Kedarnath कौन फैला रहा है गंद, बड़ा संकट! | Plastic Pollution | Swachhata | Uttarakhand News

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केदारनाथ, जहां आस्था का सागर उमड़ रहा है, लेकिन क्या उसी के साथ बढ़ रही है एक बड़ी मुसीबत?दो हफ्तों में 7 टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा 6 डंपर वेट गार्बेज, क्या पवित्र यात्रा मार्ग अब कूड़े का ढेर बनता जा रहा है?एक तरफ 7 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। दूसरी तरफ बर्फबारी के बीच ये गंदगी क्या पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी नहीं? क्या हम अपनी आस्था के साथ जिम्मेदारी निभा रहे हैं या केदारनाथ की पवित्रता पर खुद ही सवाल खड़े कर रहे हैं?ये सवाल सिर्फ प्रशासन से नहीं हम सब से है! दोस्तो क्या हम अपनी आस्था के साथ अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं?क्योंकि जिस केदारनाथ धाम को हम भगवान शिव का पवित्र धाम मानते हैं। वही आज प्लास्टिक कचरे के बोझ तले दबता हुआ नजर आ रहा है।पिछले सिर्फ दो हफ्तों में, करीब 7 टन प्लास्टिक कचरा निकाला गया है।और हर दिन 5 से 6 डंपर गीला कचरा रुद्रप्रयाग भेजा जा रहा है।सोचिए ये आंकड़े क्या कहते हैं? दोस्तो मै आपको इस विस्तार से बताउँ उसे पहले जरा इसबात पर गौर कीजिए। दोस्तो उत्तराखंड के चारों धामों में आस्था और भक्ति का माहौल के बीच श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी है। चारों धाम में जबरदस्त तरीके से भीड़ उमड़ रही है। अभी तक 7 लाख 13 हजार से ज्यादा श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर आशीर्वाद ले चुके हैं। वहीं दोस्तो यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या की बात करूं तो यमुनोत्री धाम में 4 मई को 8,818 श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन किए. जिसमें 4,537 पुरुष, 3,949 महिला और 332 बच्चे शामिल रहे और दोस्तो इस तरह से अभी तक यमुनोत्री धाम में 1,07,052 श्रद्धालु मां यमुना के दर पर शीश नवा चुके हैं। वहीं दोस्तो गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या को जब देखता हूं तो गंगोत्री धाम में 4 मई को 8,393 श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया. जिसमें 4,641 पुरुष, 3,578 महिला और 174 बच्चे शामिल रहे। ऐसे में दोस्तो अभी तक 1,05,586 श्रद्धालु गंगोत्री धाम पहुंचकर मां गंगा का आशीर्वाद ले चुके हैं।

दोस्तो इस तरह से अभी तक यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में 2,12,638 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं, अब बात आती है है बाबा केदार केदार के धाम की यानी केदारनाथ धाम की। केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या बताता हूं आपको दोस्तो हिमालय की गोद में बसे ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग केदारनाथ धाम में 4 मई को 19,447 श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए जिसमें 12,346 पुरुष, 7,033 महिला और 68 बच्चे भी शामिल रहे। इस तरह से अभी तक 3,27,532 श्रद्धालु बाबा केदार का आशीर्वाद ले चुके हैं। दोस्तो बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या: बदरीनाथ धाम में 4 मई को 13,939 श्रद्धालुओं ने बदरी विशाल के दर्शन किए जिसमें 7,984 पुरुष, 4,998 महिला और 957 बच्चे शामिल रहे। इस तरह से अभी तक बदरीनाथ धाम में 1,73,405 श्रद्धालु दर्शन कर पुण्य कमा चुके हैं। दोस्तो वहीं, चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या की बात करें तो अभी तक 7,13,575 श्रद्धालु चारों धाम के दर्शन कर चुके हैं।

