देवभूमि में जंग का अखाड़ा बने कॉलेज? | Student Union Election | ABVP | NSUI | Uttarakhand News

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उत्तराखंड के कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव का बिगुल बजते ही कैंपस सियासत का अखाड़ा बनते नजर आ रहे हैं!कोटद्वार से मसूरी तक नामांकन के दौरान छात्र संगठनों के बीच जोरदार शक्ति प्रदर्शन और हंगामा देखने को मिला। कहीं बैरिकेड्स टूटे, तो कहीं नारेबाजी से पूरा कैंपस गूंज उठा।बाहरी छात्रों के प्रवेश को लेकर भी गुट आमने-सामने आए और पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा।आखिर छात्रसंघ चुनाव की ये दावेदारी इतनी आक्रामक क्यों हो गई?क्या कैंपस की सियासत अब शक्ति प्रदर्शन और टकराव का अखाड़ा बनती जा रही है? देखिए शिक्षा के मंदिर कैसे बने हुड़दंग का गड़। दोस्तो पहाड़ की छात्र राजनीति इस समय अपने उफान पर है! लोकतंत्र के इस पहले पायदान पर जब छात्र नेता अपनी ताकत का एहसास कराने उतरते हैं, तो नियम और कायदे कैसे हवा में उड़ा दिए जाते हैं, इसकी बानगी देखने को मिल रही है पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार में! डॉ. पीतांबर दत्त बड़थ्वाल पीजी कॉलेज कोटद्वार और कण्वघाटी महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के नामांकन के दौरान ऐसा हंगामा बरपा कि पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ गया! हल्द्वानी के MBPG कॉलेज में छात्रसंघ चुनाव के दौरान माहौल बिगड़ गया!छात्रों की भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा और लाठियां चलानी पड़ीं।आखिर चुनावी दावेदारी के बीच कैंपस में इतना तनाव क्यों बढ़ा? देख रहे हैं ना आ इन तस्वरों को उत्तराखंड सरकार के निर्देश पर राज्य भर के तमाम कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। लेकिन कोटद्वार में इस प्रक्रिया के शुरू होते ही माहौल पूरी तरह से गर्मा गया। पहले ही दिन कोटद्वार पीजी कॉलेज में 58, राजकीय महाविद्यालय कण्वघाटी में 14 और जयहरीखाल में 4 नामांकन पत्रों की धड़ाधड़ बिक्री हुई। लेकिन जैसे ही विभिन्न छात्र संगठनों के प्रत्याशी अपने समर्थकों के हुजूम के साथ ढोल-नगाड़ों की थाप पर कॉलेज कैंपस की ओर बढ़े, व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई! आरोप है कि हुड़दंग मचाने के लिए कॉलेजों में भारी संख्या में बाहरी लड़कों को भी जुटाया गया था। जब इन बाहरी तत्वों ने जबरन कॉलेज परिसर में घुसने की कोशिश की, तो पुलिस और कॉलेज प्रशासन के सुरक्षा चक्र ने उन्हें रोक लिया। इसी बात को लेकर छात्र नेता भड़क गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी नारेबाजी शुरू हो गई। देखते ही देखते कैंपस के बाहर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और दो प्रमुख छात्र गुटों के समर्थक आमने-सामने आ गए, जिससे कई घंटों तक कोटद्वार की सड़कों पर भारी जाम लगा रहा। दोस्तो सवाल यह है कि क्या छात्र राजनीति अब केवल लाठी, डंडे, पैसे और हुड़दंग के दम पर लड़ी जाएगी? आम छात्र और स्थानीय लोगों का आरोप है कि कॉलेज की मूलभूत समस्याएं जस की तस पड़ी हैं—न तो समय पर क्लासेस चलती हैं, न ही लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें हैं। लेकिन इन गंभीर मुद्दों पर बात करने के बजाय, छात्र संगठन केवल अपनी राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए कैंपस में दहशत और हंगामे का माहौल बना रहे हैं। ।

दोस्तो बढ़ते बवाल को देखते हुए कोटद्वार कोतवाली पुलिस ने साफ चेतावनी जारी की है कि यदि किसी भी संगठन ने आदर्श आचार संहिता या लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का उल्लंघन किया, तो सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें हवालात की हवा खिलाई जाएगी। उधर, चुनाव अधिकारियों का कहना है कि नामांकन पत्रों की जांच के बाद शरारती तत्वों की पहचान कर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दोस्तो कोटद्वार और पूरे गढ़वाल क्षेत्र में हालिया छात्रसंघ चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि युवाओं का मूड बदल रहा है। लेकिन इस बदलाव की आड़ में हुड़दंग और हिंसा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि आने वाले मतदान के दिन प्रशासन सुरक्षा के क्या इंतजाम करता है, या फिर यह छात्रसंघ चुनाव किसी बड़े बवाल की भेंट चढ़ जाता है।