सुबह के पांच बजे, चारों तरफ पुलिस का पहरा सड़कों पर भारी फोर्स और अचानक गूंजने लगी बुलडोजरों की आवाज! देखते ही देखते रामनगर के पुछड़ी गांव में बड़ी कार्रवाई शुरू हो गई। 86 पक्के मकान जमींदोज कर दिए गए और करीब 14 हेक्टेयर वन भूमि को कब्जे से मुक्त कराने का दावा किया गया।लेकिन सवाल है कि आखिर कोसी नदी किनारे इतनी बड़ी बस्ती कैसे बस गई? किसने सरकारी जमीन पर कब्जे कराए? क्या इसके पीछे भू-माफिया का नेटवर्क काम कर रहा था? और अब प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद उन लोगों पर क्या एक्शन होगा, जिन पर जमीन बेचने के आरोप हैं। उत्तराखंड की धामी सरकार का ‘पीला पंजा’ एक बार फिर सरकारी जमीनों को निगलने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ काल बनकर टूटा है! नैनीताल जिले के रामनगर स्थित कोसी नदी किनारे बसी ‘पुछड़ी मुस्लिम बस्ती’ में आज तड़के एक महा-ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। दोस्तो रामनगर का तराई पश्चिमी वन प्रभाग की करीब 14 हेक्टेयर आरक्षित और बेहद बेशकीमती वन भूमि पर भू-माफियाओं ने जो अवैध साम्राज्य खड़ा किया था, उसे आज सुबह सिर्फ चंद घंटों के भीतर जमींदोज कर दिया गया। आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान राजनीतिक संरक्षण में भू-माफिया ताहिर मुल्ला ने उत्तर प्रदेश से आए लोगों को यह सरकारी जमीन कौड़ियों के दाम बेचकर पूरी बस्ती बसा दी थी। लेकिन कानून के राज में अब यह अवैध खेल नहीं चलेगा। 525 पुलिसकर्मियों, 3 कंपनी पीएसी और दर्जनों जेसीबी-बुलडोजर की फौज के साथ जिला प्रशासन ने इस पूरे इलाके में ऐसा चक्रव्यूह रचा कि बड़े-बड़ों के हौसले पस्त हो गए। क्या है इस बड़ी कार्रवाई का पूरा सच और कैसे ढहाया गया अतिक्रमण का यह गढ़? दोस्तो अवैध कब्जों पर धामी सरकार का सीधा प्रहार! सुबह के ठीक 5 बजे जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब रामनगर के पुछड़ी गांव में भारी भरकम बुलडोजर और जेसीबी मशीनों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। कोसी नदी के किनारे आरक्षित वन भूमि पर अवैध तरीके से बसाई गई पुछड़ी मुस्लिम बस्ती को नेस्तनाबूद करने के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त टीम पूरी तैयारी के साथ उतर चुकी थी। देखते ही देखते सालों पुराना अवैध कब्जा ताश के पत्तों की तरह बिखरने लगा!
दोस्तो इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए नैनीताल के जिला प्रशासन ने ऐसा सुरक्षा चक्रव्यूह तैयार किया था जिसे भेदना नामुमकिन था। नैनीताल के डीएम ललित मोहन रयाल के मुताबिक पूरे पुछड़ी इलाके को 2 सुपर जोन, 7 जोन, 14 सेक्टर और 6 बैरियरों में बांट दिया गया था। सुरक्षा का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि मौके पर 5 एएसपी, 6 सीओ, 25 इंस्पेक्टर, 82 दरोगा समेत करीब 525 पुलिसकर्मी और 3 कंपनी पीएसी की फौज तैनात थी। कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए चप्पे-चप्पे पर पहरा लगा दिया गया था और बाहरी लोगों की एंट्री पूरी तरह बैन थी।” दोस्तो आखिर आरक्षित वन भूमि पर यह पूरी बस्ती कैसे और किसने बसाई? सरकारी जांच और वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, इसके पीछे ताहिर मुल्ला नाम के एक कुख्यात भू-माफिया का हाथ है। आरोप है कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान मिले कथित राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर ताहिर मुल्ला ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों से आए मुस्लिमों को फारेस्ट की यह बेशकीमती जमीन अवैध रूप से बेच दी और यहाँ एक अवैध बस्ती खड़ी कर दी। वन विभाग ने इस माफिया के खिलाफ पुलिस और अपने महकमे में मामले भी दर्ज कराए हैं, और अब पुलिस सरगर्मी से इस मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है।
दोस्तो प्रशासन इस कार्रवाई के लिए पूरी कानूनी विधिक प्रक्रिया अपना चुका था। बकायदा पहले मुनादी करवाई गई थी और बीती शाम को ही पुलिस-वन विभाग की संयुक्त टीम को फाइनल ब्रीफिंग दे दी गई थी। प्रशासन का यह आक्रामक और सख्त रुख देखकर अतिक्रमणकारियों में ऐसा खौफ पैदा हुआ कि कई लोगों ने रात में ही खुद अपने पक्के मकानों को तोड़ना और कीमती सामान निकालना शुरू कर दिया था। लोग अपने घरों के दरवाजे, ईंटें और चौखट बचाकर सुरक्षित स्थानों की तरफ भागते नजर आए। दोस्तो रामनगर की पुछड़ी बस्ती में इस बुलडोजर एक्शन को सिर्फ भूमि कब्जा मुक्त कराने के तौर पर नहीं, बल्कि पहाड़ों में हो रहे कथित डेमोग्राफिक बदलाव के खिलाफ धामी सरकार की दूसरी सबसे बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले फेज-1 के तहत वर्ष 2025 में इसी इलाके में 23 हेक्टेयर सरकारी वन भूमि को 51 परिवारों से मुक्त कराया गया था। और आज दूसरे फेज में 86 पक्के अवैध मकानों को ध्वस्त कर कुल 14 हेक्टेयर बेशकीमती जमीन वन विभाग को वापस सौंप दी गई है। दोस्तो साफ संदेश है कि देवभूमि की जमीनों पर किसी भी तरह का लैंड जिहाद या अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोस्तो रामनगर के पुछड़ी गांव में गरजा यह बुलडोजर उन तमाम भू-माफियाओं के लिए खुली चेतावनी है जो सरकारी और आरक्षित वन भूमियों को अपनी जागीर समझते हैं। 14 हेक्टेयर बेशकीमती जमीन अब पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त हो चुकी है और वन विभाग के हवाले की जा रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ताहिर मुल्ला जैसे भू-माफिया और उन्हें संरक्षण देने वाले सफेदपोश नेता कब सलाखों के पीछे पहुंचेंगे?