भी सबने देखा, लेकिन इन सबके बीच हंगामा करने वाले निहंगो को अपने घर वापस जाने के लिए सेफ पैसेज देना, सभी को खटक रहा है। भले ही अब निहंगो को लेकर कुछ भी बयान दिए जा रहे हो, लेकिन मामला तो गर्मा ही गया है। वहीँ अब पूरा मामला चुनावी चश्मे से भी देखा जा रहा है। रुद्रप्रयाग से विधानसभा चुनाव लड़ चुके मोहित डिमरी का कहना है कि यब अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक हैं। ये घटनाएँ स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है तथा राज्य सरकार इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में विफल साबित हुई है। बीते कुछ वर्षों में उत्तराखंड में सांप्रदायिक तनाव और विवादों की घटनाएँ बढ़ी हैं, जिन पर अंकुश लगाने में सरकार की असफलता लगातार सामने आ रही है। कर्णप्रयाग में स्थानीय युवकों के साथ हुई एक सामान्य कहासुनी के बाद जिस प्रकार कुछ निहंग सिखों द्वारा तलवारों से हमला कर युवकों को घायल किया गया, वह अत्यंत गंभीर मामला है।
इसके बाद नागरासू गुरुद्वारे में कुछ निहंगों द्वारा हथियारों के बल पर कब्जा करने, तोड़-फोड़ करने, स्थानीय सेवादारों को परेशान करने तथा कई दिनों तक उपद्रव मचाने की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है । इन सबमे सबसे चिंताजनक बात यह है कि राज्य सरकार ने इस पूरे मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की है। गुरूद्वारे में उपद्रव करने वाले निहंगों को जाने दिया, जबकि स्थानीय युवकों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर दी गई और मामले को चमोली एवं रुद्रप्रयाग से हटाकर हरिद्वार स्थानांतरित कर दिया गया। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पंजाब और अन्य राज्यों से पवित्र हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए उत्तराखंड आते हैं। अधिकांश यात्री पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ यात्रा करते हैं, किंतु समय-समय पर कुछ अति कट्टर और उग्र प्रवृत्ति के निहंग हथियारों के साथ पहुँचकर विवाद और तनाव पैदा करते रहे हैं। यह गंभीर प्रश्न है कि तलवारों, भालों और अन्य धारदार हथियारों से लैस निहंगों को बिना पर्याप्त जांच और निगरानी के यात्रा कैसे करने दिया जाता है। इन सब बयानों के बीच कर्णप्रयाग-नगरासू प्रकरण के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून अपना काम करेगा, कोई कोताही नहीं बरती जाएगी, जो भी कानून हाथ में लेगा उस पर कार्रवाई तय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सभी को समाहित करने वाला राज्य है, ये देवभूमि है। यहां चारधाम, आदि कैलाश और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा चल रही है। जो भी कानून अपने हाथ में लेगा उस पर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की संस्कृति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि देवभूमि में सभी धर्मों का सम्मान होता है और शांति-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।