मित्र पुलिस पर ये ‘दाग’ । Police Controversy । Human Rights । Uttarakhand News

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उत्तराखंड पुलिस जिसे “मित्र पुलिस” कहा जाता है लेकिन क्या इस छवि के पीछे छिपी है एक काली कहानी?बीते 6 महीनों में सामने आए कुछ ऐसे मामले जिन्होंने न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े किए, बल्कि भरोसे को भी झकझोर कर रख दिया।एक के बाद एक ऐसे कारनामे, जिन्हें जानकर आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे—क्या वाकई “मित्र पुलिस” अपनी जिम्मेदारी निभा रही है या फिर कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी चूक हो रही है?आखिर क्यों बार-बार पुलिस से जुड़े विवाद सामने आ रहे हैं? क्या ये कुछ गिने-चुने मामलों की बात है या फिर ये किसी बड़े पैटर्न की तरफ इशारा कर रहे हैं? दोस्तो एक हड़कंप मचाने वाला मामला फिर आया सामने तो बीते कुछ वक्त के वो मामले जो सिर्फ सवाल करते हैं। दोस्तो दोस्तो पुलिस की कुरुरता के वैसे तो कई किस्से हैं जो आजकल खूब चर्चा में लेकिन दोस्तो इतना कुछ हो जाने के बाद भी पुलिस महकमा सुधरने का काम नहीं कर रहा है। अब मै आज ये क्यों कह रहा हूं. वो आपको बताता हूं। वैसे ये मामला पिछले महिने का है नैनीतिला जिले के भवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस उत्पीड़न का एक सनसनीखेज मामला सामने आया यहाँ एक युवक ने पुलिसकर्मियों द्वारा की गई कथित अभद्रता और मारपीट से क्षुब्ध होकर जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।

मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। दोस्तो गैर कीजिएगा। मै आपको पिछले 5-6 महिने के ऐसे केस बताउंगा जिसको देख कर आप दंग रह जाएंगे। दोस्तो इस मामले में परिजनों द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, घटना 27 अप्रैल 2026 की है। मृतक बालम सिंह घरेलू सामान लेने चमाड़िया (लोहाली बाजार) गया था। आरोप है कि वह वहां नदी और पहाड़ियों की वीडियो बना रहा था, तभी खैरना पुलिस चौकी के कर्मियों ने बिना किसी कारण के उसके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया और उसका मोबाइल छीन लिया। इस में कहा गया गया कि पुलिसकर्मियों ने बालम सिंह के साथ गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। उसे जबरन गाड़ी में बैठाकर खैरना चौकी ले जाया गया, जहाँ उसके साथ मारपीट की गई, उसका सिम कार्ड तोड़ दिया गया और कथित तौर पर ₹5000 भी ले लिए गए। घर लौटने पर बालम सिंह ने अपनी पत्नी को बताया कि वह इस अपमान से बहुत आहत है।दोस्तो परिजनों का कहना है कि पुलिस के इस व्यवहार से बालम सिंह गहरे सदमे में था। तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे खैरना अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि युवक ने अपमान के कारण जहरीला पदार्थ खा लिया था लेकिन इसके बाद चौकाने वाली बात थी मृतक का सुसाइड नोट उसमें पुलिस के दुर्यहार का जिक्र था।

