जी हां दोस्तो लॉ स्टूडेंट का शराब नेटवर्क, देहरादून में पढ़ाई करने आया एक लॉ स्टूडेंट और आरोप है कि उसने किताबों के बजाय शराब की अवैध सप्लाई का नेटवर्क खड़ा कर दिया! हॉस्टल से पीजी तक कथित होम डिलीवरी, व्हाट्सएप पर ऑर्डर और डिलीवरी के लिए बाकायदा लड़कों की टीम! आबकारी विभाग की कार्रवाई में आरोपी की मां की गिरफ्तारी और शराब का जखीरा बरामद होने के बाद इस पूरे नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं। दावा है कि इस अवैध कारोबार से सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा था। आखिर कैसे चल रहा था यह कथित शराब सिंडिकेट? कौन-कौन था इस नेटवर्क में शामिल और कैसे खुला पूरा राज? दोस्तो सोचा था बेटा शहर जाकर वकालत पढ़ेगा, कानून की किताबें रटेगा और समाज में नाम रोशन करेगा। लेकिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जो सनसनीखेज सच सामने आया है, उसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी! वकालत की पढ़ाई करने आया महज 25 साल का एक छात्र, देवभूमि देहरादून में अवैध शराब तस्करी का सबसे बड़ा ‘डॉन’ बन बैठा! जी हां, हैरान मत होइए, पढ़ाई की आड़ में इस शातिर दिमाग छात्र ने एक ऐसा हाईटेक नेटवर्क तैयार कर दिया, जो कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं के कमरों तक सीधे शराब की होम डिलीवरी कर रहा था! महज 4 साल के अंदर इस लड़के ने करोड़ों की प्रॉपर्टी खड़ी कर दी, देहरादून में एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन आलीशान कैफे खोल दिए!
आखिर कैसे इस 25 साल के लॉ स्टूडेंट ने पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे इतना बड़ा सिंडिकेट खड़ा कर दिया? क्या था इसका ‘व्हाट्सएप डिलीवरी मॉडल’? हरियाणा का रहने वाला गर्वित उर्फ विक्रांत साल 2022 में देहरादून के बिधौली क्षेत्र में एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में लॉ (Law) की पढ़ाई करने आया था। शुरुआती दिनों में सबने देखा कि उसने बिधौली में तीन कैफे शुरू किए और अपने पूरे परिवार को भी वहीं बुला लिया। लेकिन कैफे के खाने की आड़ में जो परोसा जा रहा था, वो था मौ’त और अपराध का सामान। गर्वित हरियाणा और दिल्ली से बेहद सस्ती और अवैध शराब लाता था और उस पर ‘इंपोर्टेड’ का ठप्पा लगाकर दून के कॉलेजों, हॉस्टलों और पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं को महंगे दामों में बेचता था। सीएचसी दोस्तो इस 25 साल के लड़के का दिमाग किसी शातिर अपराधी से कम नहीं था। इसने शराब के धंधे को बाकायदा एक ‘स्टार्टअप’ का रूप दे दिया था। गर्वित ने देहरादून के अलग-अलग हॉस्टलों और पीजी में बकायदा शराब की ‘रेट लिस्ट’ और पैम्फलेट बंटवा रखे थे। ऑर्डर लेने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए गए थे। इस धंधे को चमकाने के लिए उसने 18 से 25 साल के स्थानीय बेरोजगार युवाओं को 15-15 हजार रुपये महीने की सैलरी पर रखा और उन्हें टू-व्हीलर (स्कूटी) दी। नियम इतने सख्त थे कि हर डिलीवरी बॉय को सुबह और शाम व्हाट्सएप ग्रुप पर अपनी ‘सेल्फी’ भेजकर हाजिरी लगानी पड़ती थी, जिसके बाद उन्हें कस्टमर की लोकेशन भेजी जाती थी।
दोस्तो इस नेटवर्क के जरिए गर्वित रोजाना 20 से 25 पेटी इंपोर्टेड शराब की होम डिलीवरी कर रहा था, जिससे उत्तराखंड सरकार को सालाना 5 से 10 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था! लेकिन पाप का घड़ा एक दिन भरता जरूर है। आबकारी विभाग की टीम ने जब बिधौली में गर्वित के ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां बेड के बक्से और सूटकेस के अंदर से विदेशी शराब का एक विशाल जखीरा बरामद हुआ। हैरान करने वाली बात ये थी कि इस काले धंधे में गर्वित की मां भी उसका पूरा साथ दे रही थी, जिसे पुलिस ने मौके से गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई होते ही मास्टरमाइंड गर्वित फरार हो गया और उसने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने उसे दुत्कार दिया। चौतरफा शिकंजा कसने के बाद आखिरकार आरोपी गर्वित उर्फ विक्रांत ने सीजेएम कोर्ट में सरेंडर कर दिया और अब वो जेल की हवा खा रहा है। इसके साथ ही उसके साथी आदित्य को भी 10 पेटी शराब के साथ दबोच लिया गया है। दोस्तो ये बेहद शर्मनाक और डराने वाली बात है कि जिस उम्र में युवाओं के हाथों में डिग्रियां होनी चाहिए, देश का भविष्य बदलने की ताकत होनी चाहिए, उस उम्र में चंद रुपयों के लालच में हमारे युवा अपराध की दलदल में धंसते जा रहे हैं। आज आबकारी विभाग और दून पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश तो कर दिया है, लेकिन सवाल अभी भी बड़ा है कि आखिर हॉस्टलों और पीजी के मालिकों को अपने ही परिसर में चल रहे इस अवैध धंधे की भनक क्यों नहीं लगी? पुलिस को अब ऐसे तमाम हॉस्टलों और संदिग्ध कैफे पर भी कड़ा हंटर चलाना होगा, ताकि देवभूमि के छात्रों का भविष्य इस नशे की आग में झुलसने से बचाया जा सके। इस पूरे सनसनीखेज खुलासे पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।