Haldwani का टूटा रिकॉर्ड! जलप्रलय से हिला सिस्टम! | Floodalert | Landslide | Uttarakhand News

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दोस्तो उत्तराखंड में एक बार फिर बड़ा संकट है, बारिश ऐसी हो रही है कि कोई इलाका ऐसा नहीं है जहां से नुक्सान की खबर ना आ रही हो। ऐसे में दोस्तो हल्द्वानी में बारिश ने 10 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, तो देहरादून में आधी रात को सड़कों पर सैलाब उतर आया! 192 मिलीमीटर बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि शहर से गांव तक हाहाकार मच गया। आखिर सितंबर की इस बारिश ने उत्तराखंड में ऐसा रौद्र रूप क्यों दिखाया? क्या ये सिर्फ बारिश है या किसी बड़े खतरे का संकेत? खबर देखिए दोस्तो। दोस्तो सोचिए, आप आधी रात को अपने घर में चैन से सो रहे हों और अचानक किसी खौफनाक नदी की आवाज आपको जगाए, और आंख खुलते ही आपके बेड के नीचे समंदर बह रहा हो! यह कोई डरावना सपना नहीं, बल्कि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और कुमाऊं के द्वार हल्द्वानी में कुदरत का लाइव महा-तांडव है! हल्द्वानी में 24 घंटे के भीतर 192 मिलीमीटर बारिश ने पिछले 10 साल का रिकॉर्ड मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है!

दोस्तो देहरादून के प्रेमनगर में बहती नदी ने चलती कार को तिनके की तरह 2 किलोमीटर दूर बहा दिया, जिसमें दो मासूमों की जल-समाधि हो गई! आखिर करोड़ों के ड्रेनेज सिस्टम और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच देवभूमि में यह जल-प्रलय क्यों आया? दोस्तो यहां सबसे पहले आप कुमाऊं के सबसे बड़े शहर हल्द्वानी से। 24 घंटे के भीतर हल्द्वानी में 192 मिलीमीटर की रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, सितंबर के शुरुआती हफ्ते में ऐसी बारिश ने पिछले 10 सालों के ऑल-टाइम रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है! काठगोदाम से लेकर कलसिया और रक्सिया नाले इस कदर उफान पर आए कि शहर के रिहायशी इलाकों में 3 से 4 फीट पानी भर गया। अलचौना गांव में ककारिया नाले का मलबा दो दर्जन से ज्यादा घरों को लील गया। यह कोई साधारण मानसून नहीं, बल्कि पहाड़ों के ऊपर फटा एक ‘वॉटर बम’ है, जिसने पूरे शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है! दोस्तो अब रुख करते हैं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का। वो 1 सितंबर की रात करीब १२ बजे, जब पूरा शहर सो रहा था, तब डालनवाला और भगत सिंह कॉलोनी में प्रलय ने दस्तक दी। मूसलाधार बारिश के चलते बरसाती नदियां और रिहायशी नालों का पानी ओवरफ्लो होकर सीधे वीआईपी इलाके डालनवाला की सड़कों पर बहने लगा। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि सड़कों पर खड़ी गाड़ियां तैरने लगीं। लोग डर के मारे रात भर सो नहीं सके कि कब पानी उनके कमरों में घुस जाए! टपकेश्वर महादेव मंदिर के पास तमसा नदी खतरे के निशान को पार कर गई, जिससे पूरे इलाके में पुलिस को आधी रात को लाउडस्पीकर लेकर अलर्ट जारी करना पड़ा। दोस्तो कुदरत का यह कहर सिर्फ संपत्ति तक सीमित नहीं रहा, इसने इंसानी जिंदगियों को भी बेरहमी से लील लिया। देहरादून के प्रेमनगर इलाके में लोअर कंडोली-पौंधा रोड पर अलसुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ। तीन सवारियों से भरी एक हुंडई क्रेटा कार उफनते नाले को पार करने की कोशिश में पानी के प्रचंड वेग में समा गई। पानी का बहाव इतना खौफनाक था कि कार तिनके की तरह बहते हुए 2 किलोमीटर नीचे चली गई! एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने रात भर चले बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद एक महिला को तो जिंदा बचा लिया।

दोस्तो पूरे प्रदेश में हाहाकार, 9 जिलों में महा-अलर्ट और मलबे का साम्राज्य! दिखाई दे रहा है। दोस्तो आंकड़े डराने वाले हैं। पूरे उत्तराखंड में पिछले 48 घंटों के भीतर दसयों लोगों की मौ’त मलबे में दबने और बहने से हो चुकी है। अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी नदियां डेंजर लेवल को पार कर चुकी हैं। बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर पागलनाला और पीपलकोटी के पास पहाड़ टूटने से रास्ता पूरी तरह ब्लॉक है। यमुनोत्री हाईवे और धारचूला-तवाघाट नेशनल हाईवे पर भी टनों मलबे का साम्राज्य है। मौसम विभाग (IMD) ने 3सितंबर को भी चमोली, नैनीताल, बागेश्वर और हरिद्वार समेत 9 संवेदनशील जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी रखा है! प्रशासन ने पौड़ी और नैनीताल के सभी स्कूलों को बंद रखने का आदेश दिया है, लेकिन सवाल यह है कि कंक्रीट के इस अंधे विकास के कारण क्या उत्तराखंड हर साल सिर्फ तबाही झेलने के लिए अभिशप्त है? दोस्तो हल्द्वानी का 10 साल का रिकॉर्ड टूटना और देहरादून में आधी रात को आई बाढ़ कोई सामान्य मौसमी घटना नहीं है, यह इंसानी घमंड के खिलाफ प्रकृति का खुला विद्रोह है। दोस्तो इस भीषण आपदा में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं कमेंट बॉक्स में लिखें। क्या आपको लगता है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर देहरादून का ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है? अपनी राय जरूर साझा करें। वीडियो को शेयर करें ताकि सिस्टम तक आवाज पहुंचे।