दोस्तो केदारनाथ धाम में इस वर्ष आस्था अपने चरम पर है। 22 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से 4 मई तक 3 लाख 35 हजार से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं। प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त धाम पहुंच रहे हैं जहां एक ओर श्रद्धा का यह अभूतपूर्व सैलाब नए रिकॉर्ड बना रहा है वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। दोस्तो पवित्र मंदाकिनी नदी, जो इस धाम की जीवनरेखा मानी जाती है, आज प्लास्टिक प्रदूषण के बोझ तले कराहती नजर आ रही है। यात्रा मार्ग और पड़ावों पर फैला प्लास्टिक कचरा न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसे सीधे नदी में फेंके जाने की घटनाएं स्थिति को और भी भयावह बना रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सुलभ इंटरनेशनल के 400 से अधिक सफाई कर्मी सीतापुर से केदारनाथ तक लगातार सफाई व्यवस्था में जुटे हुए हैं। सोनप्रयाग में प्लास्टिक कचरे को कॉम्पैक्ट करने के लिए विशेष मशीनें लगाई गई हैं, जहां अब तक लगभग 7 टन प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस कर रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, गीले कचरे को प्रतिदिन 5 से 6 डंपरों के माध्यम से रुद्रप्रयाग स्थित डंपिंग जोन तक पहुंचाया जा रहा है। दोस्तो हालांकि, प्रशासन और सफाई कर्मियों की यह मुस्तैदी सराहनीय है, लेकिन कुछ स्थानीय व्यापारियों और असामाजिक तत्वों की लापरवाही इस पूरे प्रयास पर भारी पड़ती दिख रही है। यात्रा मार्ग पर संचालित कई दुकानों, ढाबों और छोटे कारोबारियों द्वारा प्लास्टिक का अंधाधुंध उपयोग और कचरे का अनुचित निस्तारण समस्या को लगातार बढ़ा रहा है, साथ ही प्रशाशन और और व्यापार संघ का कहना है कि मंदाकिनी नदी किनारे स्थापित दुकानें और जगह-जगह ढाबा, नींबू पानी के साथ छोटा रोजगार कर रहे सभी व्यापारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे प्लास्टिक कचरे को कूड़ेदान में ही डालें और यहां वहां कचरा ना करें। तीर्थ यात्रियों को भी स्वच्छता को लेकर जागरूक किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने सख्त रुख अपनाया है, लेकिन दोस्तो इस बीच मेरे सामने एक हैरान कर देना वाली तस्वीर भी आई वो भी दिखिए। बद्रीनाथ धाम की यात्रा के दौरान पुलिस ने कुछ यात्रियों को शराब के साथ पकड़ा है।ये लोग तीर्थ यात्रा के नाम पर नियमों की अनदेखी कर रहे थे।पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें रोका और सख्त चेतावनी दी है।प्रशासन का कहना है कि यात्रा के दौरान नियमों का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। केदारनाथ सिर्फ एक धाम नहीं, आस्था का सबसे पवित्र प्रतीक है जहां हर कदम भक्ति से भरा होता है और हर सांस में श्रद्धा बसती है। लेकिन आज उसी पवित्र धाम के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है—क्या हम अपनी आस्था को बचाते हुए। उसकी पवित्रता भी बचा पा रहे हैं?प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, सफाई कर्मी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, लेकिन क्या सिर्फ इतना काफी है?जब तक हर श्रद्धालु, हर व्यापारी और हम सब अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे तब तक ये प्रयास अधूरे ही रहेंगे। आस्था सिर्फ दर्शन तक सीमित नहीं होती आस्था उस जगह के सम्मान में भी दिखती है जहां हम सिर झुकाते हैं।अगर हम सच में केदारनाथ को पूजते हैं तो हमें उसकी पवित्रता को भी उतनी ही श्रद्धा से बचाना होगा। क्योंकि अगर आज हम नहीं चेतेतो आने वाली पीढ़ियां शायद वो केदारनाथ न देख पाएं, जिसकी तस्वीर हमने अपने मन में बसाई है।तो आइए सिर्फ दर्शन ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी निभाएं क्योंकि स्वच्छ केदारनाथ ही सच्ची श्रद्धा है।