इस पुरे मामले में पुलिस ने अपना पक्ष रखा। अब ये तो पुलिसिया बयान है, वैसे अपने यहां की पुलिस मामले को सुलझाने की बजाय उसको उलझाना अच्छी तरह से जानती है इसलिए कुछ भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि दोस्तो इस मामले में भी पुलिस के बड़े अधिकारियों पर आरोप गंभीर लग रहे हैं लेकिन दोस्तो। दोस्तो आप थोड़ा बीते कुछ वक्त की इन खबरों पर नजर दौड़ाई। सुरुआत कर रहा हूं काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह से दोस्तो सुखवंत सिंह ने हल्द्वानी के एक होटल में अपनी जिंदगी खत्म कर दी। सुखवंत सिंह ने अपनी मौ’त से ठीक पहले एक फेसबुक लाइव किया था जिसमें उन्होंने अपनी बर्बादी का जिम्मेदार कुछ लोगों ओर पुलिस को आरोपियों को ठहराया था। दोस्तो दूसरा नाम पिथोड़ागढ़ के लक्ष्मीदत्त जोशी,लक्ष्मी दत्त जोशी ने 8 फरवरी 2023 को जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण नैनीताल को पत्र भेजकर आरोप लगाया था कि 6 फरवरी को शिकायत दर्ज कराने वे पिथौरागढ़ एसपी ऑफिस गए थे, जहां उन्हें एक कमरे में ले जाकर कथित तौर पर नग्न कर मारपीट की गई। उनके अनुसार कमरे में सीसीटीवी नहीं था और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दी गई।

दोस्तो इस मामले में पुलिस के बड़े पुलिस अधिकारी लोकेश्वर सिंह का नाम ठोप रहा पुलिस ने जांच की या नहीं लेकिन कोर्ट ने लोकेश्वर सिंह के खिलाफ केस दर्ज के आदेश हाल में दिए हैं। इसके अलावा तीसरे नंबर वो पहाड़ी है जो युवा है प्रतापनगर का केशव थलवाल। जी हां दोस्तो ये नाम हाल में खूब चर्चा में रहा है क्योंकि

उत्तराखंड में टिहरी जिले के लंबगांव पुलिस पर एक युवक ने बर्बर तरीके से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। युवक ने पुलिस पर निर्वस्त्र कर डंडों और बेल्ट से पीटने, पेशाब पिलाने, थूका हुआ पानी पीने के साथ ही पुलिस कर्मियों के जूते चाटने के लिए मजबूर करने का आरोप जड़ा है। वहीं, दूसरी ओर आरोपी इंस्पेक्टर ने उक्त व्यक्ति पर पांच मुकदमे दर्ज होने की बात कही है। साथ ही अन्य गंभीर आरोप भी लगाए हैं। केशव के मामले में हाईकोर्ट की फटकार कई बार मित्र पुलिस को लग चुकी है हाल में केशव का मेडिकल टेस्ट भी हुआ था जिसमें वो बेहद बुद्धिमान निकला तो कोर्ट ने पुलिस कर्मयों के मेडिकल टैस्ट तक की बात कर दी। दोस्तो इसके अलावा हाल एक मामला सतपुली के पंकज के आरोप।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पंकज ने आरोप लगाया कि SHO ने बिना पूरी बात सुने उस पर हाथ उठाया और उसे घसीटा गया। युवक ने भावुक होते हुए कहा कि पुलिस ने उसकी मां और रिश्तेदारों को भी थाने में खरी-खोटी सुनाई, जिससे वह बेहद आहत था। अब जरा इस शोर को देखिए, ये पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा है जो अब फूट रहा है सवाल तमाम हैं, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं, एक नही दो नहीं बल्कि कई ऐसे मामले जो “मित्र पुलिस” की छवि पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं।कहीं कथित उत्पीड़न से टूटी एक जिंदगी, कहीं आरोपों में घिरी कार्रवाई और कहीं न्याय की तलाश में भटकते लोग लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ये सिर्फ कुछ अलग-अलग घटनाएं हैं या फिर सिस्टम के अंदर कहीं गहरी खामी छिपी है?जब रक्षक पर ही सवाल उठने लगें तो आम आदमी आखिर भरोसा किस पर करे?क्या इन मामलों में निष्पक्ष जांच होगी?क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?या फिर ये मामले भी वक्त के साथ दबा दिए जाएंगे?क्योंकि याद रखिए। कानून का डर अपराधियों में होना चाहिए, न कि आम जनता के मन में।जरूरत है—सिर्फ जवाबों की नहीं बल्कि जवाबदेही की ताकि “मित्र पुलिस” का नाम सिर्फ नारा नहीं बल्कि हकीकत भी बन सके।